Diesel SUV Future in India: क्या BS7 नियम तोड़ देंगे डीजल कारों की पकड़? जानें एक्सपर्ट्स की राय

भारत में SUV और लग्जरी सेगमेंट में डीजल कारों का दबदबा बरकरार, लेकिन BS7 उत्सर्जन नियम बदल सकते हैं खेल। जानें महिंद्रा और मर्सिडीज जैसी कंपनियों का क्या है प्लान।

 
Diesel vs EV vs Hybrid Trends India

भारत में हैचबैक और सेडान खरीदने वालों ने शायद डीजल से दूरी बना ली हो, लेकिन टॉर्क पसंद करने वाले स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल (SUV) के शौकीनों, ऑफ-रोडर्स और लंबी दूरी की यात्रा करने वालों के लिए यह अभी भी पसंदीदा फ्यूल बना हुआ है. इस वफादार ग्राहक वर्ग की बदौलत, पिछले तीन सालों से डीजल पैसेंजर व्हीकल्स (PVs) का मार्केट शेयर मोटे तौर पर 18 फीसदी के आसपास स्थिर बना हुआ है. हालांकि, 2012-13 में 47 फीसदी के अपने पक लेवल से इसमें गिरावट आई है, क्योंकि पॉल्यूशन के टाइट स्टैंडर्ड और इंडस्ट्री के पेट्रोल, CNG और इलेक्ट्रिफिकेशन की ओर मुड़ने के कारण डीजल धीरे-धीरे शहरी कम्यूटर कारों से बाहर होता गया.

हालांकि, इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक, अब जब BS7 उत्सर्जन मानकों के कारण कॉस्ट में भारी बढ़ोतरी होने वाली है, तो अगला रेगुलेटरी साइकिल यह तय करेगा कि SUV सेगमेंट में डीजल की पकड़ बनी रहती है या आखिरकार वह टूट जाती है. डीजल अब एंट्री-लेवल के शहरी खरीदारों के लिए प्रतिस्पर्धा नहीं कर रहा है. इसके बजाय, यह बड़े वाहनों में सेंट्रिक होता जा रहा है, जहां कस्टमर अभी भी फ्यूल टाइप में बदलाव की तुलना में खींचने की ताकत (पुलिंग पावर), हाईवे पर माइलेज और ड्राइविंग रेंज को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं.

वैसे छोटे डीजल वाहनों में निवेश करना अब ज्यादातर व्हीकल मेकर्स के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद नहीं रहा, इसलिए बाजार पर उन मेकर्स का दबदबा बढ़ता जा रहा है जिन्होंने इस फ्यूल में निवेश जारी रखा है. महिंद्रा एंड महिंद्रा को इसका फायदा मिला है, जिसकी डीजल से चलने वाली SUV जैसे Scorpio, Thar और Bolero की जबरदस्त मांग देखी जा रही है.

M&M पोर्टफोलियो को रहा डायवर्सिफाई

महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी भी अब बढ़ती एकाग्रता और रेगुलेटरी जोखिमों के बीच, किसी एक फ्यूल पर दांव लगाने के बजाय, अलग-अलग तकनीकों में अपनी स्थिति मज़बूत कर रही है. महिंद्रा के ऑटोमोटिव डिवीजन के चीफ एग्जीक्यूटिव नलिनिकांत गोलागुंटा ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि हमारा SUV पोर्टफोलियो अलग-अलग तरह के पावरट्रेन ऑप्शंस पर आधारित है, जो इस्तेमाल के तरीकों, इलाके और वास्तविक दुनिया के उपयोग के आधार पर ग्राहकों की जरूरतों में मौजूद व्यापक विविधता को दर्शाता है. उन्होंने आगे कहा कि हालांकि हम अपनी EV जर्नी को तेज करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, फिर भी ICE वाहन (जो जीवाश्म ईंधन से चलते हैं) कई कस्टमर्स के लिए रेलेवेंट बने हुए हैं, और हम सभी पावरट्रेन में इनोवेशन करना जारी रखेंगे.

