PM Shri School Chandigarh: हरियाली के बीच संगीत, डोम थिएटर और हाइड्रोपोनिक खेती, जानिए क्या है इस अनोखे स्कूल की खासियत

चंडीगढ़ के सेक्टर 18 स्थित गवर्नमेंट गर्ल्स मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में छात्रों को आधुनिक तकनीक, 'नक्षत्र एस्ट्रोडोम' और स्मार्ट बोर्ड के जरिए पढ़ाया जा रहा है।

 
PM Shri school features

पंचकूला: मौजूदा समय में शिक्षा पद्धति में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है. शिक्षा नीति में बदलाव के साथ ही सरकारी स्कूलों के स्कूली छात्रों को विभिन्न विषयों के बारे में शिक्षित करने के लिए अत्याधुनिक नवीन तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ता जा रहा है. भले ही वर्तमान में ऑनलाइन शिक्षा के अनेक विकल्प मौजूद हैं लेकिन अब भौतिक तौर पर भी नवीन तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है.

दरअसल, हम चंडीगढ़ के सेक्टर 18 स्थित गवर्नमेंट गर्ल्स मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल (जीजीएमएसएसएस) की बात कर रहे हैं. यहां स्कूली छात्राओं को विभिन्न माध्यमों से पढ़ाया जा रहा है, जिसमें एक "नक्षत्र एस्ट्रोडोम" विशेष है, जिससे विजुअल्स के साथ समझाया जाता है. इस स्कूल शिक्षक डॉ रमेश शर्मा और स्कूल प्रिंसिपल मंजीत कौर गिल से सभी गतिविधियों के बारे में बातचीत की.

"हरित लोक" के संगीतमय माहौल में स्वागत: शिक्षक डॉ. रमेश शर्मा ने बताया कि, "सुबह सभी स्कूली छात्राएं हरित लोक के संगीतमय माहौल में स्कूल में प्रवेश करती हैं. स्कूल परिसर में प्रवेश द्वारा से अंदर तक काफी फूल-पौधे लगाए गए हैं और साथ ही देशभक्ति के गीत और शांति प्रदान करने वाली धुन के बीच छात्राएं "हरित लोक" से होते हुए अपनी अपनी कक्षाओं में दाखिल होती हैं. छात्राओं को आनंददायक व साकारात्मक माहौल प्रदान करने, उनमें देशभक्ति की भावना को प्रबल करने के मकसद से सुबह-शाम स्कूल में देशभक्ति के गीत चलाए जाते हैं."

"नक्षत्र एस्ट्रोडोम" थियेटर से ज्ञान: डॉ रमेश शर्मा ने बताया कि, "स्कूल को पीएमश्री का दर्जा मिलने के बाद प्रत्येक वर्ष प्राप्त होने वाले फंड का इस्तेमाल स्कूल और स्कूली छात्राओं की शैक्षणिक सुविधाओं के लिए किया जाता है. इसी फंड से स्कूल में डोम थिएटर तैयार किया है, जिसके निर्माण के दौरान तकनीकी कारणों और विशेष सुविधाओं ध्यान रखा गया. डोम थिएटर से स्कूली छात्राओं को पुस्तकों के साथ-साथ विजुअल्स के माध्यम से भी विज्ञान, अंतरिक्ष समेत पर्यावरण के विभिन्न विषयों को सरलता से समझाया जाता है. थिएटर में एक समय पर करीब 30-35 छात्राएं एक साथ बैठकर विभिन्न विषयों से संबंधित पहलुओं की जानकारी ले सकती हैं. डोम के माध्यम से छात्राएं दिलचस्पी के साथ संबंधित विषयों की जानकारी लेती हैं, क्योंकि इससे विजुअल्स के साथ समझना सरल रहता है."

डोम थिएटर के तकनीकी पहलू: डॉ रमेश शर्मा ने आगे बताया कि, "डोम थियेटर के चारों ओर से बंद होने के कारण घुटन की समस्या से बचाव के लिए इसमें नीचे की ओर आठ खिड़कियां हैं. जबकि जमीन से 2 फीट ऊपर लेंटर डाला गया है, ताकि सीलन की समस्या से भी परेशान नहीं होना पड़े. डोम का स्ट्रक्चर कंक्रीट से तैयार किया गया है, इससे यह सुरक्षा मानकों के अनुसार सुरक्षित और सुविधाजनक है."

