बिहार बोर्ड: राजमिस्त्री के बेटे ने किया कमाल, कटिहार जिला टॉपर बने अमन

बिहार बोर्ड मैट्रिक में कटिहार के अमन कुमार ने 479 अंक पाकर जिला टॉप किया। राजमिस्त्री के बेटे अमन महज 2 नंबर से स्टेट टॉपर बनने से चूके। जानें उनकी संघर्ष गाथा।

 
प्रेरणादायक पढ़ाई की कहानी

बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा के नतीजों में इस बार भी मेहनत और संघर्ष की कई प्रेरणादायक कहानियां सामने आई हैं. इन्हीं में कटिहार जिले के एक छोटे से गांव मरंगी चकमन के स्टूडेंट अमन कुमार की सफलता ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है. साधारण परिवार से आने वाले अमन ने 479 नंबर हासिल कर जिला टॉपर बनने का गौरव प्राप्त किया. हालांकि वह सिर्फ दो नंबरों से बिहार टॉप करने से चूक गए, लेकिन उनकी उपलब्धि किसी बड़ी जीत से कम नहीं है.

सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया. उनकी इस सफलता से न सिर्फ परिवार बल्कि पूरा गांव गर्व महसूस कर रहा है.

सिर्फ दो अंकों से चूके बिहार टॉप करने से

अमन की सफलता जितनी बड़ी है, उतनी ही छोटी एक कसक भी उनके साथ जुड़ी हुई है. वह महज दो नंबरों से बिहार के टॉपर्स की लिस्ट में जगह बनाने से चूक गए. हालांकि इस बात का हल्का सा अफसोस जरूर है, लेकिन उनकी उपलब्धि को देखकर हर कोई उन्हें विजेता मान रहा है.

आर्थिक तंगी के बावजूद नहीं टूटी हिम्मत

अमन के पिता निर्मल साह पेशे से राज मिस्त्री हैं और परिवार की आमदनी बहुत सीमित है. इसके बावजूद उन्होंने अपने बेटे की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी. अमन ने भी परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और पूरी लगन से पढ़ाई जारी रखी.

गांव में जश्न का माहौल

जैसे ही अमन के टॉपर बनने की खबर गांव पहुंची, पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई. उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया. ग्रामीणों, टिचर्स और जनप्रतिनिधियों ने अमन की इस उपलब्धि की सराहना की और उज्ज्वल भविष्य की कामना की.

इंजीनियर बनने का सपना

अमन का सपना आगे चलकर इंजीनियर बनने का है. उनका कहना है कि वह अपनी मेहनत के दम पर न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन करना चाहते हैं. टिचर्स ने भी उनकी मेहनत, अनुशासन और समर्पण की जमकर तारीफ की है. उनका मानना है कि अमन जैसे स्टूडेंट समाज के लिए प्रेरणा होते हैं.