Strait of Hormuz Crisis: परमाणु बातचीत और तेल पाबंदियों पर ईरान की नई चाल, जानें क्या है पूरा मामला

ईरान ने अमेरिका को भेजा नया प्रस्ताव, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने और परमाणु बातचीत के लिए रखी शर्तें। डोनाल्ड ट्रंप ने किया खारिज।
 
Donald Trump Iran policy

ईरान ने अमेरिका के सामने एक नया और अहम प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत यदि अमेरिका उसकी कुछ शर्तें मान लेता है, तो महज 7 दिन के भीतर 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को खोला जा सकता है और ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत दोबारा शुरू हो सकती है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान एक निजी बैठक में मध्यस्थों के माध्यम से यह प्रस्ताव अमेरिका तक पहुंचाया था. हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है. 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ट्रंप का रुख सख्त है और उन्हें नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान पर फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू होने की उम्मीद है.

🚫 2. नाकेबंदी हटाने, तेल बिक्री पर लगी पाबंदियां और 12 अरब डॉलर के विदेशी खाते रिलीज करने की मांग

ईरान की तरफ से रखी गई इन शर्तों में मुख्य रूप से अमेरिकी द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करना, ईरानी तेल की बिक्री पर लगी पाबंदियां हटाना और 7 दिन का युद्धविराम लागू करना शामिल है. इस युद्धविराम के दायरे में लेबनान को भी रखने की बात कही गई है. इसके अलावा, ईरान के करीब 12 अरब डॉलर के फ्रीज किए गए विदेशी खातों को रिलीज करने की शर्त भी सामने आई है. अराघची का कहना था कि अमेरिका के इन शर्तों को स्वीकार करने के अगले दिन से 7 दिनों की समयसीमा शुरू होगी. चूंकि दुनिया के कुल तेल कारोबार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए होर्मुज पर जहाजों की आवाजाही ठप होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है.

🤝 3. जून के समझौते से मिलता-जुलता है नया प्लान, सऊदी अरब और अमेरिका का रुख अब भी सख्त

ईरान का यह नया प्रस्ताव पिछले साल जून में हुए अमेरिका-ईरान समझौते से काफी मिलता-जुलता है, जो बाद में जुलाई में तनाव बढ़ने के कारण टूट गया था. इस बार ईरान ने प्रक्रिया को बेहद तेज करने का विकल्प चुना है. विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान चाहता है कि इस समझौते से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को मध्यावधि चुनाव से पहले राजनीतिक लाभ मिले और महंगाई का दबाव कम हो, लेकिन अमेरिका और सऊदी अरब को इस प्रस्ताव की नीयत पर संदेह है. यमन और हूती गतिविधियों के कारण खाड़ी देशों का रुख भी बदला हुआ है, हालांकि कतर इस मामले में लगातार मध्यस्थ की भूमिका निभाने का प्रयास कर रहा है.