UPSC Success Story: पानीपत की कीर्ति ने चौथे प्रयास में फहराया परचम, UPSC में आई 304वीं रैंक; जज भाभी और DSP भाई के बाद अब कीर्ति बनेगी अफसर
पानीपत की बेटी कीर्ति ने अपने चौथे प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर 304वां रैंक हासिल किया है। पावरग्रिड में लीगल ऑफिसर के पद पर कार्यरत कीर्ति के परिवार में पहले से ही जज और डीएसपी जैसे पद मौजूद हैं। जानें निराशा को ताकत बनाकर कैसे हासिल की यह बड़ी कामयाबी।
पानीपत : हौसला अगर बुलंद हो और परिवार का साथ मिले, तो असफलताएं भी सफलता का रास्ता बन जाती हैं। पानीपत की कीर्ति ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में 304वां रैंक हासिल कर इस बात को सच कर दिखाया है। कीर्ति की इस उपलब्धि से न केवल उनके घर में, बल्कि पूरे जिले में जश्न का माहौल है।
संघर्ष से सफलता तक- चौथे प्रयास में मिली कामयाबी
कीर्ति ने यह मुकाम अपने चौथे प्रयास में हासिल किया है। उन्होंने बताया कि पिछले प्रयासों में जब असफलता हाथ लगी, तो वह काफी निराश हुई थीं। लेकिन उनके मन में यूपीएससी क्लियर करने का सपना अटूट था। अपनी निराशा को उन्होंने अपनी ताकत बनाया और दोगुनी मेहनत से तैयारी में जुट गईं, जिसका परिणाम आज सबके सामने है।
उपलब्धियों से भरा है परिवार
कीर्ति एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती हैं जहां शिक्षा और सेवा का माहौल पहले से ही मौजूद है। पिता जोगिंद्र सिंह, रिटायर्ड प्रोफेसर हैं। माता मंजू रानी, काबड़ी गांव के सरकारी स्कूल में हिंदी की अध्यापिका हैं। भाई आशीष, गृह मंत्रालय (MHA) में बतौर DSP तैनात हैं। भाभी मुनमुन चौधरी, गुरुग्राम में जज के पद पर कार्यरत हैं। छोटी बहन सुकीर्ति, कुरुक्षेत्र के आदेश मेडिकल कॉलेज से MBBS कर रही हैं। कीर्ति खुद भी पिछले 2 साल से पावरग्रिड में लीगल ऑफिसर के रूप में सेवाएं दे रही हैं, लेकिन उनका लक्ष्य हमेशा से भारतीय प्रशासनिक सेवा का हिस्सा बनना था।
माता-पिता बने ढाल, कभी टूटने नहीं दिया हौसला
अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देते हुए कीर्ति भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, जब-जब मैं असफल हुई, माता-पिता ने मुझे गिरने नहीं दिया। उन्होंने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया और मुझ पर भरोसा जताया। उनकी प्रेरणा की वजह से ही आज निराशा के बाद यह बड़ी खुशी हाथ लगी है।
भविष्य का लक्ष्य: जनसेवा और राष्ट्र निर्माण
कीर्ति का कहना है कि रैंक हासिल करना केवल एक शुरुआत है। उनका असली सपना अब शुरू होता है, जहां वह जनसेवा करना चाहती हैं। वह चाहती हैं कि अपनी कार्यप्रणाली से राष्ट्र के लिए कुछ सकारात्मक योगदान दे सकें और समाज के वंचित वर्गों की मदद कर सकें।

