UPSC Principal Exam 2026: BLO ड्यूटी में व्यस्त दिल्ली के शिक्षकों को राहत देने की उठी मांग, 4 से 6 हफ्ते परीक्षा टालने का अनुरोध

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में BLO ड्यूटी निभा रहे शिक्षकों ने UPSC प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल भर्ती परीक्षा की तारीख 4 से 6 सप्ताह आगे बढ़ाने की मांग की है।

 
GSTA Ajayveer Yadav

राजधानी दिल्ली में चल रहे विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत मतदाता सूची को अंतिम रूप देने और नामों की जांच का कार्य जोर-शोर से चल रहा है। इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य में दिल्ली के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के रूप में तैनात किया गया है। हालांकि, निर्वाचन कार्यों में व्यस्त इन शिक्षकों के सामने आगामी 1 नवंबर को प्रस्तावित यूपीएससी (UPSC) प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल भर्ती परीक्षा ने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। इसे देखते हुए राजकीय विद्यालय शिक्षक संघ (GSTA) ने यूपीएससी को पत्र लिखकर परीक्षा की तिथि चार से छह सप्ताह आगे बढ़ाने की पुरजोर मांग की है।

📝 828 पदों पर होनी है भर्ती: निर्वाचन कार्य के कारण नहीं मिल पा रहा तैयारी का समय

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा दिल्ली के सरकारी विद्यालयों में प्रिंसिपल के 124 और वाइस प्रिंसिपल के 704 पदों सहित कुल 828 रिक्त पदों को भरने के लिए प्रक्रिया चलाई जा रही है, जिसमें बड़ी संख्या में सेवारत पीजीटी और टीजीटी शिक्षकों ने आवेदन किया है। जीएसटीए के महासचिव अजयवीर यादव ने यूपीएससी को भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि शिक्षक अप्रैल महीने से लगातार बीएलओ और पर्यवेक्षक की कठिन जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। उन्हें स्कूल के नियमित शिक्षण कार्यों के साथ-साथ घर-घर सत्यापन, दस्तावेजों की जांच और ऑनलाइन रिपोर्टिंग जैसे कार्य छुट्टियों के दिनों में भी करने पड़ रहे हैं, जिससे परीक्षा की तैयारी के लिए समय निकालना असंभव हो गया है।

⚖️ शिक्षकों को निर्वाचन ड्यूटी से छूट नहीं, बल्कि परीक्षा की तैयारी के लिए उचित अवसर की मांग

राजकीय विद्यालय शिक्षक संघ ने यह स्पष्ट किया है कि उनकी मांग शिक्षकों को बीएलओ या निर्वाचन कार्य से पूरी तरह मुक्त करने की नहीं है, बल्कि वे अपने प्रशासनिक दायित्वों को पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं। संघ की मुख्य मांग केवल इतनी है कि सार्वजनिक और चुनावी कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे इन मेहनती शिक्षकों को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए न्यायसंगत और पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए, ताकि परीक्षा में बैठने वाले किसी भी शिक्षक को प्रशासनिक दबाव के कारण नुकसान न उठाना पड़े।