Operation Epic Fury: अमेरिका ने ईरान पर की 11,000 एयर स्ट्राइक, एयर डिफेंस तबाह

अमेरिका का ईरान पर भीषण हमला! 11,000 से अधिक कॉम्बैट सॉर्टीज के साथ ईरान का एयर डिफेंस नेटवर्क ध्वस्त। डोनाल्ड ट्रंप ने दी 7 अप्रैल तक 'स्टोन एज' की चेतावनी।

 
US Air Force Combat Sorties

ईरान के खिलाफ जारी Operation Epic Fury में अमेरिकी वायुसेना ने हमलों का एक नया रिकॉर्ड बनाया है. पेंटागन और CENTCOM की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने अब तक ईरान पर 11,000 से अधिक कॉम्बैट सॉर्टीज पूरी कर ली हैं, जिससे ईरान का एयर डिफेंस नेटवर्क लगभग पूरी तरह ध्वस्त हो गया है.

जानकारी के मुताबिक अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के एयर डिफेंस को नष्ट करने के लिए एक मल्टीलेवल और एडवांस टेक्निकल रणनीति अपनाई, जिसे ‘SEAD’ (Suppression of Enemy Air Defenses) कहा जाता है.

युद्ध के जरूरी आंकड़े

  • कुल कॉम्बैट सॉर्टीज- 11,000 से ज्यादा
  • निशाना बनाए गए लक्ष्य- 13,000 से ज्यादा मिसाइल साइट्स, रडार, IRGC मुख्यालय
  • ऑपरेशन की शुरुआत 28 फरवरी, 2026 से लेकर अब तक
  • प्रमुख एयरक्राफ्ट और हथियार- F-35, F-22, B-52, और JDAM बंकर-बस्टर बम

कैसे हासिल की एयर सुपीरियॉरिटी?

अमेरिका इजराइल ने ईरान की सैन्य शक्ति को पंगु बनाने के लिए अपनी सबसे आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया है:

स्टेल्थ अटैक

F-35 Lightning II और F-22 Raptor ने युद्ध के शुरुआती चरण में ही ईरानी रडार को डिस्ट्रॉय कर दिया, खासतौर से अंडरग्राउंड मिसाइल सेंटरों को तबाह करने में इनकी भूमिका अहम रही.

ईरान के पास रूस निर्मित S-300 जैसे खतरनाक एयर डिफेंस सिस्टम थे, लेकिन F-35 Lightning II और F-22 Raptor एडवांस विमानों की ‘स्टेल्थ’ (रडार से बचने की क्षमता) ने इन्हें बेकार कर दिया. ये विमान ईरानी रडार की पकड़ में आए बिना उनके हवाई क्षेत्र में दाखिल हुए.इन्होंने सबसे पहले रडार स्टेशनों, कमांड सेंटर्स और कम्युनिकेशन टावरों को निशाना बनाया, जिससे ईरान का रक्षा तंत्र ‘अंधा’ हो गया.

भारी बमबारी और बंकर-बस्टर

B-1B लांसर स्टेल्थ विमानों ने रडार को नष्ट कर दिया, तो B-52 Stratofortress जैसे भारी बॉम्बर्स के लिए रास्ता साफ हो गया. B-52 Stratofortress और B-1B Lancer ने ब्रिटेन के RAF फेयरफोर्ड से उड़ान भरकर ईरान के प्रोडक्शन फैक्ट्रियों और कमांड सेंटरों पर ‘बंकर-बस्टर’ बमों की बारिश की. इन विमानों ने भारी मात्रा में JDAM (Joint Direct Attack Munitions) और बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल किया. ईरान ने अपने कई एयर डिफेंस और मिसाइल सिस्टम जमीन के नीचे पहाड़ियों में छिपा रखे थे, जिन्हें इन भारी बमों ने तहस-नहस कर दिया.

प्रिसीजन स्ट्राइक

F-15E Strike Eagle और F/A-18 Super Hornet ने ‘लेजर-गाइडेड’ हथियारों का इस्तेमाल किया. इनका उद्देश्य मोबाइल मिसाइल लॉन्चर्स को ढूंढ कर नष्ट करना था.क्योंकि ईरान के पास अब रडार सुरक्षा नहीं बची थी, इसलिए ये विमान कम ऊंचाई पर उड़कर भी सटीक हमले करने में सफल रहे.

इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर

EA-18G Growler विमानों ने ईरानी comunnication सिस्टम को पूरी तरह जाम कर दिया है, क्योंकि सिर्फ बमबारी ही काफी नहीं थी, रडार को भ्रमित करना भी जरूरी था. EA-18G Growler एयरक्राफ्ट ने इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के जरिए ईरानी रडार सिग्नल्स को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया. इससे ईरानी मिसाइल ऑपरेटरों को यह पता ही नहीं चल पाया कि हमला किस दिशा से हो रहा है.

AWACS और टैंकर सपोर्ट

हवा में ईंधन भरने वाले टैंकरों और AWACS (Airborne Warning and Control System) विमानों ने पूरे ऑपरेशन को 24 घंटे सक्रिय रखा. AWACS ने ईरानी आसमान की हर हलचल पर नजर रखी और अमेरिकी पायलटों को रीयल-टाइम डेटा दिया कि कहां खतरा है और कहां हमला करना है.

ट्रंप का अल्टीमेटम… “स्टोन एज” की चेतावनी

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 7 अप्रैल शाम 8 बजे (ET) तक Strait of Hormuz को फिर से खोलने की समय सीमा दी है. ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि ईरान पीछे नहीं हटा, तो अमेरिका उसे “स्टोन एज” (पाषाण युग) में भेज सकता है.ट्रंप ने कहा, ‘यदि ईरान ने हमारी शर्तों को नहीं माना, तो अगला कदम ‘पावर प्लांट डे’ और ‘ब्रिज डे’ होगा, जिसमें ईरान की पूरी ऊर्जा और परिवहन व्यवस्था को तहस-नहस कर दिया जाएगा’.

ईरान की स्थिति

ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम अब काफी हद तक निष्क्रिय हो चुके हैं. हालांकि ईरान ने कुछ अमेरिकी विमानों को गिराने का दावा किया है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि वह अब केवल Shahed ड्रोन्स और बैलिस्टिक मिसाइलों से जवाबी हमले कर पा रहा है. इनमें से अधिकांश हमलों को अमेरिकी THAAD और Patriot मिसाइल डिफेंस सिस्टम हवा में ही नष्ट कर रहे हैं.

आगे क्या?

अगले 24 से 48 घंटे बेहद निर्णायक हैं. रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के अनुसार, 6 अप्रैल को अब तक के सबसे भीषण हमले किए गए. दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या ईरान डील करेगा या मध्य पूर्व एक और बड़े पूर्ण-कालिक युद्ध की ओर बढ़ेगा.