मिडल ईस्ट संकट: ईरान की चेतावनी, बहरीन और UAE के तटों पर करेंगे कब्जा

अमेरिका के ग्राउंड ऑपरेशन की तैयारी के बीच ईरान की बड़ी चेतावनी! सुरक्षा विश्लेषक मोर्तेज़ा सिमिआरी ने बहरीन और UAE के तटों पर कब्जे का किया दावा। जानें ताजा हालात।

 
खाड़ी देशों की सुरक्षा और ईरान

अमेरिका ईरान पर ग्राउंड ऑपरेशन लांच करने की सोच रहा है, जिसके लिए अमेरिका ने अपने मरीन्स मिडिल ईस्ट की तरफ भेजने शुरू कर दिए हैं. अमेरिका की इस योजना के बाद ईरान ने भी इससे निपटने की तैयारी शुरू कर दी है. ईरान के एक सुरक्षा विश्लेषक ने ईरान के नेशनल टीवी को दिए इंटरव्यू में चेतावनी दी है कि तेहरान बहरीन और UAE के तटों पर कब्जा करने के लिए तैयार है.

ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB से बात करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक मोर्तेज़ा सिमिआरी ने कहा कि अगर इस क्षेत्र में अमेरिका कोई भी गलती करता है, तो ईरान की सेना कार्रवाई करने के लिए तैयार है. उन्होंने आगे कहा कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं अमीराती और बहरीनी तटों पर कब्जा करने और क्षेत्रीय परिदृश्य को पूरी तरह बदलने के लिए तैयार हैं. सिमिआरी ने चेतावनी देते हुए कहा, “UAE और बहरीन के तटों में एंट्री करना हमारे एजेंडे में शामिल है.”

UAE के विदेश मंत्री की टिप्पणी के बाद ईरान की चेतावनी

यह चेतावनी UAE के विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन ज़ायेद की उन टिप्पणियों के कुछ दिनों बाद आई है, जिनमें उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में देश पर ईरानी हमलों की निंदा करते हुए कहा था कि देश आतंकवादियों से कभी ब्लैकमेल नहीं होगा. बिन जायेद की यह टिप्पणी अमेरिका में फ्रांस के पूर्व राजदूत जेरार्ड अराउड के जवाब में आई, जिन्होंने UAE के राष्ट्रपति सलाहकार अनवर गर्गाश की उन टिप्पणियों पर सवाल उठाया था, जिनमें उन्होंने अमेरिका के साथ अपने देश के बढ़ते सहयोग की बात कही थी.

गर्गाश ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा था कि अरब खाड़ी देशों के खिलाफ ईरान की खुली आक्रामकता के गहरे भू-राजनीतिक परिणाम हैं, जिससे ईरानी खतरा खाड़ी देशों की रणनीतिक सोच का मुख्य केंद्र बन गया है और यह खाड़ी सुरक्षा की विशिष्टता और अरब सुरक्षा की पारंपरिक अवधारणाओं से उसकी स्वतंत्रता पर ज़ोर देता है. उन्होंने आगे कहा कि इसकी वजह से देश वॉशिंगटन के साथ अपनी सुरक्षा साझेदारियों को मज़बूत कर रहा है.

ईरान के मध्य पूर्व में हमले

ईरान ने 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हमलों का जवाब देते हुए, पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और तेल व गैस के बुनियादी ढांचों को निशाना बनाकर जवाबी हमले किए हैं. युद्ध शुरू होने के बाद से अकेले UAE ने ही 338 बैलिस्टिक मिसाइलों और 1740 ड्रोनों को बीच में ही रोककर नाकाम कर दिया है.

MEE की रिपोर्ट के मुताबिक जहां शुरुआत में सऊदी अरब और UAE ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान पर हमला न करने की पैरवी की थी. वहीं अब वे युद्ध का समर्थन करने की ओर झुक रहे हैं. इसी क्रम में रियाद ने पश्चिमी सऊदी अरब के ताइफ़ में स्थित ‘किंग फहद एयर बेस’ को अमेरिकियों के लिए खोलने की दिशा में कदम बढ़ाया है.