नई कार खरीदने के बाद क्यों गिरती है उसकी कीमत? जानें रीसेल वैल्यू का सच

नई कार शोरूम से बाहर निकलते ही अपनी वैल्यू खो देती है। कार की कीमत गिरने के कारण और रीसेल वैल्यू बढ़ाने के लिए जरूरी टिप्स जानें इस लेख में।

 
सेकंड हैंड कार टिप्स

नई कार खरीदना लगभग हर व्यक्ति का सपना होता है. जब कोई अपनी पहली कार घर लाता है, तो उसकी खुशी अलग ही होती है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि जिस कार को वो लाखों रुपए देकर खरीदते हैं, उसकी कीमत शोरूम से बाहर निकलते ही कम होने लगती है. यही वजह है कि नई कार कुछ समय बाद सेकंड हैंड कार की कैटेगरी में आ जाती है.

कार की कीमत कम होने की इस प्रक्रिया को ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में डिप्रिसिएशन कहा जाता है. इसको आसान शब्दों में कहें तो समय के साथ किसी चीज की कीमत का घट जाना ही डिप्रिसिएशन है. ये लगभग हर कार के साथ होता है, चाहे वो सस्ती हो या महंगी.

आखिर कीमत क्यों कम हो जाती है?

जब तक कार शोरूम में खड़ी रहती है, उसे बिल्कुल नई माना जाता है. लेकिन जैसे ही उसकी डिलीवरी होती है और उसकी रजिस्ट्रेशन हो जाता है, वो यूज्ड कार यानी इस्तेमाल की गई कार मानी जाने लगती है. भले ही कार सिर्फ कुछ किलोमीटर ही चली हो, लेकिन उसकी मार्केट वैल्यू नई कार जैसी नहीं रहती.

इसके अलावा कार खरीदते समय जो खर्च किए जाते हैं, जैसे रजिस्ट्रेशन फीस, रोड टैक्स, इंश्योरेंस और अन्य चार्ज, वे दोबारा वापस नहीं मिलते. इसलिए जब कोई व्यक्ति अपनी कार बेचने जाता है, तो खरीदार केवल कार की कीमत देखता है, उन अतिरिक्त खर्चों को नहीं.

पहले साल में सबसे ज्यादा नुकसान

आमतौर पर नई कार पहले साल में अपनी कुल कीमत का 15 से 25 प्रतिशत तक का प्राइस खो सकती है. कुछ मॉडलों में ये गिरावट इससे भी ज्यादा हो सकती है. इसकी कारण कई लोग नई कार की बजाय कम चली हुई पुरानी कार खरीदना पसंद करते हैं. क्योंकि उन्हें कम कीमत में अच्छी कार मिल जाती है.

रीसेल वैल्यू किन बातों पर निर्भर करती है?

कार की दोबार सेल की कीमत सिर्फ उसकी उम्र से तय नहीं होती. कई दूसरी बातों भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. अगर किसी कार की बाजार में ज्यादा मांग है, तो उसकी रीसेल वैल्यू बेहतर रहती है. इसके अलावा कार का सर्विस रिकॉर्ड, माइलेज, गाड़ी की हालत, एक्सीडेंट हिस्ट्री और कुल चली हुई दूरी भी कीमत को प्रभावित करती है. जब किसी कार का नया मॉडल या फेसलिफ्ट वर्जन मार्केट में आता है, तो पुराने मॉडल की कीमत भी कम हो सकती है.

इसलिए नई कार खरीदते समय केवल फीचर्स और कीमत ही नहीं, बल्कि उसकी आने वाले समय की रीसेल वैल्यू पर भी ध्यान देना चाहिए. इससे लंबे समय में आपका आर्थिक नुकसान कम हो सकता है.