Mental Health Guidelines: अब बच्चों को 'आलसी' या 'जिद्दी' नहीं कह पाएंगे टीचर्स, ओडिशा सरकार ने जारी की नई गाइडलाइन

बच्चों और युवाओं में मानसिक तनाव व आत्महत्या की प्रवृत्ति को रोकने के लिए ओडिशा सरकार ने आंगनबाड़ी से लेकर विश्वविद्यालयों तक के लिए नई SOP जारी की है।

 
Odisha government guidelines

बच्चों और युवाओं में लगातार बढ़ते मानसिक तनाव, डिप्रेशन और आत्महत्या की प्रवृत्ति को देखते हुए ओडिशा सरकार ने एक ऐतिहासिक और सराहनीय कदम उठाया है। अब आंगनबाड़ी केंद्रों से लेकर स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों तक स्टूडेंट्स की मेंटल हेल्थ की सुरक्षा और बेहतरी के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की गई है। इस नई गाइडलाइन के तहत टीचर्स और संस्थानों के सभी कर्मचारियों को बच्चों के साथ पूरी तरह सम्मानजनक व्यवहार करने तथा किसी भी तरह की अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने से सख्त परहेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

🚫 'आलसी' या 'जिद्दी' जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर पाबंदी, दो सप्ताह तक लक्षणों पर रहेगी नजर

नई गाइडलाइन के अनुसार, शिक्षकों और कर्मचारियों को बच्चों को ‘आलसी’, ‘जिद्दी’ या अन्य किसी भी अपमानजनक शब्द से संबोधित करने की मनाही है। किसी भी स्टूडेंट को सबके सामने डांटने, अपमानित करने या हीन भावना पैदा करने वाले शब्द कहने से बचना होगा। SOP में यह भी निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी छात्र में लगातार उदासी, डर, चिड़चिड़ापन या हिंसक व्यवहार जैसे असामान्य बदलाव दो हफ्ते से ज्यादा समय तक दिखाई देते हैं, तो उसे गंभीरता से लिया जाएगा और जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी।

🟢 ग्रीन, येलो और रेड श्रेणियों में आकलन, विश्वविद्यालयों में बनेंगे वेलनेस सेंटर

बच्चों की मानसिक स्थिति के आकलन के आधार पर उन्हें ग्रीन, येलो और रेड श्रेणियों में बांटकर उनकी देखरेख की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही परीक्षा के तनाव को कम करने के लिए 25 मिनट की पढ़ाई के बाद 5 मिनट का विश्राम, गहरी सांस लेने की प्रक्रिया (breathing exercises) और पूरी नींद लेने की सलाह दी गई है। उच्च शिक्षण संस्थानों जैसे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में रैगिंग, भेदभाव, नशे की समस्या और घर से दूर रहने की चुनौतियों से निपटने के लिए विशेष 'मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र' स्थापित करने की भी सिफारिश की गई है।