NCERT New Syllabus: 10वीं-11वीं में बदला सिलेबस, 2027-28 से लागू होंगी नई किताबें!

NCERT का बड़ा फैसला! कक्षा 10वीं और 11वीं का सिलेबस बदला, 2027-28 सत्र से मिलेंगी नई किताबें। कक्षा 9वीं में इसी साल से लागू होगा बदलाव। जानें शिक्षकों के लिए क्या है एडवाइजरी।

 
Teacher Advisory for Basic Learning

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी एनसीईआरटी (NCERT) ने स्कूली शिक्षा को लेकर बड़ा बदलाव करने की तैयारी शुरू कर दी है. नई शिक्षा नीति के तहत अब कक्षा 10वीं और 11वीं की पढ़ाई नए सिलेबस से कराई जाएगी, जिसकी नई किताबें शैक्षणिक सत्र 2027-28 से लागू होंगी. इसका मतलब है कि 2026-27 सत्र में छात्र अभी पुरानी किताबों से ही पढ़ाई करेंगे. एनसीईआरटी ने इस संबंध में एक एडवाइजरी जारी करते हुए शिक्षकों से सहयोग की अपील की है, ताकि नए सिलेबस को लागू करने में किसी तरह की परेशानी न हो.

एनसीईआरटी का कहना है कि नए पाठ्यक्रम को लागू करने से पहले छात्रों की बुनियादी पढ़ाई (बेसिक लर्निंग) को मजबूत करना जरूरी है. इससे उन्हें नई किताबों और बदले हुए सिलेबस को समझने में आसानी होगी. इसी को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों को पहले आधार मजबूत करने पर जोर देने को कहा गया है. एनसीईआरटी ने कहा, ‘शिक्षकों को सलाह दी जाती है कि वो नए पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों को शुरू करने से पहले ये सुनिश्चित करें कि छात्रों की पूर्व-आवश्यक शिक्षा को पर्याप्त रूप से पूरा किया गया हो’.

कक्षा 9वीं की नई किताबें इसी सत्र से लागू

जानकारी के मुताबिक, कक्षा 9वीं की नई किताबें भी तैयार की जा रही हैं और इन्हें 2026-27 सत्र से लागू किया जाएगा. इससे पहले कक्षा 1 से 8वीं तक की नई किताबें तैयार की जा चुकी हैं, जो प्रिंट और डिजिटल दोनों रूपों में उपलब्ध हैं. एनसीईआरटी ने अपने ड्राफ्ट सिलेबस को पहले ही आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दिया है, जिसपर शिक्षकों और अन्य संबंधित लोगों से सुझाव भी मांगे गए हैं. इसका उद्देश्य नए पाठ्यक्रम को और बेहतर बनाना है.

क्यों हो रहा ये बदलाव?

एडवाइजरी में ये भी कहा गया है कि यह बदलाव चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. इसका मुख्य मकसद शिक्षा को अधिक आधुनिक, उपयोगी और स्किल-आधारित बनाना है, ताकि छात्र सिर्फ किताबों तक सीमित न रहें, बल्कि व्यावहारिक ज्ञान भी हासिल कर सकें. कुल मिलाकर एनसीईआरटी का ये कदम शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है, जिससे आने वाले समय में छात्रों को अधिक बेहतर और प्रासंगिक शिक्षा मिलने की उम्मीद है.