हरियाणा शिक्षा मॉडल: 'सुपर 100' ने रचा इतिहास, छात्रों का IIT में डंका
चंडीगढ़ : हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा के नेतृत्व में राज्य की शिक्षा व्यवस्था एक व्यापक परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। उनका स्पष्ट दृष्टिकोण है कि शिक्षा केवल परीक्षा परिणामों तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, कौशल, नवाचार क्षमता और रोजगार संभावनाओं को भी विकसित करे। इसी सोच के अनुरूप उन्होंने विद्यालयी और उच्च शिक्षा दोनों क्षेत्रों में अनेक महत्वपूर्ण पहलें शुरू की हैं।
उनके कार्यकाल में सरकारी स्कूलों की छवि बदलने, आधुनिक तकनीक को शिक्षा से जोड़ने, मेधावी विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए लगातार प्रयास किए गए हैं। यही कारण है कि आज हरियाणा की शिक्षा व्यवस्था देश के अग्रणी मॉडलों में शामिल होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
सरकारी स्कूलों का कायाकल्प : शिक्षा के मंदिरों को मिला नया स्वरूप
महिपाल ढांडा ने शिक्षा विभाग की कमान संभालने के बाद सबसे पहले सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया। लंबे समय तक संसाधनों की कमी से जूझ रहे अनेक विद्यालयों में आधुनिक सुविधाओं के विकास की दिशा में कार्य शुरू किए गए। राज्य के प्रत्येक जिले में आदर्श विद्यालय विकसित करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। इन विद्यालयों में आधुनिक कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, खेल सुविधाएं, हरित परिसर और विद्यार्थियों के लिए बेहतर शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों को निजी संस्थानों के समकक्ष खड़ा करना और अभिभावकों का विश्वास मजबूत करना है।
‘सुपर 100’ योजना : गरीब और ग्रामीण बच्चों के सपनों को मिली उड़ान
महिपाल ढांडा के कार्यकाल की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में ‘सुपर 100’ योजना का विस्तार और उसकी अभूतपूर्व सफलता शामिल है। यह योजना सरकारी स्कूलों के मेधावी तथा आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को IIT-JEE और NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निःशुल्क आवासीय कोचिंग प्रदान करती है। यह कार्यक्रम केवल एक कोचिंग योजना नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बन चुका है। इसने हजारों ग्रामीण परिवारों में यह विश्वास पैदा किया है कि प्रतिभा आर्थिक संसाधनों की मोहताज नहीं होती।
JEE Main 2026 में ऐतिहासिक सफलता : सरकारी स्कूलों ने रचा नया कीर्तिमान
‘सुपर 100’ कार्यक्रम ने हालिया परिणामों में ऐसा प्रदर्शन किया है जिसने निजी कोचिंग संस्थानों को भी पीछे छोड़ दिया।
JEE Main 2026 में कार्यक्रम के 263 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी, जिनमें से 235 विद्यार्थियों ने JEE Advanced के लिए क्वालीफाई किया। लगभग 89 प्रतिशत सफलता दर ने इस योजना को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया।
परिणामों की विशेषताएं भी अत्यंत प्रेरणादायक रहीं—
16 विद्यार्थियों ने 99 से अधिक परसेंटाइल प्राप्त किए।
35 विद्यार्थियों ने 98 से अधिक परसेंटाइल हासिल किए।
57 विद्यार्थियों ने 97 से अधिक परसेंटाइल प्राप्त किए।
91 विद्यार्थियों ने प्रतिष्ठित IIT संस्थानों में प्रवेश का मार्ग प्रशस्त किया।
ये आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि यदि उचित मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध हों तो सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी भी राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।
सामाजिक समरसता का मॉडल बनी ‘सुपर 100’ योजना
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी समावेशी प्रकृति है। सफलता प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के छात्र समान रूप से शामिल रहे हैं।
IIT-JEE Advanced में सफल 91 विद्यार्थियों में—
37 छात्र अनुसूचित जाति वर्ग से,
30 छात्र पिछड़ा वर्ग से,
24 छात्र सामान्य वर्ग से रहे।
यह उपलब्धि दर्शाती है कि सरकार की नीतियां समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही हैं और शिक्षा सामाजिक न्याय का प्रभावी माध्यम बन रही है।
बेटियों ने बढ़ाया गौरव : महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल
महिपाल ढांडा के नेतृत्व में छात्राओं की शिक्षा, सुरक्षा और आवासीय सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसका परिणाम यह हुआ कि ‘सुपर 100’ योजना में बेटियों की भागीदारी लगातार बढ़ी है। इस वर्ष IIT-JEE Advanced में सफल 91 विद्यार्थियों में 34 बेटियां शामिल रहीं। ग्रामीण और साधारण परिवारों की इन छात्राओं ने यह साबित कर दिया कि अवसर मिलने पर बेटियां भी किसी से पीछे नहीं हैं।
