Tesla Robotaxi Night Driving: एलन मस्क ने मानी बड़ी तकनीकी कमी, अंधेरे में छोटे जानवरों को पहचानने में आ रही है दिक्कत

टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने स्वीकार किया है कि रात के समय रोबोटैक्सी को सड़क पर छोटे जानवरों को पहचानने में तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

 
Tesla camera vision system

टेस्ला की बहुप्रतीक्षित रोबोटैक्सी सर्विस के सामने रात के समय ड्राइविंग को लेकर एक बड़ी तकनीकी समस्या खड़ी हो गई है। कंपनी के सीईओ एलन मस्क ने खुद इस बात को स्वीकार किया है कि अंधेरे में सड़क पर छोटे जानवरों की पहचान करना काफी मुश्किल साबित हो रहा है। खास तौर पर ऐसे जीव या पालतू जानवर जिनका रंग डामर की सड़क से मिलता-जुलता हो, उन्हें कैमरों के जरिए देखना और पहचानना चुनौतीपूर्ण बन गया है। मस्क ने उदाहरण देते हुए बताया कि रात के वक्त सड़क पर ग्रे रंग के बिल्ली के बच्चे को डिटेक्ट करना मुश्किल होता है, और कंपनी की प्राथमिकता है कि रोबोटैक्सी रात में ऐसे किसी भी बेजुबान जानवर को टक्कर न मारे।

⏰ ऑस्टिन में बढ़ाई गई रोबोटैक्सी सर्विस की टाइमिंग: रात 11 बजे तक चल रही है सेवा, कैमरों की विजन तकनीक पर टिकी है पूरी प्रणाली

टेस्ला ने हाल ही में ऑस्टिन शहर में अपनी रोबोटैक्सी सर्विस का समय एक घंटा बढ़ाते हुए इसे रात 11 बजे तक कर दिया है। हालांकि, यह समय जून 2025 में सेवा की शुरुआत के समय (सुबह 6 बजे से आधी रात तक) से अभी भी कम है। टेस्ला की ऑटोनॉमस ड्राइविंग तकनीक पूरी तरह से कैमरों पर निर्भर करती है, जो किसी भी वस्तु को पहचानने के लिए रोशनी और बैकग्राउंड के कॉन्ट्रास्ट (अंतर) का इस्तेमाल करते हैं। रात के समय कम रोशनी होने और सड़क के काले रंग से मेल खाने के कारण कैमरों को छोटे जानवरों को ट्रैक करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है।

🔍 लिडार और रडार से क्यों दूरी बना रही है टेस्ला? एलन मस्क का विजन सिस्टम पर अब भी है पूरा भरोसा

सुरक्षा के लिहाज से जहां दूसरी ऑटोमोबाइल कंपनियां लिडार (Lidar) और रडार सेंसर का इस्तेमाल करती हैं, वहीं टेस्ला ने हमेशा से कैमरा आधारित विजन सिस्टम पर ही भरोसा जताया है। लिडार जहाँ लेजर के जरिए 3D मैपिंग करता है, वहीं टेस्ला ने 2021 से अपनी कारों से रडार और अल्ट्रासोनिक सेंसर हटाना शुरू कर दिए थे। कंपनी का मानना है कि अलग-अलग सेंसर्स के डेटा को मिलाने से सिस्टम में जटिलता बढ़ती है। यही वजह है कि एलन मस्क कैमरों की इस कमी को दूर करने के लिए सॉफ्टवेयर और एल्गोरिदम में सुधार करने पर जोर दे रहे हैं ताकि रात की ड्राइविंग को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सके।