ईरान-पाकिस्तान व्यापार समझौता: अमेरिकी नाकेबंदी का तोड़, ग्वादर बना नया हब

अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी के बीच ईरान अब पाकिस्तान के रास्तों से करेगा व्यापार। कराची और ग्वादर पोर्ट बनेंगे नए गेटवे, परिवहन लागत में होगी 55% तक की कमी।

 
CPEC और ईरान व्यापार

होर्मुज के बाहर अमेरिकी नेवी ने ब्लॉकेड लगा दिया है, साथ ही युद्ध के बाद ईरान के UAE के साथ रिश्ते बेहद खराब हो गए हैं. युद्ध से पहले अपने व्यापार के लिए ईरान UAE की पोर्ट्स का भी इस्तेमाल करता था. अमेरिकी ब्लॉकेड और UAE से खराब रिश्तों ने ईरान के व्यापार को गहरी चोट दी है, लेकिन ईरान ने इनका हल निकालते हुए पाकिस्तान के साथ अपना पुराना समझौता एक्टिव कर दिया है. ईरान और पाकिस्तान के इस समझौते से पाकिस्तान को भी बड़ा फायदा हो रहा है.

तसनीम न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर अपने इलाके और बंदरगाहों के जरिए ईरान में सामान के ट्रांजिट को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही कराची, पोर्ट कासिम और ग्वादर ईरान के व्यापार के लिए अहम लॉजिस्टिक गेटवे बन गए हैं, जबकि दूसरी ओर वाशिंगटन की समुद्री नाकेबंदी ईरान की वैश्विक व्यापार तक पहुंच को रोकने की कोशिश कर रही है. यह कदम एक अहम बदलाव का संकेत है, क्योंकि ईरान लंबे समय से क्षेत्रीय व्यापार तक पहुंच के लिए UAE के बंदरगाहों, खास तौर पर जेबेल अली पर निर्भर रहा था.

ईरान पाकिस्तान के रास्ते बेच रहा अपना माल

इस्लामाबाद के कॉमर्स मंत्रालय ने 25 अप्रैल को पाकिस्तान के इलाके से सामान के ट्रांजिट का आदेश 2026 जारी किया, जिसे तुरंत लागू कर दिया गया है. यह आदेश 2008 में तेहरान के साथ हुए एक द्विपक्षीय सड़क परिवहन समझौते को सक्रिय करता है, जिसका इस्तेमाल पहले कभी नहीं किया गया था. इस आदेश के तहत छह जमीनी रास्ते खोले गए हैं, जो पाकिस्तान के तीन मुख्य बंदरगाहों को बलूचिस्तान के रास्ते ईरान की दो सीमा चौकियों, गब्द और ताफ्तान से जोड़ते हैं.

यह ऐलान उसी समय हुआ है, जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ बातचीत के लिए इस्लामाबाद के दौरे पर थे.

पाकिस्तान का हो गया धंधा सेट

पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक ग्वादर-गब्द कॉरिडोर, जो इन तय रास्तों में सबसे छोटा है. ईरान की सीमा तक पहुंचने में लगने वाले समय को घटाकर दो से तीन घंटे कर देता है. साथ ही, कराची के रास्ते माल भेजने की तुलना में इस रास्ते से परिवहन लागत में 45 से 55 फीसद तक की कमी आने का अनुमान है. साथ ही जब ईरान का माल यहां से जा रहा है तो पाकिस्तान को भी खूब फायदा हो रहा है.

पाकिस्तान के बंदरगाह अब एक बड़ा व्यापार आवाजाही हब बन रहे हैं. कराची और पोर्ट कासिम मिलकर हर साल लगभग 42 मिलियन टन कार्गो संभालते हैं, और इनमें काफी ज़्यादा अतिरिक्त कार्गो संभालने की गुंजाइश भी है. इंडस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक जब से युद्ध शुरू हुआ है, पाकिस्तान की ओर मोड़े गए कार्गो का लगभग 75 फीसद हिस्सा अकेले कराची ने ही संभाला है.

ग्वादर बंदरगाह जिसे ‘चाइना ओवरसीज़ पोर्ट होल्डिंग कंपनी’ द्वारा ‘चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे’ (CPEC) के मुख्य केंद्र के तौर पर संचालित किया जाता है, ईरान के चाबहार बंदरगाह से लगभग 170 किलोमीटर पूर्व में स्थित है. इस तरह इन तीनों बंदरगाहों में से यह भौगोलिक रूप से ईरानी क्षेत्र के सबसे करीब है.