मर्सिडीज-बेंज इंडिया की सेल

लग्जरी व्हीकल मार्केट में, जहां खरीदार परफॉर्मेंस और स्वामित्व की कॉस्ट पर ध्यान केंद्रित करते हैं, डीजल से चलने वाले मॉडलों की मांग मजबूत बनी हुई है – मेकर्स का कहना है – भले ही वे इलेक्ट्रिक पावरट्रेन में भी डायवर्सिटी लेकर आ रहे हों. मर्सिडीज-बेंज इंडिया के MD और CEO संतोष अय्यर ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि पिछली तिमाही में, हमने डीजल की तरफ एक बड़ा बदलाव देखा, हमारी 50 फीसदी से ज्यादा सेज्स डीजल मॉडल्स से हुई, जिसकी मुख्य वजह टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप (गाड़ी रखने का कुल खर्च) थी. अय्यर ने कहा कि कस्टमर गाड़ी रखने की कॉस्ट, खरीदने की कीमत, चलाने का खर्च और रेजिडुअल वैल्यू (गाड़ी की बची हुई कीमत) के आधार पर फैसला करेंगे. उन्होंने यह भी जोड़ा कि कंपनी को प्लग-इन हाइब्रिड, हाइब्रिड और EVs के लिए भी बराबर मौके दिख रहे हैं.

फ्यूल कॉस्ट नहीं परफॉर्मेंस

यह ट्रेंड दिखाता है कि भारत में डीजल की अहमियत अब किफायती होने से हटकर बेहतर परफॉर्मेंस की तरफ चली गई है. Jato Dynamics के प्रेसिडेंट रवि भाटिया ने मीडिय रिपोर्ट में कहा​ कि यह कोई ऐसा ग्राहक नहीं है जो बजट देखकर डीजल चुन रहा हो ताकि वह फ्यूल पर पैसे बचा सके. उन्होंने कहा कि यह वह ग्राहक है जो 1 करोड़ रुपए की लग्जरी SUV खरीद रहा है, और फिर भी डीजल को इसलिए पसंद कर रहा है क्योंकि उसमें जबरदस्त टॉर्क मिलता है, उसे चलाना आसान होता है और लंबी दूरी के सफर के लिए वह ज्यादा व्यावहारिक होती है.

रेगुलेटरी रिस्क से कितनी बढ़ेगी कीमत?

उम्मीद है कि BS7 उत्सर्जन नियमों की वजह से डीजल गाड़ियों के लिए कम्प्लायंस कॉस्ट (नियमों का पालन करने का खर्च) काफी बढ़ जाएगी, जिससे इस सेगमेंट का पूरा आर्थिक समीकरण बदल सकता है. भाटिया ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि कम्प्लायंस कॉस्ट बढ़ने से डीजल गाड़ियों की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं. ऐसे में गाड़ी बनाने वाली कंपनियों और कस्टमर्स, दोनों को यह फैसला करना होगा कि क्या डीजल की मौजूदा मजबूत पकड़ अगली रेगुलेटरी लहर का सामना कर पाएगी या नहीं.

इंडस्ट्री के अनुमानों के मुताबिक, BS7 से जुड़ी कीमतों में बढ़ोतरी हर गाड़ी पर 30,000 रुपए से लेकर 1 लाख रुपए से भी ज्यादा हो सकती है. 10-20 लाख रुपए की SUV कैटेगरी के खरीदारों के लिए—जो पारंपरिक तौर पर डीजल का सबसे बड़ा बाजार रहा है—यह एक अहम मोड़ साबित हो सकता है. भाटिया ने कहा कि सवाल यह है कि क्या कीमत को लेकर संवेदनशील डीजल के पक्के ग्राहक, कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी के बावजूद डीजल ही चुनेंगे? या फिर वे CNG, हाइब्रिड या किसी बेस-स्पेक (शुरुआती मॉडल वाली) EV की तरफ चले जाएंगे?