दिल्ली शिक्षा निदेशालय का सख्त आदेश: प्राइवेट स्कूल किताबों और यूनिफॉर्म के लिए नहीं कर सकेंगे मजबूर
दिल्ली के अभिभावकों को बड़ी राहत! शिक्षा निदेशालय ने प्राइवेट स्कूलों को खास वेंडर से किताबें-यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर करने पर लगाई रोक। नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई।
दिल्ली के स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के पैरेंट्स को सरकार ने एक बड़ी राहत दी है. नए शैक्षणिक सत्र को लेकर शिक्षा निदेशालय (DoE) ने दिल्ली के सभी प्राइवेट मान्यता प्राप्त स्कूलों को सख्त निर्देश दिया है कि वो छात्रों और अभिभावकों को किसी खास वेंडर से ही किताबें, नोटबुक, यूनिफॉर्म, बैग और पढ़ाई से संबंधित चीजें खरीदने के लिए मजबूर करना बंद करें. यह निर्देश 1 अप्रैल को जारी किया गया है, जिसमें शिक्षा निदेशक ने कहा है कि स्कूलों को किसी भी खास दुकान या सप्लायर से खरीदारी अनिवार्य नहीं करनी चाहिए और मौजूदा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी है.
शिक्षा निदेशालय ने यह आदेश पैरेंट्स की शिकायतों के बाद जारी किया है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ स्कूल उन्हें चुनिंदा वेंडर से निर्धारित मैटेरियल खरीदने के लिए मजबूर कर रहे थे. आदेश में कहा गया है कि इस तरह की प्रथाएं नियमों के अनुरूप नहीं हैं और परिवारों पर अनावश्यक वित्तीय बोझ डालती हैं. इसमें यह भी कहा गया है कि गैर-लाभकारी, गैर-सहायता मान्यता प्राप्त स्कूल, जो सोसाइटीज या ट्रस्ट द्वारा चलाए जाते हैं, उन्हें स्कूल की गतिविधियों में किसी भी प्रकार के व्यवसायीकरण से बचना चाहिए.
स्कूलों को क्या करने की मनाही है?
- इस आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि स्कूल किसी खास विक्रेता से किताबें, नोटबुक, यूनिफॉर्म, बैग या अन्य चीजें खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है.
- अप्रूव्ड पाठ्यक्रम के अलावा अतिरिक्त स्टडी मैटेरियल निर्धारित या थोपी नहीं जा सकती.
- यूनिफॉर्म के डिजाइन या स्पेसिफिकेशन में बार-बार बदलाव नहीं किया जा सकता है. यह कम से कम तीन साल तक बिना बदलाव के रहना चाहिए.
- वेंडर्स के साथ कोई अलग से डील नहीं करनी चाहिए या ऐसी कोई प्रथा नहीं अपनानी चाहिए जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से माता-पिता को किसी विशेष वेंडर से खरीदारी करने के लिए बाध्य करे.
स्कूलों को क्या करना चाहिए?
क्लास-वाइज निर्धारित किताबें और मैटेरियल की पूरी लिस्ट स्कूल की वेबसाइट पर, नोटिस बोर्ड पर, स्कूल परिसर के भीतर डिस्प्ले करनी है. इसके अलावा यूनिफॉर्म की स्पेसिफिकेशन के बारे में भी स्पष्ट रूप से बताना है. इतना ही नहीं, स्कूलों को कम से कम पांच नजदीकी वेंडर्स के नाम, एड्रेस और उनके कॉन्टैक्ट नंबर भी बताने होंगे, जहां से पैरेंट्स किताबें और अन्य स्टडी मैटेरियल खरीद सकते हैं. इसके साथ ही स्कूलों को यह चेतावनी भी दी गई है कि इस तरह की जानकारी को छिपाना या पैरेंट्स को गुमराह करना स्कूलों को कानूनी पचड़े में फंसा सकता है.
पैरेंट्स को मिलती है पूरी आजादी
शिक्षा निदेशालय ने इस बात पर जोर दिया है कि माता-पिता अपनी पसंद के किसी भी वेंडर से उचित बाजार मूल्य पर किताबें, यूनिफॉर्म और संबंधित मैटेरियल खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं, बशर्ते वो निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुरूप हों. स्कूलों को ऐसे स्टडी मैटेरियल पर आपत्ति नहीं जतानी चाहिए. निर्धारित लिस्ट से मेल खाने वाली कोई भी वस्तु स्वीकार्य होनी चाहिए, चाहे वो कहीं से भी खरीदी गई हो.
मनमानी होने पर कैसे दर्ज करा सकते हैं शिकायत?
अगर कोई स्कूल आपको खास विक्रेताओं से किताबें, यूनिफॉर्म या अन्य स्टडी मैटेरियल खरीदने के लिए मजबूर करता है, तो आप इसकी शिकायत नोडल अधिकारी से हेल्पलाइन नंबर 9818154069 पर या ईमेल के माध्यम से ddeact1@gmail.com पर कर सकते हैं. इसके अलावा पैरेंट्स कार्रवाई के लिए जिला और क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारियों से भी संपर्क कर सकते हैं. अधिकारियों का कहना है कि शिकायतों पर कार्रवाई की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम और अन्य लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है.

