बहल में आंधी-तूफान का कहर: पेड़-खंभे गिरे, किसानों की फसलें बर्बाद

बहल में तेज आंधी और बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त। बिजली खंभे और पेड़ गिरने से यातायात प्रभावित। वहीं, ढिगावा में बारिश से गर्मी से राहत, किसानों के लिए मिश्रित खबर।

 
किसानों की बिजाई पर असर

बहल। क्षेत्र में बुधवार को आई तेज आंधी से पेड़ और बिजली के खंभे गिरने से बिजली आपूर्ति तथा यातायात व्यवस्था दोनों प्रभावित हो गए। सड़क किनारे खड़े पेड़ गिरने से बहल से निकलने वाले लोहारू और भिवानी सड़क मार्ग काफी देर तक प्रभावित रहा तो वहीं बिजली के खंभे गिरने से क्षेत्र में बिजली व्यवस्था चरमरा गई। आंधी और तेज बारिश से जिन खेतों में बिजाई हो चुकी थी उनमें भी नुकसान हुआ है।

बुधवार दोपहर को अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। कुछ देर धूल भरी आंधी चलने के बाद आंधी ने तूफान का रूप ले लिया और सब कुछ धूलमय हो गया। आसमान में छाई आंधी से दिन में अंधेरा सा छा गया। दुकानों के आगे व घरों में लगे टिन शेड, छप्पर और साइन बोर्ड दूर तक जा गिरे। अनेक जगहों पर सड़क किनारे व खेतों में पेड़ जमीन पर गिर गए।

सबसे ज्यादा नुकसान बहल से सिरसी गांव के बीच हुआ जहां करीब तीन किमी की दूरी में दस से ज्यादा पेड़ गिर गए। वहीं आंधी से अनेक स्थानों पर बिजली के खंभे गिर गए जिससे बिजली आपूर्ति प्रभावित हो गई। बिजली निगम द्वारा अलग-अलग टीमें बनाकर कर्मचारियों को नुकसान का आंकलन करने के लिए भेजा गया है।

फिर करनी होगी फसलों की बिजाई
बुधवार की बारिश के बाद अब किसानों को कपास, ग्वार, बाजरा, मूंग सहित अन्य फसलों की बिजाई फिर से करनी पड़ेगी। पिछली बारिश के बाद अधिकतर किसानों ने फसलों की बुवाई कर दी थी। किसान महेंद्र, सुरेश, पवन सहित अन्य किसानों ने बताया कि फसल बोने के साथ ही उन पर यह आपदा आ गई है। दस दिन के अंदर जिन फसलों की बुवाई हुई है वहां बारिश के बाद जमीन कठोर होने से दाने के अंकुरित होने की कोई उम्मीद नहीं है।

तेज बारिश ने दिलाई गर्मी से राहत
ढिगावा मंडी। ढिगावा कस्बे और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बुधवार शाम मौसम ने अचानक करवट ली। दिनभर की गर्मी और उमस से परेशान लोगों को शाम करीब 4:15 बजे तेज हवा के साथ शुरू हुई तेज बारिश ने बड़ी राहत दी।

बलवीर, सुरेश, बाबुलाल, सोनू, जोशी और सुमित के मुताबिक पहले आसमान में काले घने बादल छाए और तेज आंधी चली। इसके कुछ ही मिनटों बाद बारिश शुरू हो गई जो करीब 30 मिनट तक रुक-रुक कर होती रही। तापमान में 4 से 5 डिग्री तक की गिरावट महसूस की गई। दिन में गर्मी के कारण सुने पड़े बाजार शाम को गुलजार दिखाई दिए। ठंडी हवा चलने से लोग घरों की छतों और दुकानों के बाहर मौसम का लुत्फ उठाते दिखे। किसान मंजीत ने बताया कि यह बारिश बाजरे और कपास की फसल के लिए अमृत के समान है। बुवाई के बाद पहली सिंचाई का खर्च बच गया।