ADAS Technology: क्या है कारों में मिलने वाला ADAS? जानें कैसे काम करता है यह सिस्टम

ADAS तकनीक क्या है और यह कारों को सुरक्षित कैसे बनाती है? जानें लेवल-1 और लेवल-2 ADAS के फीचर्स, काम करने का तरीका और ड्राइविंग में इसके बेहतरीन फायदे।

 
ऑटोमेटेड इमरजेंसी ब्रेकिंग

पिछले 10-20 सालों में ऑटो इंडस्ट्री में टेक्नोलॉजी ने काफी तेजी से विकास किया है. आज सिर्फ कारें चलने का साधन भर नहीं रह गई हैं, बल्कि स्मार्ट और सेफ मशीन बन चुकी हैं. पहले कारों की सुरक्षा सिर्फ दमदार बनावट और एयरबैग जैसे सिस्टम पर निर्भर हुआ करती थी, लेकिन अब इस जिम्मेदारी को टेक्नोलॉजी ने संभाल लिया है. कारों के अंदर आने वाला ADAS सेफ्टी में अहम भूमिका निभाता है.

ADAS यानी एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम तकनीक ड्राइवर की मदद करके सड़क पर सुरक्षा को बढ़ाती है और दुर्घटनाओं की संभावना को कम करती है. अब भारत में भी कई कारों में लेवल-2 ADAS मिलने लगा है. इससे ड्राइविंग आसान और सुरक्षित बन रही है. खासकर हाईवे ड्राइविंग और ट्रैफिक में यह तकनीक काफी मददगार साबित हो रही है.

ADAS कैसे काम करता है?

ADAS सिस्टम मुख्य रूप से तीन तकनीकों के मेल से काम करता है. सेंसर और कैमरा इनपुट, डेटा प्रोसेसिंग और AI और ऑटोमेटिक एक्शन.

1. सेंसर और कैमरा इनपुट

कार में लगे अलग-अलग सेंसर और कैमरे सड़क के हर मूवमेंट पर नजर रखते हैं. कैमरा सड़क पर लेन मार्किंग, ट्रैफिक साइन, पैदल यात्री और अन्य गाड़ियों को पहचाने का काम करता है. रडार सड़क पर आगे-पीछे चल रही गाड़ियों की दूरी और स्पीड मापता है. LiDAR सड़क की 3D मैपिंग करके वास्तविक स्थिति समझता है. अल्ट्रासोनिक सेंसर सड़क पर पार्किंग और कम स्पीड पर आसपास की चीजों को पहचानता है.

2. डेटा प्रोसेसिंग और AI

इन सभी सेंसर से मिलने वाले डेटा को AI और मशीन लर्निंग के जरिए प्रोसेस किया जाता है. सिस्टम यह समझता है कि सड़क पर क्या हो रहा है और ड्राइवर का व्यवहार कैसा है. अगर कोई खतरा महसूस होता है, तो तुरंत निर्णय लिया जाता है.

3. ड्राइवर अलर्ट और ऑटोमेटिक एक्शन

ADAS सिस्टम तीन तरह से प्रतिक्रिया देता है. बीप साउंड, वाइब्रेशन या स्क्रीन पर चेतावनी देकर अलर्ट करता है. सेमी-ऑटोमेटिक एक्शन के जरिए हल्का ब्रेक लगाना या स्टीयरिंग को सुधार करता है. फुल-ऑटोमेटिक एक्शन में जरूरत पड़ने पर खुद ब्रेक लगाना या कार को कंट्रोल कर लेता है.

लेवल-1 ADAS क्या होता है?

लेवल-1 ADAS को बेसिक ड्राइवर असिस्टेंस माना जाता है. इसमें कार कुछ खास स्थितियों में ड्राइवर की मदद करती है, लेकिन पूरी जिम्मेदारी ड्राइवर की ही रहती है. इस लेवल में सबसे आम फीचर एडैप्टिव क्रूज कंट्रोल है. इसमें कार अपने आगे चल रही गाड़ी से दूरी बनाए रखती है और उसी हिसाब से स्पीड कम या ज्यादा करती है. लेवल-1 में ड्राइवर कुछ समय के लिए पैडल से पैर हटा सकता है, लेकिन स्टीयरिंग पर हाथ रखना जरूरी होता है. इसे हैंड्स-ऑन असिस्ट भी कहा जाता है.

लेवल-2 ADAS में क्या खास है?

लेवल-2 ADAS को पार्शियल ऑटोमेशन कहा जाता है. इसमें कार खुद स्टीयरिंग, एक्सीलेरेशन और ब्रेकिंग को कंट्रोल कर सकती है. इसमें लेन कीप असिस्ट, ऑटो पार्किंग, ऑटो ब्रेक और एक्सीलेरेशन जैसे फीचर्स मिल जाते हैं. हालांकि, इस लेवल में भी ड्राइवर का सतर्क रहना बेहद जरूरी है. जरूरत पड़ने पर ड्राइवर तुरंत कंट्रोल अपने हाथ में ले सकता है. इसे हैंड्स-ऑफ लेकिन ध्यान जरूरी तकनीक कहा जाता है.