Haryana Waqf Board College Issue: छात्रों और स्टाफ का विरोध प्रदर्शन, जाकिर हुसैन बोले- जल्द जारी होगा बकाया वेतन

नूंह के मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज में वेतन और सुविधाओं के संकट पर हंगामा। कांग्रेस विधायक आफताब अहमद ने सरकार को घेरा।
 
Aftab Ahmed Zakir Hussain

नूंह: जिले के पल्ला गांव स्थित मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज (वक्फ) की व्यवस्थाओं को लेकर छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है. एक और स्टाफ का दावा है कि उन्हें करीब पांच महीने से वेतन नहीं मिला है. वहीं कॉलेज में शिक्षकों की कमी, जर्जर हॉस्टल, खराब लैब मशीनें और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी समस्याएं भी सामने आई हैं. इसको लेकर हाल ही में शिक्षकों और छात्रों ने प्रदर्शन भी किया .

वेतन संकट ने बढ़ाई कर्मचारियों की परेशानी: कॉलेज के निदेशक ख्वाजा मोहम्मद रफी ने कहा कि, "संस्थान में 100 से अधिक टीचिंग और नॉन-टीचिंग कर्मचारी हैं. इनमें करीब 40 के आसपास टीचिंग स्टाफ हैं. लंबे समय से वेतन नहीं मिलने के कारण उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है." वहीं, प्रोफेसर डॉ. वसीम अकरम ने कहा कि, "समय पर वेतन नहीं मिलने से आर्थिक परेशानी के साथ शैक्षणिक कार्य भी प्रभावित हो रहा है. इस संबंध में वक्फ बोर्ड प्रशासन को कई बार पत्राचार किया गया है."

प्रमोशन और इंक्रीमेंट भी लंबे समय से लंबित: वहीं, प्रोफेसर समीम अहमद ने कहा कि, "कई सालों से पदोन्नति और वार्षिक वेतन वृद्धि के मामले भी लंबित हैं. साल 2015 के बाद से फैकल्टी प्रमोशन नहीं हुआ, जबकि 2016-18 के बाद से कई कर्मचारियों को नियमित इंक्रीमेंट का लाभ नहीं मिला. सातवें वेतन आयोग से जुड़े लाभ और सेवा विस्तार संबंधी मामले भी लंबित हैं. "

शिक्षकों की कमी से पढ़ाई पर असर: कॉलेज में अलग-अलग ब्रांच में शिक्षकों की कमी भी बड़ी समस्या बनी हुई है. छात्र अब्दुल रहमान ने कहा कि, "पर्याप्त फैकल्टी नहीं होने के कारण दूसरी ब्रांच के प्रोफेसरों से भी कक्षाएं करवानी पड़ती हैं. इससे सब्जेक्टवाइज पढ़ाई प्रभावित होती है. कॉलेज स्टाफ ने भी प्रशासन से खाली पदों को भरने और शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की है. कई हिस्सों में भवन और हॉस्टल के रखरखाव की जरूरत है. लैब में कई मशीनें काम नहीं कर रहीं, जबकि टॉयलेट की सफाई, हैंडवॉश, पीने के पानी और ग्राउंड जैसी सुविधाओं को लेकर भी शिकायतें हैं."

शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं होने का आरोप: छात्रों का कहना है कि उन्होंने कॉलेज की समस्याओं को लेकर दो से तीन बार लिखित शिकायतें दीं, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं हुआ. वहीं कर्मचारियों का कहना है कि वेतन और अन्य मांगों को लेकर वक्फ बोर्ड प्रशासन को लगातार पत्र भेजे गए हैं. कॉलेज निदेशक ख्वाजा मोहम्मद रफी ने भी स्टाफ, वेतन, भवन निर्माण और हॉस्टल से जुड़े मुद्दों पर उच्च अधिकारियों को पत्राचार किए जाने की बात कही है.

प्रदर्शन के बाद प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग: समस्याओं को लेकर 16 सितंबर को कॉलेज से लघु सचिवालय तक मार्च निकाला गया. छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसमें हिस्सा लिया. प्रदर्शनकारियों ने तहसीलदार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर कॉलेज की व्यवस्थाएं सुधारने की मांग की.

आफताब अहमद ने जाकिर हुसैन पर साधा निशाना: वहीं, अब यह मामला राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है. नूंह से कांग्रेस विधायक आफताब अहमद ने इसे लेकर प्रेसवार्ता की. उन्होंने हरियाणा वक्फ बोर्ड के प्रशासक एवं भाजपा नेता जाकिर हुसैन पर कॉलेज की स्थिति को लेकर सवाल उठाए. आफताब अहमद ने कहा कि, "जाकिर हुसैन के प्रशासक बनने के बाद संस्थान की स्थिति खराब हुई है. मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज को एक साजिश के तहत खत्म किया जा रहा है. छात्रों और स्टाफ के हकों की लड़ाई विधानसभा में उठाई जाएगी."

जाकिर हुसैन ने वेतन जल्द देने की बात कही: दूसरी ओर हरियाणा वक्फ बोर्ड के प्रशासक जाकिर हुसैन ने वेतन जल्द जारी करने का आश्वासन दिया है. उन्होंने कॉलेज को बंद करने के आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि वक्फ बोर्ड कॉलेज के विस्तार के लिए काम कर रहा है तथा समय-समय पर बजट उपलब्ध कराया जाता है.

2009-10 में शुरू हुआ था कॉलेज: दरअसल, मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना 2009-10 में करीब 55 करोड़ रुपये की लागत से 28 एकड़ जमीन पर हुई थी. वर्तमान में यहां करीब 700 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं. कॉलेज में करीब 20 नियमित प्रोफेसर और 11 अनुबंधित असिस्टेंट प्रोफेसर समेत लगभग 100 टीचिंग व नॉन-टीचिंग कर्मचारी हैं. जम्मू-कश्मीर सहित अन्य क्षेत्रों के विद्यार्थी भी यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं.

कॉलेज के भविष्य पर टिकी निगाहें: मेवात में तकनीकी शिक्षा के प्रमुख संस्थान के रूप में स्थापित इस कॉलेज की मौजूदा समस्याओं ने छात्रों और कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है. एक तरफ वेतन और मानव संसाधन से जुड़े मामले लंबित हैं तो दूसरी ओर भवन, हॉस्टल, लैब और बुनियादी सुविधाओं में सुधार की मांग उठ रही है. अब कॉलेज प्रबंधन, वक्फ बोर्ड प्रशासन और सरकार की ओर से इन समस्याओं के समाधान के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की निगाहें हैं.