CIA Declassified Documents 9/11: अमेरिका पर हमले से सालों पहले ओसामा ने रची थी भारत में आतंकी साजिश, खुफिया दस्तावेजों से हुआ पर्दाफाश

9/11 की 25वीं बरसी पर जारी सीआईए के दस्तावेजों में खुलासा, अमेरिका से पहले भारत को निशाना बनाना चाहता था ओसामा बिन लादेन।
 
1998 CIA briefing Bill Clinton

9/11 हमलों को 25 साल पूरे हो गए हैं. 11 सितंबर 2001 को आतंकियों ने अमेरिका को ऐसा जख्म दिया जिसे याद कर वो खौफनाक मंजर आज भी सिहरन पैदा कर देता है. इस दौरान 2977 लोगों की जान गई थी. इस बीच एक रिपोर्ट सामने आने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि अल-कायदा के संस्थापक ओसामा बिन लादेन ने अमेरिका में आतंकी हमलों से कई साल पहले भारत में हमले करने की योजना बनाई थी.

अमेरिका में 9/11 हमलों से करीब तीन साल पहले ही खुफिया एजेंसी CIA ने तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को ओसामा बिन लादेन के मंसूबों को लेकर चेतावनी दी थी. जिसमें कहा गया था कि ओसामा बिन लादेन भारत, पाकिस्तान, युगांडा और संभवतः नाइजीरिया में हमले करने का इरादा रखता है.

CIA रिपोर्ट में खुलासा

28 अगस्त 1998 की CIA रिपोर्ट जिसे अब सार्वजनिक किया गया है, उसमें बताया गया है कि ओसामा बिन लादेन अफगानिस्तान में अमेरिकी मिसाइल हमलों से बच गया था. उसने कम से कम 60 देशों में व्यक्तियों और सहयोगी समूहों का एक नेटवर्क बनाए रखा था, जिसका इस्तेमाल हमले करने के लिए किया जा सकता था.

यह खुलासा CIA के राष्ट्रपति को दी गई गोपनीय ब्रीफिंग सामग्री के एक बड़े प्रकाशन का हिस्सा है, जो 11 सितंबर, 2001 के हमलों की 25वीं बरसी के अवसर पर जारी की गई है. CIA ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतियों बिल क्लिंटन और जॉर्ज डब्ल्यू बुश के लिए तैयार की गई दर्जनों खुफिया रिपोर्टों से संबंधित 100 से अधिक पेज की सामग्री जारी की है.

लादेन के निशाने पर भारत सहित कई देश

28 अगस्त, 1998 को जारी राष्ट्रपति के दैनिक समाचार पत्र, जिसका शीर्षक था ‘बिन लादेन का आतंकवादी नेटवर्क अब भी एक खतरा है’, में भारत सहित उन कई देशों का जिक्र किया गया था जहां ओसामा बिन लादेन हमले करने की योजना बना रहा था. समाचार पत्र में कहा गया था, ‘बिन लादेन मिस्र, अरब प्रायद्वीप, विशेष रूप से कुवैत, सऊदी अरब और यमन, भारत, पाकिस्तान, युगांडा और संभवतः नाइजीरिया में हमले करने की योजना बना रहा है’. रिपोर्ट से पता चलता है कि उस समय तक अमेरिका बिन लादेन के नेटवर्क को एक वैश्विक आतंकी खतरे के तौर पर देख रहा था.

तय तारीख या खास लक्ष्य का जिक्र नहीं

इस दस्तावेज में भारत में किसी विशिष्ट लक्ष्य, निर्धारित तारीख के विवरण का उल्लेख नहीं है. खुफिया जानकारी के स्रोत को भी गुप्त रखा गया है. CIA के आकलन के मुताबिक, अफगानिस्तान में अमेरिकी मिसाइल हमलों से बच निकलने के बाद भी बिन लादेन के पास अलग-अलग देशों में सक्रिय लोगों और सहयोगी संगठनों का मजबूत नेटवर्क मौजूद था. यह नेटवर्क कम से कम 60 देशों तक फैला हुआ था और इसका इस्तेमाल आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए किया जा सकता था. रिपोर्ट में कहा गया है कि ओसामा बिन लादेन अमेरिका और ब्रिटेन के खिलाफ और हमले करने के विकल्पों पर विचार कर रहा था, हालांकि उस समय उसने किसी खास ठिकाने या हमले के बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी.

यह संक्षिप्त रिपोर्ट अगस्त 1998 में केन्या और तंजानिया में दो अमेरिकी दूतावासों पर हुए बम धमाकों के कुछ हफ्तों बाद आई, जिसमें 200 से अधिक लोग मारे गए थे. इसके बाद बिन लादेन का संगठन अमेरिकी आतंकवाद विरोधी एजेंसियों की नजरों में आ गया था. CIA के दस्तावेजों के सामने आने के तीन साल बाद, 11 सितंबर 2001 को, अल-कायदा ने अमेरिका में हमला किया था. CIA ने बताया था कि बिन लादेन ने अपने एक सहयोगी को अमेरिका में हमले की संभावनाएं तलाशने को कहा था. अमेरिकी अधिकारियों ने तिराना और संभवतः बाकू में हमलों की तैयारी कर रहे उसके कुछ गुर्गों की गिरफ्तारी में भी मदद की थी.

भारत को लेकर बिन लादेन की सोच

दस्तावेज में यह भी बताया गया कि बिन लादेन भारत को इस्लामी दुनिया के खिलाफ एक धर्मयुद्ध-ज़ायोनी-हिंदू षड्यंत्र का हिस्सा मानता था. इससे पता चलता है कि वह भारत को अमेरिका और इजराइल से जुड़े अपने वैचारिक नजरिए के तहत देखता था.

9/11 से पहले मिल रही थीं लगातार चेतावनियां

नए जारी दस्तावेज से साफ होता है कि 9/11 हमलों से पहले ही अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को बिन लादेन के वैश्विक नेटवर्क और उसकी हमले की योजनाओं को लेकर लगातार चेतावनियां मिल रही थीं. बाद के सालों में उसकी ओर से हथियार हासिल करने, अमेरिकी धरती पर हमले और विमान अपहरण जैसी संभावनाओं को लेकर भी खुफिया आकलन सामने आए.

भारत के लिहाज से 1998 की यह रिपोर्ट इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पता चलता है कि 11 सितंबर 2001 के हमलों से कई साल पहले ही भारत बिन लादेन के उभरते आतंकी नेटवर्क को लेकर अमेरिकी खुफिया आकलन में संभावित निशाने के तौर पर शामिल हो चुका था.

अमेरिका में चार यात्री विमानों का अपहरण

11 सितंबर 2001 को अल-कायदा के 19 आतंकवादियों ने अमेरिका में चार यात्री विमानों का अपहरण कर लिया था. न्यूयॉर्क में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की ट्विन टावर्स में दो विमान टकरा गए, जिससे दोनों इमारतें ढह गईं. तीसरा विमान वर्जीनिया के आर्लिंगटन में पेंटागन से टकराया. वहीं चौथा विमान यूनाइटेड एयरलाइंस की फ्लाइट 93, पेंसिल्वेनिया के एक खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जब यात्रियों ने अपहरणकर्ताओं से मुकाबला किया. माना जाता है कि यह विमान वाशिंगटन में किसी महत्वपूर्ण लक्ष्य, संभवतः व्हाइट हाउस या अमेरिकी कैपिटल की ओर जा रहा था.

इन हमलों में 19 अपहरणकर्ताओं सहित करीब 3,000 लोग मारे गए थे. 9/11 के हमलों के कारण अमेरिका ने अफगानिस्तान पर आक्रमण किया, जहां तालिबान ने ओसामा बिन लादेन और अल-कायदा के अन्य नेताओं को सक्रिय रहने की अनुमति दी थी.

ओसामा बिन लादेन आखिरकार 2 मई, 2011 को पाकिस्तान के एबटाबाद में, इस्लामाबाद से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित एक परिसर पर अमेरिकी हमले में मारा गया था. उसकी मौत के साथ ही 9/11 के मास्टरमाइंड की लगभग एक दशक लंबी खोज का अंत हो गया.