NEET Score AIQ State Quota Rules: यूपी में 88 मेडिकल कॉलेजों की 14000 सीटों पर एडमिशन का क्या है ट्रेंड? एक्सपर्ट से जानिए पूरा ब्योरा

NEET UG 2026 एडमिशन ट्रेंड के अनुसार जानें यूपी में सबसे कम स्कोर पर MBBS-BDS देने वाले सरकारी व प्राइवेट मेडिकल कॉलेज, फीस और 14,000 सीटों का पूरा गणित।
 
ASMC Sonbhadra MBBS Fees

यदि आप नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET UG 2027) में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं, तो पढ़ाई के साथ-साथ देश और राज्यों में MBBS-BDS सीटों पर एडमिशन का गणित समझना बेहद जरूरी है। मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन ऑल इंडिया कोटा (AIQ) और स्टेट कोटा (State Quota) के आधार पर दिया जाता है। इन्हीं महत्वपूर्ण फैक्टर्स के कारण कई बार NEET UG में कम स्कोर पाने वाले कैंडिडेट्स को भी MBBS या BDS में एडमिशन की सीट मिल जाती है। आइए जानते हैं यूपी में सबसे कम NEET UG स्कोर पर एडमिशन देने वाले सरकारी व प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों और उनकी फीस में अंतर का पूरा ब्योरा।

⚖️ MBBS-BDS जैसे मेडिकल कोर्सों में एडमिशन तय करने वाले मुख्य फैक्टर्स

मेडिकल सीटों पर आवंटन मुख्य रूप से निम्नलिखित नियमों और प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है:

  • NTA NEET UG परीक्षा: MBBS और BDS में प्रवेश के लिए उसी शैक्षणिक वर्ष का NEET UG स्कोर अनिवार्य होता है।

  • दो स्तरीय काउंसलिंग: एडमिशन प्रक्रिया के लिए सेंट्रल और स्टेट—दो तरह की काउंसलिंग आयोजित की जाती हैं।

  • ऑल इंडिया कोटा (AIQ 15%): सेंट्रल काउंसलिंग के जरिए केंद्रीय मेडिकल संस्थानों की 100% सीटों और राज्यों के सरकारी कॉलेजों की 15% सीटों पर एडमिशन दिया जाता है।

  • स्टेट कोटा (State Quota 85%): संबंधित राज्य अपने अधीन संचालित मेडिकल कॉलेजों की 85% सीटों पर एडमिशन के लिए अपनी काउंसलिंग आयोजित करता है।

  • आरक्षण नियम: एडमिशन प्रक्रिया में EWS, OBC, SC, ST और PwD श्रेणियों के आरक्षण नियमों को सख्ती से लागू किया जाता है।

🏥 यूपी के किन सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सबसे कम स्कोर पर मिला MBBS और BDS?

NEET एक्सपर्ट नबीन कार्की के अनुसार, हर साल NEET UG प्रश्नपत्र के कठिनाई स्तर और छात्रों के प्रदर्शन के आधार पर कटऑफ व कॉलेजों का क्रम बदलता है। वर्ष 2026 के एडमिशन ट्रेंड के मुताबिक:

  • सरकारी MBBS (स्टेट कोटा): सामान्य कैटेगरी के लिए राज्य में सबसे कम 563 स्कोर पर ASMC सोनभद्र में MBBS की सीट मिली।

  • सरकारी BDS (स्टेट कोटा): सामान्य कैटेगरी के लिए राज्य में सबसे कम 557 स्कोर पर KGMU डेंटल कॉलेज, लखनऊ में BDS की सीट अलॉट हुई।

  • सरकारी MBBS (ऑल इंडिया कोटा): AIQ के तहत यूपी के सरकारी कॉलेजों में सबसे कम 558 स्कोर पर ASMC सिद्धार्थनगर में सामान्य कैटेगरी के कैंडिडेट को एडमिशन मिला।

🏫 प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में सबसे कम स्कोर पर एडमिशन का ट्रेंड

प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में ऑल इंडिया कोटा लागू नहीं होता, यहाँ स्टेट काउंसलिंग से ही सीटें भरी जाती हैं:

  • प्राइवेट MBBS: वर्ष 2026 के ट्रेंड के अनुसार, सामान्य कैटेगरी में 214 स्कोर पर तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज, मुरादाबाद में MBBS एडमिशन मिला, जो राज्य में सबसे कम है।

  • प्राइवेट BDS: सामान्य कैटेगरी में 177 स्कोर पर डेंटल कॉलेज, आजमगढ़ में BDS में एडमिशन हुआ।

💰 सरकारी बनाम प्राइवेट कॉलेज: MBBS की फीस का बड़ा अंतर

सबसे कम स्कोर पर एडमिशन देने वाले सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों की सालाना ट्यूशन फीस में ज़मीन-आसमान का फर्क है:

  • ASMC सोनभद्र (सरकारी): वार्षिक ट्यूशन फीस मात्र ₹36,000 है। यानी 2 लाख रुपये से भी कम ट्यूशन फीस में 5.5 साल का MBBS कोर्स पूरा हो जाता है।

  • तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज, मुरादाबाद (प्राइवेट): वार्षिक ट्यूशन फीस लगभग ₹17 लाख तक है। हॉस्टल व अन्य खर्च मिलाकर 5.5 साल का MBBS पूरा करने में 1 से 1.25 करोड़ रुपये तक का खर्च आता है।

🌟 यूपी में सबसे कम फीस वाले टॉप सरकारी व प्राइवेट मेडिकल कॉलेज
  • सबसे कम फीस (AIIMS): एम्स गोरखपुर और एम्स रायबरेली में पूरे MBBS कोर्स की कुल फीस लगभग ₹6,000 है।

  • कम फीस वाले राज्य सरकारी कॉलेज: ASMC कानपुर और डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ में MBBS की वार्षिक ट्यूशन फीस मात्र ₹18,000 है।

  • सबसे कम फीस वाला प्राइवेट कॉलेज: प्राइवेट कॉलेजों में हिंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, बाराबंकी सबसे कम फीस वाला संस्थान है, जहाँ वार्षिक MBBS फीस ₹13,60,690 है।

📈 यूपी में 88 मेडिकल कॉलेज और MBBS की कुल 14,000 सीटें

नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) द्वारा जारी सीट मैट्रिक्स 2026 के अनुसार उत्तर प्रदेश का इंफ्रास्ट्रक्चर:

  • कुल मेडिकल कॉलेज: यूपी में कुल 88 मेडिकल कॉलेज (49 सरकारी + 39 प्राइवेट) संचालित हो रहे हैं।

  • कुल MBBS सीटें: राज्य में MBBS की कुल 14,000 सीटें उपलब्ध हैं।

  • सरकारी सीटें: 49 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 5,700 सीटें हैं।

  • प्राइवेट सीटें: 39 प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में 8,300 सीटें मौजूद हैं।