Geely i-HEV: 45km/l का माइलेज देकर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, AI से चलेगी यह कार

चीन की Geely Auto ने पेश की i-HEV हाइब्रिड तकनीक। AI की मदद से कार ने दिया 45 किमी प्रति लीटर का माइलेज। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुई कामयाबी। जानें कैसे काम करता है यह सिस्टम।

 
स्मार्ट हाइब्रिड कार फीचर्स

चीन की जानी-मानी कार कंपनी Geely Auto ने एक नई स्मार्ट हाइब्रिड तकनीक पेश की है, जिसका नाम i-HEV है. ये तकनीक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर काम करती है और दावा किया जा रहा है कि ये आम हाइब्रिड कारों से कहीं ज्यादा बेहतर है. हाल ही में इसके टेस्ट में बहुत ही शानदार माइलेज देखने को मिला. इस सिस्टम ने सिर्फ 2.22 लीटर पेट्रोल में 100 किलोमीटर का सफर तय किया, यानी लगभग 45 किलोमीटर प्रति लीटर. इस उपलब्धि को Guinness World Records ने भी मान्यता दी है.

स्मार्ट AI सिस्टम लगा है

इस नई तकनीक की खास बात ये है कि इसमें एक स्मार्ट AI सिस्टम लगा है. ये सिस्टम गाड़ी चलाते समय मौसम, तापमान, नमी और रास्ते की ऊंचाई जैसी चीजों को समझता है. फिर उसी हिसाब से यह तय करता है कि पेट्रोल इंजन कब चले और इलेक्ट्रिक मोटर कब काम करे. इससे गाड़ी कम पेट्रोल में ज्यादा दूरी तय कर पाती है और फ्यूल की बचत होती है.

1.5 लीटर का पेट्रोल इंजन

अगर इसकी ताकत की बात करें तो इसमें 1.5 लीटर का पेट्रोल इंजन दिया गया है, जो एक मजबूत इलेक्ट्रिक मोटर के साथ मिलकर काम करता है. ये इंजन बहुत ज्यादा एफिशिएंट है और लगभग 48% तक एनर्जी का सही इस्तेमाल करता है. वहीं, इलेक्ट्रिक मोटर काफी ताकतवर है, जिससे गाड़ी बहुत तेजी से स्पीड पकड़ सकती है. खासकर शहर में, जहां ट्रैफिक ज्यादा होता है, यह सिस्टम आराम से गाड़ी चलाने में मदद करता है और ब्रेक लगाते समय भी ऊर्जा को बचाकर दोबारा इस्तेमाल करता है.

कंपनी का प्लान

इस तकनीक का टेस्ट चीन के Hainan द्वीप पर किया गया था, जहां कंपनी ने Emgrand मॉडल का इस्तेमाल किया. यहां AI सिस्टम ने हर पल डेटा को समझकर इंजन को सही तरीके से चलाया, जिससे इतनी शानदार माइलेज हासिल हुई. Geely की ये नई तकनीक अब जापान की बड़ी कंपनी टोयोटा के लिए चुनौती बन सकती है, जो कई सालों से हाइब्रिड कारों में आगे रही है. Geely का कहना है कि उनकी ये तकनीक न सिर्फ पेट्रोल बचाती है, बल्कि गाड़ी को और ज्यादा स्मार्ट भी बनाती है.आने वाले समय में कंपनी इस i-HEV तकनीक को अपनी कई कारों में लाने वाली है. इससे लोगों को सस्ती ड्राइविंग, बेहतर माइलेज और पर्यावरण के लिए अच्छा विकल्प मिल सकता है.