यह उपलब्धि केवल शैक्षणिक सफलता नहीं बल्कि महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक कहानी भी है।
कुरुक्षेत्र बना प्रतिभाओं का नया केंद्र
‘सुपर 100’ कार्यक्रम को अधिक प्रभावी और संगठित बनाने के लिए सरकार ने इसे एकीकृत मॉडल में विकसित किया है। पहले यह योजना विभिन्न जिलों में अलग-अलग केंद्रों पर संचालित होती थी, लेकिन अब इसे कुरुक्षेत्र के विशाल आधुनिक परिसर में स्थानांतरित किया गया है।
यह परिसर विद्यार्थियों को आवास, अध्ययन, प्रतियोगी परीक्षा तैयारी और मानसिक विकास के लिए उत्कृष्ट वातावरण उपलब्ध कराता है। यहां सैकड़ों विद्यार्थियों को एक साथ गुणवत्तापूर्ण कोचिंग देने की व्यवस्था की गई है। स्वयं शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने परिसर का निरीक्षण कर विद्यार्थियों को भरोसा दिलाया कि उनके भविष्य निर्माण में किसी प्रकार की संसाधन कमी नहीं आने दी जाएगी।
‘मिशन बुनियाद’ से तैयार हो रही सफलता की मजबूत नींव
महिपाल ढांडा की शिक्षा नीति केवल बारहवीं कक्षा तक सीमित नहीं है। सरकार ने ‘मिशन बुनियाद’ के माध्यम से आठवीं और नौवीं कक्षा से ही प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की पहचान और मार्गदर्शन की व्यवस्था विकसित की है। इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों की बुनियादी शैक्षणिक क्षमता को मजबूत किया जाता है, जिससे वे आगे चलकर ‘सुपर 100’ जैसी योजनाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें। यह दीर्घकालिक दृष्टिकोण हरियाणा की शिक्षा नीति को अन्य राज्यों से अलग पहचान देता है।
डिजिटल शिक्षा और स्मार्ट कक्षाओं की ओर बढ़ते कदम
नई पीढ़ी को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए राज्य में स्मार्ट कक्षाओं और डिजिटल शिक्षण सामग्री को बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा प्रणाली विद्यार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रही है। ऑनलाइन शिक्षण संसाधनों, स्मार्ट बोर्ड, डिजिटल कंटेंट और तकनीकी प्रशिक्षण के माध्यम से सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है।
रोजगारोन्मुखी शिक्षा पर विशेष जोर
महिपाल ढांडा का मानना है कि शिक्षा का अंतिम उद्देश्य युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना होना चाहिए। इसी सोच के तहत विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में कौशल विकास तथा रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम विकसित करने, कौशल प्रशिक्षण बढ़ाने और युवाओं को स्वरोजगार के लिए तैयार करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन की तैयारी
राष्ट्रीय शिक्षा नीति को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए हरियाणा सरकार ने व्यापक तैयारियां शुरू की हैं। महिपाल ढांडा के नेतृत्व में शिक्षा व्यवस्था को अधिक लचीला, कौशल आधारित और बहुआयामी बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल परीक्षा केंद्रित शिक्षा तक सीमित न रखकर उन्हें भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करना है।
उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, अनुसंधान और पारदर्शिता का नया दौर
उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्ता सुधार और अनुसंधान संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों और कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही NEEV जैसे पोर्टलों के माध्यम से संस्थानों के प्रदर्शन का मूल्यांकन और निगरानी सुनिश्चित की जा रही है। इससे शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ी है और विश्वविद्यालयों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरणा मिली है।
निष्कर्ष : शिक्षा को परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम बनाने की दिशा में प्रयास
महिपाल ढांडा के नेतृत्व में हरियाणा की शिक्षा व्यवस्था केवल बुनियादी सुधारों तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक व्यापक परिवर्तन की ओर अग्रसर हुई है। सरकारी स्कूलों का आधुनिकीकरण, ‘सुपर 100’ जैसी क्रांतिकारी योजना की सफलता, डिजिटल शिक्षा का विस्तार, कौशल विकास और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन ने राज्य को शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई है। आज हरियाणा का सरकारी स्कूल केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और वैश्विक मंच तक पहुंचाने का माध्यम बनता जा रहा है। यही परिवर्तन महिपाल ढांडा के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जा सकता है।

