CBSE 12th Result: वेदांत श्रीवास्तव मार्किंग विवाद, री-इवैल्यूएशन अपडेट

सीबीएसई 12वीं छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने फिजिक्स री-इवैल्यूएशन और गलत आंसर शीट विवाद पर दी सफाई। जानें बोर्ड की मार्किंग सिस्टम और पुनर्मूल्यांकन की पूरी सच्चाई।

 
सीबीएसई बोर्ड मार्किंग प्रक्रिया

सीबीएसई कक्षा 12 के छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने री-इवैल्यूएशन के नतीजे आने के बाद अपनी प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर शेयर की है. री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद छात्र ने स्पष्ट किया कि फिजिक्स विषय में 9 अंकों की बढ़ोतरी री-इवैल्यूएशन के कारण नहीं हुई, बल्कि बोर्ड द्वारा पहले गलत आंसर शीट शेयर किए जाने की गलती सुधारे जाने के बाद उनके वास्तविक अंक मिले थे. पुनर्मूल्यांकन में केवल मैथ्स और कंप्यूटर साइंस में एक-एक अंक बढ़े. इस पूरे मामले ने सीबीएसई की मूल्यांकन प्रक्रिया और ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं. वहीं सीबीएसई ने पुनर्मूल्यांकन परिणाम में अनियमितताओं के वेदांत श्रीवास्तव के दावों का खंडन किया और उन्हें स्पष्ट झूठ बताया.

11 सवालों के पुनर्मूल्यांकन की थी मांग

वेदांत ने बताया कि उन्होंने अलग-अलग विषयों के कुल 11 प्रश्नों की दोबारा जांच के लिए आवेदन किया था. उन्हें उम्मीद थी कि फिजिक्स में भी कुछ और अंक मिलेंगे, लेकिन पुनर्मूल्यांकन के बाद इस विषय में उनके अंकों में कोई बदलाव नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि फिजिकिस के पेपर में एक भी अतिरिक्त अंक नहीं बढ़ाया गया.

गलत आंसर शीट से शुरू हुआ था विवाद

यह मामला तब चर्चा में आया था जब वेदांत ने दावा किया कि वेरीफिकेशन के दौरान सीबीएसई ने उन्हें किसी दूसरे छात्र की फिजिक्स की आंसर शीट भेज दी थी. इस गलती के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर मामला तेजी से वायरल हो गया. बाद में सीबीएसई ने स्वीकार किया कि अनजाने में आंसर शीट की अदला-बदली हो गई थी और फिर वेदांत की वास्तविक आंसर शीट उपलब्ध कराई गई.

ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम पर भी उठे सवाल

सही आंसर शीट मिलने के बाद वेदांत के फिजिक्स के अंक 65 से बढ़कर 74 हो गए थे. हालांकि पुनर्मूल्यांकन में इसके बाद कोई अतिरिक्त अंक नहीं मिले. इस पूरे घटनाक्रम के दौरान उन्होंने आंसर शीट की तस्वीरें भी शेयर कीं, जिनमें डिजिटल टिप्पणियों की जगह पारंपरिक लाल स्याही के निशान दिखाई दिए. इसके बाद सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर भी सोशल मीडिया पर कई सवाल उठे. हालांकि, बोर्ड की ओर से इस संबंध में कोई अलग स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया.