US Visa & Green Card News: USCIS ने बंद की कागजी प्रक्रिया! जानें किसे मिलेगी छूट और क्या जल्दी मिलेगा ग्रीन कार्ड

अमेरिका अब ग्रीन कार्ड, वर्क परमिट व सिटिजनशिप के लिए ऑनलाइन आवेदन अनिवार्य कर रहा है। जानें पूरी जानकारी।
 
वर्क परमिट और सिटिजनशिप ऑनलाइन फॉ

अमेरिका अपने इमिग्रेशन सिस्टम को कागजी प्रक्रिया से डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है. US सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) अब ग्रीन कार्ड, सिटिजनशिप, शरण, वर्क परमिट और फैमिली पिटीशन जैसे कई इमिग्रेशन आवेदन ऑनलाइन करने की व्यवस्था धीरे-धीरे अनिवार्य करेगा. हालांकि, 12 अगस्त 2026 से हर आवेदन तुरंत ऑनलाइन नहीं होगा. किसी खास फॉर्म पर ऑनलाइन फाइलिंग अनिवार्य करने से पहले USCIS को 60 दिन का नोटिस देना होगा. नया नियम उन फॉर्म पर लागू किया जा सकता है, जो कम से कम 180 दिनों से ऑनलाइन फाइलिंग के लिए उपलब्ध हैं.

किन आवेदनों पर पड़ेगा असर?

इस बदलाव के दायरे में ग्रीन कार्ड आवेदन और रिन्यूअल, फैमिली पिटिशन, सिटिजनशिप यानी नेचुरलाइजेशन, शरण, वर्क परमिट और टेंपररी प्रोटेक्टेड स्टेट (TPS) जैसे आवेदन आ सकते हैं. नियम लागू होने के बाद ज्यादातर आवेदकों को USCIS ऑनलाइन अकाउंट के जरिए आवेदन करना होगा. जहां सुविधा उपलब्ध होगी, वहां भरा हुआ PDF और जरूरी दस्तावेज भी अपलोड किए जा सकेंगे. लेकिन हर फॉर्म पर यह नियम अलग-अलग समय पर लागू होगा और 60 दिन का नोटिस मिलेगा.

अमेरिका कागज से ऑनलाइन क्यों जा रहा?

USCIS का कहना है कि कागजी आवेदन में मैनुअल डेटा एंट्री, स्कैनिंग, स्टोरेज, शिपिंग और फाइल संभालने में काफी समय और पैसा लगता है. ऑनलाइन फाइलिंग से गलतियां कम करने, प्रोसेसिंग तेज करने और फर्जीवाड़े की पहचान आसान होने की उम्मीद है. 2025 के वित्त वर्ष में USCIS ने 1.4 करोड़ से ज्यादा आवेदन प्रोसेस की थीं. उसके पेपर लॉकबॉक्स सिस्टम ने करीब 45.3 करोड़ पन्नों की सबमिशन संभालीं. इस व्यवस्था पर करीब 39.6 करोड़ डॉलर खर्च हुए, जबकि डाक पर ही 1 करोड़ डॉलर से ज्यादा खर्च हुआ.

ऑनलाइन फाइल नहीं कर पाने वालों का क्या होगा?

जिन लोगों के लिए ऑनलाइन आवेदन करना संभव नहीं है, वे छूट मांग सकेंगे. अगर किसी व्यक्ति को ई-फाइलिंग से परेशानी होती है, तो USCIS उसके मामले को अलग से देखेगा. इसके लिए अलग प्रक्रिया और शुल्क रखा गया है. कुछ मामलों में फीस में छूट की सुविधा भी होगी.

भारतीयों के लिए क्यों अहम?

भारतीय नागरिक अमेरिका में रोजगार के आधार पर मिलने वाले ग्रीन कार्ड की लंबी कतार में सबसे ज्यादा प्रभावित लोगों में हैं. बड़ी संख्या में भारतीय H-1B वीजा पर काम कर रहे हैं और ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं. परिवार के जरिए ग्रीन कार्ड और नागरिकता के लिए भी कई भारतीय आवेदन करते हैं.

लेकिन ऑनलाइन आवेदन से ग्रीन कार्ड की कतार खत्म नहीं होगी. अगस्त 2026 के वीजा बुलेटिन में भारत के लिए EB-2 की अंतिम मंजूरी की तारीख उपलब्ध नहीं थी, जबकि EB-3 के लिए 1 जनवरी 2014 की तारीख थी. वहीं, दोनों श्रेणियों में आवेदन जमा करने की तारीख 15 जनवरी 2015 थी. यानी आवेदन जमा करने और ग्रीन कार्ड मिलने की तारीख अलग-अलग होती है.

किसे फायदा, किसे परेशानी?

जो भारतीय पहले से ऑनलाइन पोर्टल, डिजिटल दस्तावेज और इमिग्रेशन वकीलों का इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए बदलाव आसान हो सकता है. लेकिन बुजुर्ग माता-पिता, कम डिजिटल जानकारी वाले लोग और कमजोर इंटरनेट वाले इलाकों के आवेदकों को परेशानी हो सकती है. उन्हें अकाउंट बनाने, दस्तावेज स्कैन करने और PDF अपलोड करने में मदद की जरूरत पड़ सकती है.

क्या ग्रीन कार्ड जल्दी मिलेगा?

सिर्फ ऑनलाइन फाइलिंग से ग्रीन कार्ड जल्दी नहीं मिलेगा. डिजिटल व्यवस्था आवेदन लेने और कुछ प्रोसेसिंग चरणों को तेज कर सकती है, लेकिन ग्रीन कार्ड की मंजूरी प्रॉयोरिटी डेट, वीजा नंबर और संबंधित कैटेगरी में उपलब्धता पर निर्भर करती है. भारत के EB-2 में FY2026 की उपलब्ध संख्या मई 2026 तक इस्तेमाल हो चुकी थी. नया वित्त वर्ष 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा.

भारतीय आवेदक अभी क्या करें?

अभी सभी फॉर्म के लिए कोई एक अंतिम तारीख तय नहीं हुई है. जिस फॉर्म पर ऑनलाइन फाइलिंग अनिवार्य होगी, USCIS पहले 60 दिन का नोटिस देगा. इसलिए आवेदकों को USCIS के अपडेट देखते रहना चाहिए और पासपोर्ट, इमिग्रेशन रिकॉर्ड, रोजगार से जुड़े कागज और दूसरे जरूरी दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी तैयार रखनी चाहिए.

यानी बदलाव आवेदन करने के तरीके में है, ग्रीन कार्ड की कतार में नहीं. अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम डिजिटल हो रहा है. ऑनलाइन फाइलिंग से कागजी काम आसान हो सकता है, लेकिन ग्रीन कार्ड और सिटिजनशिप की कतार खत्म नहीं होगी.