भिवानी बाईपास पर गहराया खतरा: मिट्टी कटाव से सड़क धंसने का डर, NHAI बेखबर
भिवानी बाईपास पर बारिश के कारण मिट्टी का भारी कटाव, सड़कें धंसने की कगार पर। भारी वाहनों की आवाजाही से हादसों का अंदेशा। जानें क्या है NHAI की लापरवाही का कारण।
भिवानी। मानसून की सक्रियता से पहले ही मुख्य मार्गों के किनारे मिट्टी के गहरे कटाव सामने आने लगे हैं। शहर के बाईपास पर बारिश के बाद मिट्टी के कटाव अधिक गहरे हो गए हैं। कई जगह गहराई तक मिट्टी खिसक चुकी है जिससे रोड़ियों की निचली परत भी बारिश के पानी में बह गई है। बाईपास पर रोजाना भारी वाहनों का आवागमन रहता है, जिससे हादसों का अंदेशा बना है।
शहर का बाईपास करीब 35 किलोमीटर दायरे में बना है। इससे भिवानी-हांसी, भिवानी-जींद, भिवानी-दिल्ली, भिवानी-लोहारू और भिवानी-महम मार्ग जुड़ चुके हैं। भिवानी-हांसी रोड से भिवानी-लोहारू रोड को जोड़ने के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया चल रही है। बारिश के बाद बाईपास पर मिट्टी के कटाव बढ़ने से खतरा बढ़ गया है। बाईपास से विभिन्न रूटों पर रोडवेज और अन्य प्रांतों के सवारी वाहन दौड़ रहे हैं।
सड़क की स्थिति और जल निकासी
कई जगह मिट्टी के कटाव इतने बढ़ गए हैं कि सड़क की ऊपरी तारकोल परत भी अधर में है। इस पर टायर का दबाव पड़ने से बस के धंसने और पलटने का डर बना है। बाईपास पर गांवों को जोड़ने के लिए सर्विस लाइन भी बनाई गई हैं। बारिश के दौरान बाईपास का पानी सर्विस लाइन के जरिये खेतों तक पहुंचता है। यह पानी सड़क किनारों की मिट्टी को भी अपने साथ खेतों में बहा ले जा रहा है।
कटाव को भरने की तरफ किसी का ध्यान नहीं
एनएचएआई के अधिकारियों को बाईपास के रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हाईवे पेट्रोलिंग टीम भी लगातार गश्त पर रहती है, मगर फिर भी इन कटाव को भरने की तरफ किसी का ध्यान नहीं है। एनएचएआई के कनिष्ठ अभियंता नारायण का कहना है कि बाईपास का अधिकांश हिस्सा अब दूसरी राष्ट्रीय राजमार्ग अथॉरिटी के पास चला गया है। इसके रखरखाव की जिम्मेदारी भी उनके पास ही चली गई है। शहर का बाईपास करीब तीन चरण में बना है। चौथे चरण में बाईपास को रिंग रोड में बदलने की प्रक्रिया चल रही है। इसके विभिन्न हिस्सों के निर्माण और रखरखाव के लिए अलग-अलग संबंधित अथॉरिटी को जिम्मेदारी दी गई है।

