Delhi Student Accommodation Issue: महंगे पीजी और असुरक्षित कमरों में रहने को मजबूर डीयू के छात्र, सामने आई बड़ी समस्या

दिल्ली यूनिवर्सिटी में हॉस्टल की भारी कमी। हजारों नए छात्रों के मुकाबले सिर्फ 8-9 हजार सीटें उपलब्ध, महंगे पीजी पर निर्भर छात्र।
 
Delhi University student accommodation

दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए हर साल देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स दिल्ली आते हैं, लेकिन सभी छात्रों के लिए हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध नहीं है. सीमित सीटों और कई कॉलेजों में हॉस्टल नहीं होने के कारण स्टूडेंट्स को प्राइवेट पीजी, किराये के कमरे या फ्लैट में रहना पड़ता है. इससे छात्रों का खर्च बढ़ने के साथ-साथ सुरक्षित आवास को लेकर भी चिंता बनी रहती है. साउथ दिल्ली के सत्यनिकेतन में हुए इमारत हादसे ने इस समस्या को एक बार फिर सामने ला दिया है. हादसे के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि डीयू के छात्रों के लिए पर्याप्त और सुरक्षित हॉस्टल क्यों नहीं हैं.

हॉस्टल सीटें कम, छात्रों की संख्या ज्यादा

दिल्ली यूनिवर्सिटी के 69 से ज्यादा कॉलेजों में बड़ी संख्या में स्टूडेंट पढ़ाई करते हैं. इसके मुकाबले विश्वविद्यालय और कॉलेजों में उपलब्ध हॉस्टल सीटें काफी कम हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सभी कॉलेजों के हॉस्टल मिलाकर करीब 8 से 9 हजार सीटें ही उपलब्ध हैं. वहीं हर साल 70 हजार से ज्यादा नए छात्र अंडरग्रेजुएट कोर्सों में एडमिशन लेते हैं. ऐसे में ज्यादातर स्टूडेंट्स को कैंपस के बाहर रहने की व्यवस्था करनी पड़ती है.

DU के कई कॉलेजों में अभी हॉस्टल की सुविधा नहीं

समस्या सिर्फ सीटों की कमी तक सीमित नहीं है. डीयू के कई कॉलेजों में अभी हॉस्टल की सुविधा नहीं है. शहीद भगत सिंह कॉलेज, कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज, महाराजा अग्रसेन कॉलेज, श्याम लाल कॉलेज, पीजीडीएवी कॉलेज, सत्यवती कॉलेज, शिवाजी कॉलेज, स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज, अदिति महाविद्यालय और भगिनी निवेदिता कॉलेज समेत कई संस्थानों के छात्रों को निजी आवास पर निर्भर रहना पड़ता है.

पीजी का खर्च भी छात्रों के लिए बड़ी चुनौती

हॉस्टल नहीं मिलने पर छात्रों को दिल्ली में महंगे पीजी या किराये के मकान का विकल्प चुनना पड़ता है. नॉर्थ और साउथ कैंपस के आसपास सामान्य पीजी का किराया करीब 12 हजार से 20 हजार रुपये महीने तक पहुंच गया है. भोजन, बिजली और दूसरी सुविधाओं का खर्च अलग होता है. इसका असर खासकर आर्थिक रूप से कमजोर और दूसरे राज्यों से आने वाले छात्रों पर पड़ता है. छात्रों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन हॉस्टल उसी अनुपात में नहीं बढ़े हैं.