Netanyahu Gadi Eisenkot Coalition: इजराइल में सरकार गठन का पेंच फंसा: 120 सीटों वाली संसद में बहुमत का गणित और अरब पार्टियों की भूमिका

इजराइल चुनाव में वोट चोरी और कतर के फंडिंग के आरोपों पर चुनाव आयोग ने कहा कि नतीजे नहीं बदलेंगे। जानिए इजराइल की राजनीति और सरकार गठन के नए समीकरण।
 
Israel Election Commission Noam Solberg

इजराइल में हुए चुनाव के नतीजों को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी 'लिकुड' ने आरोप लगाया था कि अरब पार्टियों ने चुनाव में वोट चुराए हैं और मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए कतर से पैसे लिए गए हैं। हालांकि, नेतन्याहू की पार्टी इन गंभीर आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी है। वहीं, कतर ने भी इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे केवल झूठी जानकारी और भ्रम फैलाने की कोशिश बताया है।

इस बीच, रविवार को इजराइल के चुनाव आयोग ने चुनाव के नतीजों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए एक बयान जारी किया। चुनाव आयोग के प्रमुख नोआम सोलबर्ग ने वीडियो संदेश में स्पष्ट किया कि यदि चुनाव में विदेशी दखल या गड़बड़ी के आरोप सही भी साबित हो जाते हैं, तब भी आधिकारिक चुनाव के नतीजे नहीं बदलेंगे और इससे पूरी चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर कोई आंच नहीं आएगी। इस दौरान उनके साथ इजराइल की इंटरनल सिक्योरिटी एजेंसी 'शिन बेट' के प्रमुख और अटॉर्नी जनरल भी मौजूद रहे।

⚖️ वोट खरीदने के आरोपी राजनीतिक कार्यकर्ता रिहा, राअम पार्टी ने की निंदा

चुनाव प्रक्रिया के दौरान हुई गिरफ्तारियों को लेकर भी हलचल तेज है:

  • गिरफ्तारी और रिहाई: इजराइल पुलिस ने रविवार को तीन में से दो राजनीतिक कार्यकर्ताओं को रिहा कर दिया। इन्हें मंगलवार को मतदान शुरू होने से ठीक पहले कैश से भरे लिफाफों के साथ गिरफ्तार किया गया था, जिन पर पैसे देकर वोट खरीदने का गंभीर आरोप था।

  • शर्तों पर रिहाई: रिहा किए गए दो लोगों में से एक को कड़ी शर्तों पर छोड़ा गया है, जबकि दूसरे को घर में ही नजरबंद रहने का आदेश दिया गया है।

  • राअम पार्टी की प्रतिक्रिया: पुलिस के मुताबिक इन लोगों का संबंध अरब नेतृत्व वाली पार्टी 'राअम' (Raam) से है, जिसने इस चुनाव में 8 सीटों पर जीत दर्ज की है। पार्टी प्रमुख मंसूर अब्बास ने इन गिरफ्तारियों की कड़ी निंदा करते हुए इसे अलोकतांत्रिक और चुनाव नतीजों को प्रभावित करने की साजिश करार दिया है।

🏛️ नेतन्याहू पर चुनाव नतीजों को बदनाम करने का आरोप, संसद में बहुमत का कड़ा संघर्ष

विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है:

  • विपक्ष का आरोप: विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट ने रविवार को प्रधानमंत्री नेतन्याहू पर चुनाव नतीजों को सुनियोजित तरीके से बदनाम करने का संगठित अभियान चलाने का गंभीर आरोप लगाया है।

  • संसद का गणित: इजराइल की 120 सीटों वाली संसद (कनेट) में सरकार बनाने के लिए 61 सीटों की आवश्यकता होती है। हालिया चुनाव में नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं, जबकि गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें हासिल हुई हैं।

  • अरब पार्टियों की भूमिका: इस चुनाव में तीन अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने मिलकर रिकॉर्ड 19 सीटें जीती हैं। यदि ये अरब पार्टियां विपक्षी नेता आइजेनकोट का समर्थन कर देती हैं, तो उनके गठबंधन का आंकड़ा 67 सीटों तक पहुंच सकता है। हालांकि, इजराइल की राजनीति में अरब पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाने के विचार को कई दल स्वीकार नहीं करते हैं।

📅 4 नवंबर को होगी आधिकारिक घोषणा, राष्ट्रपति तय करेंगे नई सरकार का भविष्य

चुनाव आयोग की ओर से आगामी 4 नवंबर को चुनाव परिणामों को आधिकारिक रूप से प्रमाणित किया जाना है। इसके बाद देश के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग किसी एक प्रमुख राजनीतिक उम्मीदवार को नई सरकार के गठन के लिए आमंत्रित करेंगे। नियमों के तहत नई सरकार के गठन के लिए 11 नवंबर तक का समय निर्धारित किया गया है, जिसके चलते इजराइल के राजनीतिक गलियारों में बैठकों और जोड़-तोड़ का दौर तेज हो गया है।