Medical Negligence in Bhiwani: आपात विभाग में लापरवाही से मरीजों की जान पर खतरा, समय पर इलाज न मिलने से हो रही मौतें

भिवानी जिला नागरिक अस्पताल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी गंभीर मरीजों को लगा रहे हैं टांके। डॉक्टरों के इस्तीफे से बिगड़ी स्वास्थ्य सेवाएं।
 
doctor resignation Bhiwani hospital

भिवानी। चौधरी बंसीलाल जिला नागरिक अस्पताल के आपात सेवा विभाग की माइनर ओटी में हादसों में गंभीर घायलों के घावों पर हरियाणा कौशल रोजगार निगम के तहत कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मी टांके लगा रहे हैं। जबकि गंभीर मरीजों को सबसे पहले वहां तैनात चिकित्सक द्वारा संभालना अनिवार्य है।

आपात विभाग की माइनर ओटी में चतुर्थ श्रेणी कर्मी ही गंभीर घायलों को सबसे पहले संभाल रहे हैं। इन कर्मियों का काम वार्ड सर्वेंट से अधिक नहीं है। इसके बावजूद वे चिकित्सक का दायित्व भी निभा रहे हैं। समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण कई मरीजों को रेफर करना पड़ता है और रास्ते में कुछ मरीजों की मौत भी हो जाती है।

जिला नागरिक अस्पताल में मेडिकल ऑफिसर के 66 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 14 मेडिकल ऑफिसरों (एमओ) ने सेवाओं से त्यागपत्र दे दिया है। हालांकि उनके त्यागपत्र अभी स्वीकृत नहीं हुए हैं। त्यागपत्र देने वाले एमओ ड्यूटी पर भी नहीं आ रहे हैं जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर पड़ रहा है।

अस्पताल के आपात विभाग में गंभीर मरीजों के लिए 24 घंटे सेवाएं संचालित हैं। इसके लिए तीन शिफ्टों में चिकित्सकों का ड्यूटी रोस्टर बनाया गया है। प्रत्येक शिफ्ट में एक एमओ, तीन नर्सिंग ऑफिसर, एक वार्ड सर्वेंट और एक स्वीपर तैनात है। एक चिकित्सक के लिए आपात विभाग में आने वाले मरीजों का दबाव संभालना मुश्किल हो रहा है।

ऐसे में कौशल रोजगार के तहत कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मी घायलों के जख्मों पर टांके तक लगा रहे हैं। इस दौरान कई मरीजों का काफी खून बह जाता है जिससे उनकी जान पर बड़ा जोखिम बना रहता है। जरा सी चूक किसी व्यक्ति की जिंदगी पलभर में खत्म कर सकती है। विभाग की अनदेखी के चलते आपात विभाग की व्यवस्था लगातार बिगड़ रही है।

कई बार एक ही समय में एक से अधिक मरीज आपात विभाग में पहुंच जाते हैं। ऐसी स्थिति में चिकित्सकों के लिए सभी मरीजों का इलाज करना भी संभव नहीं रहता। इससे मरीजों को समय पर उपचार मिलने में परेशानी होती है। आपात विभाग में उपचार में लापरवाही से मरीज की मौत के बाद पहले भी परिजनों ने हंगामा किया है। हालांकि उचित शिकायत नहीं होने के कारण बाद में ये मामले दब गए।