Chhatrapati Murder Case: राम रहीम के बरी होने पर बोले अंशुल छत्रपति- 'झटका लगा है पर हार नहीं मानी, अब सुप्रीम कोर्ट में देंगे चुनौती'

रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में हाईकोर्ट द्वारा डेरा प्रमुख राम रहीम को बरी किए जाने के बाद पत्रकार के बेटे अंशुल छत्रपति ने सुप्रीम कोर्ट जाने का ऐलान किया है। 20 साल की कानूनी लड़ाई के बाद आए इस फैसले पर अंशुल ने कहा कि वे न्याय के लिए आखिरी दम तक लड़ेंगे।

 
सिरसा न्यूज़ हिंदी

सिरसा: पत्रकार रामचंदर छत्रपति हत्याकांड में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बरी किए जाने के फैसले ने न्याय की इस लंबी लड़ाई में एक नया मोड़ ला दिया है। इस फैसले के बाद जहाँ डेरा समर्थकों ने राहत की सांस ली है, वहीं पत्रकार के बेटे अंशुल छत्रपति ने हार न मानते हुए अब सुप्रीम कोर्ट जाने का ऐलान कर दिया है।

 
हाई कोर्ट के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अंशुल छत्रपति ने कहा कि वे इस आदेश से स्तब्ध हैं लेकिन निराश नहीं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि वह हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।

अंशुल छत्रपति ने कहा कि हमने 20 साल तक न्याय की लंबी लड़ाई लड़ी है। निचली अदालत ने सबूतों के आधार पर सजा सुनाई थी। अब हम इस फैसले का अध्ययन कर रहे हैं और जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करेंगे।"  दूसरी ओर, डेरा सच्चा सौदा के प्रवक्ताओं और समर्थकों ने इस फैसले का जोरदार स्वागत किया है। डेरा प्रबंधन का कहना है कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और यह फैसला सच्चाई की जीत है। समर्थकों का मानना है कि राम रहीम को इस मामले में झूठा फंसाया गया था।

क्या था पूरा मामला?  

  • अक्टूबर 2002: सिरसा के निडर पत्रकार रामचंदर छत्रपति ने अपने अखबार 'पूरा सच' में एक गुमनाम पत्र छापा था, जिसमें डेरा के भीतर साध्वियों के यौन शोषण के आरोप लगाए गए थे।
  • हमला: पत्र छपने के कुछ समय बाद ही रामचंदर छत्रपति पर उनके घर के बाहर जानलेवा हमला हुआ।
  • नवंबर 2002: दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान पत्रकार छत्रपति की मृत्यु हो गई।
  • CBI जांच: लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद मामला CBI को सौंपा गया।
  • 2019 का फैसला: पंचकुला की विशेष CBI अदालत ने गुरमीत राम रहीम और तीन अन्य को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।