नीतीश मिश्रा: हार्वर्ड से पढ़ाई और 5 बार के विधायक, जानें उनकी प्रोफाइल

बिहार के मंत्री नीतीश मिश्रा की एजुकेशनल क्वालिफिकेशन: सेंट माइकल्स से हार्वर्ड तक का सफर। जानें उनके प्रशासनिक अनुभव और 'यूथ आइकन' बनने की पूरी कहानी।

 
बिहार पर्यटन एवं औद्योगिक विकास

बिहार की राजनीति में जहां आमतौर पर जातीय समीकरण और राजनीतिक प्रभाव की चर्चा होती है, वहीं भाजपा विधायक और मंत्री नीतीश मिश्रा अपनी एजुकेशनल क्वालिफिकेशन और प्रशासनिक सोच के कारण अलग पहचान रखते हैं. झंझारपुर से पांच बार विधायक चुने जा चुके नीतीश मिश्रा ने भारत ही नहीं बल्कि इंग्लैंड, नीदरलैंड और अमेरिका जैसे देशों में भी शिक्षा प्राप्त की है. हार्वर्ड तक की पढ़ाई और मैनेजमेंट आधारित सोच ने उन्हें बिहार के पढ़े-लिखे और नीति-केंद्रित नेताओं में शामिल किया है. यही वजह है कि उन्हें आधुनिक सोच वाले नेताओं में गिना जाता है.

स्कूल से हार्वर्ड तक का सफर

नीतीश मिश्रा की शुरुआती पढ़ाई पटना के प्रतिष्ठित सेंट माइकल हाई स्कूल से हुई. स्कूल के दिनों में वो स्कूल कैप्टन भी रहे. इसके बाद उन्होंने दिल्ली के जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज से हिस्ट्री सब्जेक्ट में ऑनर्स की डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उन्हें शैक्षणिक उत्कृष्टता पुरस्कार भी मिला.

हायर एजुकेशन के लिए उन्होंने मैनेजमेंट की पढ़ाई की और फोर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट और मास्ट्रिच स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से एमबीए किया. बाद में उन्हें ब्रिटेन की प्रतिष्ठित चेवनिंग स्कॉलरशिप भी मिली, जिसके तहत उन्होंने हल यूनिवर्सिटी से वैश्विक राजनीतिक अर्थव्यवस्था में अध्ययन किया. वर्ष 2016 में उन्होंने हार्वर्ड कैनेडी स्कूल के इमर्जिंग लीडर्स प्रोग्राम में भी हिस्सा लिया.

युवा नेता के रूप में पहचान

साल 2008 में उन्हें एमटीवी यूथ आइकन सम्मान मिला. साथ ही ब्रिटिश उच्चायोग ने उन्हें भारत के 30 प्रभावशाली युवा नेताओं में शामिल किया था. इससे उनकी छवि एक आधुनिक और सुधारवादी नेता के रूप में मजबूत हुई.

प्रशासन और विकास पर फोकस

उद्योग मंत्री रहते हुए उन्होंने बिहार की भूमि बैंक व्यवस्था और इथेनॉल नीति जैसी योजनाओं में अहम भूमिका निभाई. समर्थकों का मानना है कि उनकी मैनेजमेंट आधारित सोच प्रशासनिक फैसलों में साफ दिखाई देती है.फिलहाल वो बिहार सरकार में पर्यटन और औद्योगिक विकास विभाग संभाल रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका अंतरराष्ट्रीय अनुभव बिहार में निवेश और पर्यटन को बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है.