कक्षाओं में स्मार्ट बोर्ड से पढ़ाई: वहीं, शिक्षक अनुराग द्विवेदी ने कहा कि, "डिजिटलीकरण के दौर में स्कूली छात्राओं को अब पारंपरिक ब्लैक बोर्ड के बजाय ``स्मार्ट बोर्ड" से पढ़ाई कराई जा रही है, ताकि कम समय में अधिक सुविधाजनक तरीके से विषयों को व्यापक स्तर पर समझा जा सके. स्मार्ट बोर्ड पर विभिन्न विषयों से संबंधित तस्वीरें, वीडियो और लिखित जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है. इसके साथ ही छात्राओं के डाउट्स को भी विभिन्न तरीकों से हल किया जाता है." अपना अनुभव साझा करते हुए छात्राओं ने कहा कि, "इस डोम थिएटर तकनीक से चीजों को समझना हमारे लिए आसान हो जाता है. ऐसे में हमें दिक्कतें नहीं होती है."

किचन गार्डन और आरोग्य वाटिका: स्कूल शिक्षक डॉ रमेश शर्मा ने कहा कि, "स्कूल में किचन गार्डन और आरोग्य वाटिका तैयार की गई है. किचन गार्डन में होने वाली सीजनल सब्जियों का इस्तेमाल होम साइंस की छात्राओं छात्राएं अपनी प्रैक्टिकल शिक्षा के लिए करती हैं. वहीं, आरोग्य वाटिका में 41 औषधीय पौधे लगे हैं. स्कूल के ग्रीन हाउस में हाइड्रोपोनिक एग्रीकल्चर प्रणाली भी है. एक ऐसी आधुनिक कृषि तकनीक है, जिसमें पौधों को बिना मिट्टी के, केवल पानी और पोषक तत्वों के घोल से उगाया जाता है. इस प्रणाली में मिट्टी का उपयोग नहीं होता है, जिस कारण इसे 'सोइललेस कल्चर' या बिना मिट्टी की खेती भी कहा जाता है. स्कूल की दीवारों पर विभिन्न चित्रों से महिला सशक्तिकरण का संदेश देते हुए बताया गया है कि बेटियां/महिलाएं हर क्षेत्र में स्वयं को साबित करती रही हैं. इस प्रकार की कई गतिविधियों के कारण स्कूल पिछले 7 वर्षों से स्कूली प्रतियोगिताओं में चंडीगढ़ प्रशासन से प्रथम पुरस्कार हासिल करता आ रहा है."

लैब-योगा और सेल्फ डिफेंस: शिक्षक डॉ. रमेश शर्मा ने बताया कि, "स्कूल की लैब में छात्राएं मौजूद संसाधनों से प्रैक्टिकल वर्क करती हैं. इसके साथ ही स्कूल में विशेष रूप से योगा क्लास और सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग भी दी जाती है. योगा के लिए स्कूल में एक विशेष क्षेत्र को तैयार किया गया है, जहां छात्राएं योगासन से स्वस्थ रहना सीखती हैं. इसके अलावा छात्राओं को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दी जाती है. इस प्रशिक्षण के लिए यदि बेस्ट ट्रेनर्स को हायर करना पड़े तो भी स्कूल पीएमश्री फंड के जरिए छात्राओं को यह सुविधा प्रदान करता है."

स्कूल प्रिंसिपल बोलीं- "इको फ्रेंडली सिस्टम मौजूद": वहीं, स्कूल प्रिंसिपल मनजीत कौर गिल ने कहा कि, "देश और धरती के लिए स्कूल प्रबंधन अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने की कोशिश करता है. स्कूल में इको फ्रेंडली माहौल सुनिश्चित किया गया है, जिसमें प्लास्टिक पूरी तरह बैन लगाया है. स्कूली छात्रों को रिन्यूएबल, सस्टेनेबल संसाधनों की ओर बढ़ने को प्रेरित किया जाता है. यही कारण है कि स्कूल में चारों ओर हरियाली है, क्योंकि पुराने पेड़ों की देखभाल के साथ-साथ नए पेड़ों को लगाया जाता है, ताकि जब कभी स्कूली छात्राएं 10वीं कक्षा और अपनी पूरी स्कूली शिक्षा उत्तीर्ण कर पास आउट होकर जाएं, तो भी उनके नाम का पेड़ स्कूल में मौजूद रहे. पढ़ाई में छात्राओं की दिलचस्पी बढ़ाने के लिए स्कूल परिसर में डोम थियेटर भी है, जिससे अंतरिक्ष के बारे में सटीक जानकारी उपलब्ध कराई जाती है. इसके अलावा स्कूल में बुक बैंक बनाया गया है, जो छात्राएं कक्षा उत्तीर्ण कर अगली कक्षा में जाती हैं, उनकी पुरानी पुस्तकें बुक बैंक के माध्यम से अन्य छात्राओं को उपलब्ध कराई जाती है. स्कूल में चलता-फिरता (मूवेबल) पुस्तक रथ भी मौजूद है, जहां से छात्राएं अपने संबंधित विषयों और पसंद के अनुसार पुस्तकें ले सकती हैं."