India UN Geneva News: जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र परिसर को भारत की खूबसूरत सौगात, 4 नीले और 1 सफेद मोर भेंट

भारत ने 45 साल बाद स्विट्जरलैंड के जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र (UNOG) को 5 मोर भेंट किए हैं। जानें जिनेवा यूएन परिसर में भारतीय मोरों का ऐतिहासिक महत्व।

 
भारत संयुक्त राष्ट्र संबंध

भारत ने 45 साल बाद एक बार फिर स्विट्जरलैंड के जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय को मोर भेंट किए हैं. इस बार भारत ने पांच मोर दिए हैं. इनमें चार नीले और एक सफेद मोर हैं. सभी मोर नर हैं. भारत का मोर राष्ट्रीय पक्षी है और देश में इसका खास महत्व है. शुक्रवार को एक विशेष कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत अरिंदम बागची ने इन पांचों मोरों को संयुक्त राष्ट्र जिनेवा (UNOG) की महानिदेशक तातियाना वालोवाया को सौंपा.

भारत के मिशन ने कहा कि यह उपहार भारत और संयुक्त राष्ट्र के लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को दिखाता है. यह बहुपक्षीय व्यवस्था और देशों के बीच सहयोग के लिए भारत की प्रतिबद्धता को भी बताता है.

1951 में भी चर्चा में था मोर

जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के परिसर में मोरों का इतिहास काफी पुराना है. 1951 में एक स्विस अखबार ने वहां मौजूद आखिरी मोर को लेकर खबर प्रकाशित की थी. उस मोर का नाम पियरे था. अखबार ने सवाल उठाया था कि क्या इस अकेले मोर को कोई साथी या उसकी जगह दूसरा मोर मिलेगा.

इसके बाद भी संयुक्त राष्ट्र परिसर में समय-समय पर मोर दिखाई देते रहे. 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिल्ली चिड़ियाघर से भारतीय मोरों की एक प्रजनन जोड़ी संयुक्त राष्ट्र कार्यालय को उपहार में भेजी थी. अब इस घटना के 45 साल बाद भारत ने फिर पांच मोर भेजे हैं.

संयुक्त राष्ट्र परिसर में मोरों का पुराना रिश्ता

आज जिस जगह संयुक्त राष्ट्र जिनेवा कार्यालय है, वह पहले स्विट्जरलैंड के कला संग्राहक गुस्ताव रेविलियोड की निजी संपत्ति थी. यहां 100 साल से ज्यादा समय से मोर मौजूद रहे हैं. 1954 में एक मोर सोवियत प्रतिनिधिमंडल की कार पर चढ़ गया था. इस घटना ने वहां मौजूद फोटोग्राफरों का ध्यान खींचा था और इसकी तस्वीरें काफी चर्चित हुई थीं.

शुक्रवार के कार्यक्रम से पहले परिसर में केवल एक मोर बचा था. वह भी बहुत कम दिखाई देता था. तातियाना वालोवाया ने कहा कि नए पांच मोरों के लिए एक अस्थायी घर बनाया गया है. वे अगले तीन महीने वहीं रहेंगे. इसके बाद उन्हें एरियाना पार्क में खुले तौर पर घूमने और वहां के माहौल का आनंद लेने दिया जाएगा.

UNOG के मुताबिक, समारोह के दौरान पांचों मोर शांत रहे और कार्यक्रम में आकर्षण का केंद्र बने रहे. इनकी देखभाल डॉ. टोबियास ब्लाहा करेंगे. वह प्रशिक्षित पशु चिकित्सक हैं और स्विट्जरलैंड के जिनेवा बायोपार्क के निदेशक हैं. भारत ने कहा कि भारतीय मोर सुंदरता, गरिमा और मजबूती का प्रतीक है. यह उपहार जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी दिखाता है. UNOG जल्द ही इन पांचों मोरों के नाम रखने के लिए एक प्रतियोगिता आयोजित करेगा.