Middle East Crisis: ईरान के लावान आइलैंड पर कब्जा करेगा यूएई? ट्रंप टीम के दबाव से मचा हड़कंप
ईरान-यूएई तनाव: ट्रंप टीम चाहती है कि यूएई ईरान के लावान आइलैंड पर कब्जा करे। जानें क्यों बढ़ा तनाव, इजराइल का रोल और ओपेक (OPEC) छोड़ने के पीछे की पूरी इनसाइड स्टोरी।
यूएई पर ईरान के खिलाफ बड़ा कदम उठाने का दबाव बढ़ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी कुछ अधिकारी चाहते हैं कि यूएई ईरान के रणनीतिक लावान आइलैंड पर कब्जा कर ले. बताया गया है कि ट्रंप की टीम के कुछ लोग चाहते हैं कि अमेरिका की बजाय यूएई सीधे मैदान में उतरे.
एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि यूएई को ईरान के खिलाफ आगे बढ़कर कार्रवाई करनी चाहिए. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अप्रैल की शुरुआत में यूएई ने गुप्त सैन्य कार्रवाई के दौरान लावान आइलैंड को निशाना भी बनाया था. यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब बीते 11 हफ्तों से ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. इस संघर्ष ने पूरे मिडिल ईस्ट के राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं.
ईरान ने यूएई पर सबसे ज्यादा हमले किए
रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले शुरू होने के बाद यूएई पर सबसे ज्यादा असर पड़ा. ईरान ने यूएई पर 2,800 से ज्यादा ड्रोन और मिसाइल दागे. विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े हमले ने यूएई को अपनी सुरक्षा और विदेश नीति पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर दिया.
शुरुआत में यूएई ने सऊदी अरब और कतर से कहा था कि वे मिलकर ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करें, लेकिन दोनों देशों ने खुलकर साथ नहीं दिया. इसके बाद यूएई ने अमेरिका और इजराइल के साथ अपने रिश्ते और मजबूत कर लिए. दूसरी तरफ सऊदी अरब और दूसरे खाड़ी देशों के साथ यूएई के संबंधों में तनाव बढ़ गया. इसी बीच यूएई ने मई में OPEC छोड़ने का फैसला भी किया. माना जा रहा है कि इसके पीछे क्षेत्रीय मतभेद भी बड़ी वजह हैं.
पूर्व अमेरिकी राजदूत बारबरा लीफ ने कहा कि ईरानी हमलों के बाद यूएई अब दुनिया को दो हिस्सों में देख रहा है. पहला दोस्त और दूसरा दुश्मन. यूएई और इजराइल के रिश्ते 2020 के अब्राहम समझौते के बाद से लगातार मजबूत हुए हैं. युद्ध के दौरान इजराइल ने यूएई को आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम भेजे, ताकि ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोका जा सके.
नेतन्याहू मार्च में यूएई गए थे
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया कि उन्होंने मार्च में गुप्त रूप से यूएई का दौरा किया था. हालांकि यूएई ने इस दावे को खारिज कर दिया. ईरान ने यूएई और इजराइल की बढ़ती नजदीकी पर नाराजगी जताई है. ईरान ने यूएई को हमले में शामिल देश बताया. जवाब में यूएई ने कहा कि वह अपने खिलाफ किसी भी खतरे का जवाब देने का पूरा अधिकार रखता है.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस युद्ध ने अमेरिका, इजराइल और यूएई के बीच नया गठबंधन मजबूत कर दिया है. हालांकि इससे अरब देशों में यूएई की छवि पर असर पड़ सकता है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यूएई पाकिस्तान से भी नाराज है. यूएई को लगता है कि पाकिस्तान ने ईरान के मामले में बहुत नरम रुख अपनाया. हालांकि सऊदी अरब ने मार्च में ईरान पर कुछ हवाई हमले किए थे, लेकिन वह अभी तक यूएई, अमेरिका और इजराइल के इस नए गठबंधन में पूरी तरह शामिल नहीं हुआ है.

