Faridabad Crime & Health Update: हादसों से बचाने वाली पुलिस चौकी खुद रामभरोसे, बारिश में टपकती छत और दरारों के बीच काम

फरीदाबाद के सबसे बड़े बीके सिविल अस्पताल की पुलिस चौकी खुद बदहाली का शिकार है। जर्जर छत, टूटे बाथरूम और दरारों के बीच पुलिसकर्मी जोखिम में ड्यूटी करने को मजबूर हैं।

 
फरीदाबाद स्वास्थ्य विभाग सीएमओ

फरीदाबाद: जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल बादशाह खान सिविल अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा और आपराधिक मामलों से जुड़ी पुलिस कार्रवाई के लिए बनाई गई पुलिस चौकी खुद बदहाली का शिकार है. जिस चौकी पर सड़क हादसों में घायल लोगों से लेकर अस्पताल में होने वाली अन्य घटनाओं की सूचना और पुलिस कार्रवाई की जिम्मेदारी है, वह महज एक जर्जर कमरे में संचालित हो रही है. हालात ऐसे हैं कि बारिश के दिनों में छत से पानी टपकने के कारण कमरे में पानी भर जाता है.

सिर्फ एक कमरे में सिमटी पुलिस चौकी: ईटीवी भारत के संवाददाता जब मौके का जायजा लेने पहुंचे तो देखा कि अस्पताल परिसर में बनी यह पुलिस चौकी पूरी तरह एक ही कमरे पर निर्भर है. पुलिसकर्मी इसी कमरे में बैठकर अस्पताल से जुड़े मामलों की कार्रवाई करते हैं. समय के साथ कमरे की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि इसकी दीवारों में जगह-जगह बड़ी दरारें दिखाई देती हैं. ऐसे में पुलिसकर्मियों को अपनी ड्यूटी निभाने के लिए जोखिम के बीच काम करना पड़ रहा है.

बारिश आते ही कमरे में भर जाता है पानी: इतना ही नहीं पुलिस चौकी की समस्या बारिश के दौरान और बढ़ जाती है. जर्जर छत से पानी टपकने के कारण कमरे के अंदर पानी भर जाता है. इससे पुलिसकर्मियों को रिकॉर्ड और जरूरी दस्तावेजों के साथ काम करने में परेशानी होती है. अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण परिसर में चौकी की यह स्थिति व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है.

बाथरूम का गेट टूटा, परिसर में उगी झाड़ियां: चौकी का सिर्फ मुख्य कमरा ही बदहाल नहीं है, बल्कि यहां बना बाथरूम भी जर्जर हालत में है. बाथरूम का गेट पूरी तरह टूट चुका है और अंदर की स्थिति भी खराब है. वहीं चौकी के सामने बनी बाउंड्री भी कई बार टूट चुकी है, जिसकी बाद में जैसे-तैसे मरम्मत कराई गई. परिसर में जंगली पौधे और झाड़ियां उग आई हैं, जिससे दूर से देखने पर यह पुलिस चौकी कम और किसी पुराने सरकारी भवन जैसी नजर आती है.

सुरक्षा संभालने वाली चौकी खुद सुरक्षा के सवालों में: बादशाह खान अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन पहुंचते हैं. सड़क हादसों, विवादों या अन्य आपात परिस्थितियों में पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण होती है. ऐसे में अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी पुलिस चौकी का खुद जर्जर हालत में होना गंभीर चिंता का विषय है. दीवारों में दरारें और बारिश के दौरान कमरे में पानी भरना किसी अप्रिय घटना की आशंका को बढ़ा रहा है.

अधिकारियों को पहले ही दी जा चुकी है जानकारी: चौकी की जर्जर हालत की जानकारी पुलिस अधिकारियों को पहले ही दी जा चुकी है. चौकी इंचार्ज की ओर से वरिष्ठ अधिकारियों को भवन की स्थिति से अवगत कराया गया था. इसके बाद एसीपी कार्यालय की ओर से जिला नागरिक अस्पताल के सीएमओ को पत्र भेजकर पुलिस चौकी की स्थिति की जानकारी दी गई और नए भवन के निर्माण की मांग की गई.

पत्र में चौकी को बताया गया कंडम: पुलिस अधिकारियों की ओर से भेजे गए पत्र में चौकी की मौजूदा स्थिति को कंडम बताते हुए नए भवन की जरूरत पर जोर दिया गया. इसके बावजूद अभी तक नए भवन के निर्माण को लेकर कोई ठोस कदम सामने नहीं आया है. अब सवाल यह है कि जर्जर भवन में काम कर रहे पुलिसकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार विभाग कब कार्रवाई करेगा.

सीएमओ बोले- "उच्च अधिकारियों को दी जानकारी": मामले को लेकर जब सीएमओ से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि, "इस संबंध में उच्च अधिकारियों को जानकारी दे दी गई है. जैसे ही वहां से जवाब प्राप्त होगा, पुलिस चौकी की बिल्डिंग को लेकर आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी."

हादसा हुआ तो जिम्मेदारी किसकी?: सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर जर्जर चौकी में किसी तरह का हादसा होता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी. पुलिसकर्मी मजबूरी में इसी भवन में बैठकर अपनी ड्यूटी कर रहे हैं. अस्पताल जैसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले परिसर में पुलिस चौकी का सुरक्षित और सुविधाजनक होना जरूरी है. अब देखना होगा कि अधिकारियों की ओर से इस चौकी के पुनर्निर्माण को लेकर कब तक ठोस फैसला लिया जाता है.