भारत की नई तेल रणनीति: रूस को छोड़ अंगोला बना टॉप सप्लायर, खरीदे 20 लाख बैरल
रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी देशों के दबाव के बीच भारत ने बदली रणनीति। अफ्रीका का देश अंगोला बना भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर। इंडियन ऑयल ने खरीदी भारी खेप।
दुनियाभर में बढ़ते तनाव, ईरान, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी देशों के दबाव के बीच भारत ने अपनी तेल खरीद की रणनीति बदली है. अब अफ्रीका का देश अंगोला भारत के लिए एक अहम सप्लायर बनकर उभरा है. भारत रूस पर निर्भरता कम करते हुए अंगोला से ज्यादा तेल खरीद रहा है. हाल ही में भारत ने अंगोला से करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा है. यह खरीद इंडियन ऑयल कार्पोरेशन ने की, जिसमें हंगो और क्लोव ग्रेड के 10-10 लाख बैरल शामिल हैं.
ये डील ExxonMobil के जरिए हुई. ये दोनों तरह का तेल एशियाई रिफाइनरियों के लिए बेहतर माना जाता है, क्योंकि इससे ज्यादा मात्रा में पेट्रोल-डीजल बनता है. अंगोला, नाइजीरिया के बाद अफ्रीका का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है. यहां रोजाना करीब 11 लाख बैरल तेल निकलता है. इस देश के पास लगभग 7.78 अरब बैरल का तेल भंडार है. इसलिए यह भारत जैसे देशों के लिए महत्वपूर्ण बनता जा रहा है.
भारत ने बदली अपनी रणनीति
भारत अब सिर्फ एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहता. इसी वजह से उसने दूसरे देशों से भी तेल खरीद बढ़ाई है. Shell से अबू धाबी का मर्बन ऑयल, मर्करिया ग्रुप से अपर जाकुम और पेट्रोब्रास से ब्राजील का Buzios तेल खरीदा गया है. इससे भारत अपनी सप्लाई को सुरक्षित और संतुलित बना रहा है.
2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन गया था, क्योंकि वह सस्ता तेल दे रहा था. लेकिन बाद में रूस पर कड़े प्रतिबंध लगने लगे. इसके कारण भारत को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी. दिसंबर में रूस से तेल आयात दो साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि ओपेक देशों से आयात बढ़ गया. अब अफ्रीका के देश इस बदलाव में अहम भूमिका निभा रहे हैं. अमेरिका रूस के तेल को रोकने के लिए टैरिफ लगा रहा है, जबकि यूरोप नए व्यापार और रक्षा समझौते कर रहा है. ऐसे में अंगोला जैसे देशों को फायदा मिल रहा है.
अफ्रीकी देशों से आयात बढ़ा
सरकार ने गैस के वैकल्पिक स्रोत तलाशने, ओमान, नाइजीरिया और अंगोला से खरीद बढ़ाने का फैसला किया है. आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी 2026 में कुल LNG आयात 19.3 लाख टन था, जो मार्च 2026 में घटकर 16.7 लाख टन रह गया, यानी करीब 13% की कमी आई. कतर से आयात में बड़ी गिरावट दर्ज हुई, जबकि अमेरिका, ओमान, नाइजीरिया और अंगोला से आयात बढ़ा (1,41,449 टन से बढ़कर 2,08,059) है. UAE से आयात में कमी आई, जिससे सप्लाई में बदलाव साफ दिखता है.
अंगोला तेल का तीसरा सबसे बड़ा सप्लायर
मार्च 2026 में अंगोला कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा सप्लायर बनकर उभरा, जिसकी सप्लाई में रूस के बाद सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई. आंकड़ों के अनुसार, रूस से आयात 1,042 से बढ़कर 1,975 हजार बैरल हो गया, जबकि इराक से आयात घटकर 969 से 235 रह गया. सऊदी अरब से भी गिरावट आई और यह 1,036 से 572 हो गया. यूएई, अमेरिका और नाइजीरिया से आयात में भी कमी देखी गई, जबकि अंगोला से आयात 103 से बढ़कर 327 हजार बैरल पहुंच गया. कुल आयात फरवरी के 5,202 से घटकर मार्च में 4,439 हजार बैरल रह गया, यानी करीब 15% की गिरावट दर्ज हुई.
भारत-अंगोला के संबंध 41 साल पुराने
भारत और अंगोला के संबंध काफी पुराने हैं. दोनों देशों के रिश्ते 1761 से जुड़े हैं, जब दोनों पुर्तगाल के अधीन थे. भारत ने अंगोला की आजादी का समर्थन किया और 1985 में दोनों के बीच औपचारिक संबंध बने. 2002 में अंगोला में गृह युद्ध खत्म होने के बाद व्यापार तेजी से बढ़ा.
आज भारत अंगोला का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और कुल व्यापार में करीब 10% हिस्सा रखता है. 2021-22 में दोनों देशों के बीच व्यापार 3.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया. भारत का निर्यात भी बढ़ा है. 2021-22 में यह 452 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो पहले के मुकाबले 74% ज्यादा है.

