भिवानी: वन विभाग ने घटाया पौधरोपण का लक्ष्य; किसानों को नहीं मिलेंगे मुफ्त पौधे

भिवानी वन विभाग ने मानसून सीजन 2026 के लिए पौधरोपण का लक्ष्य घटाया। इस बार किसानों को सफेदे के मुफ्त पौधे नहीं मिलेंगे। जानें विभाग की नई रणनीति और कारण।

 
लोकराम नेहरा पर्यावरण प्रहरी

भिवानी। तेज आंधी और आग की घटनाओं से जिले में हरियाली को भारी नुकसान पहुंचा है। हालात यह हैं कि इस बार वन विभाग ने पिछले वर्षों की तुलना में पौधरोपण का लक्ष्य घटा दिया है। जुलाई में शुरू होने वाले पौधरोपण अभियान के तहत इस बार लाखों नहीं बल्कि हजारों पौधे ही रोपे जाएंगे। साथ ही किसानों को खेतों में लगाने के लिए वन विभाग की ओर से मुफ्त पौधे भी नहीं मिलेंगे।

वन विभाग मानसून सीजन के दौरान आरक्षित वन क्षेत्र में पौधरोपण करता है। इसके अलावा स्कूली बच्चों को भी पौधे वितरित किए जाते हैं ताकि वे पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होकर दूसरों को भी प्रेरित कर सकें। विभाग अब तक खेतों की मेढ़ों पर लगाने के लिए किसानों को मुफ्त सफेदे के पौधे भी उपलब्ध कराता रहा है लेकिन इस बार यह सुविधा नहीं मिलेगी। पिछले वर्ष भिवानी रेंज में एक लाख से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य था जबकि इस बार यह लक्ष्य घटकर 80,000 से भी कम रह गया है।

किसान खेतों में लगाते हैं हर साल सफेदे के पौधे
किसान हर वर्ष अपने खेतों में सफेदे के पौधे लगाते हैं। इनकी विशेषता है कि ये कम जगह घेरते हैं, कम पानी में भी बढ़ते हैं और अच्छी ऊंचाई प्राप्त कर लेते हैं। बाजार में सफेदे की लकड़ी की अच्छी मांग रहती है तथा दो से तीन वर्षों में किसानों को इसके अच्छे दाम भी मिल जाते हैं। वन विभाग भी सफेदे के पौधे तैयार करता है लेकिन इस बार ये पौधे केवल आरक्षित वन क्षेत्रों में ही लगाए जाएंगे। तेज आंधी के कारण सड़कों के किनारे बड़ी संख्या में सफेदे के पेड़ टूट चुके हैं जिससे कई मार्गों पर इनकी संख्या काफी कम हो गई है।

पौधरोपण नहीं, पौधों से भावनात्मक जुड़ाव से सुधरेगा पर्यावरण : लोकराम नेहरा
पर्यावरण संरक्षण केवल पौधरोपण से नहीं बल्कि पौधों से भावनात्मक जुड़ाव से संभव है। सामाजिक संस्थाएं और लोग पौधे तो लगा देते हैं लेकिन बाद में उनकी देखभाल नहीं करते जिससे वे नष्ट हो जाते हैं। यदि शादी की सालगिरह, जन्मदिन या अन्य विशेष अवसरों पर लगाए गए पौधों की पेड़ बनने तक सुरक्षा और सिंचाई की जाए, तभी पर्यावरण को वास्तव में संजोया जा सकता है। -लोकराम नेहरा, पुलिस कर्मचारी एवं पर्यावरण प्रहरी।

खेतों में लगाई जाने वाली आग का असर अब सड़कों के किनारे खड़े हरे-भरे पेड़ों तक पहुंच रहा है। कई बार शरारती तत्व और लकड़ी माफिया भी पेड़ों में जानबूझकर आग लगा देते हैं जिससे उनके तने कमजोर हो जाते हैं और तेज हवा में वे गिर जाते हैं। इसे रोकने के लिए प्रशासन और संबंधित विभागों को ठोस कदम उठाने चाहिए। इस संबंध में समाधान शिविर में भी शिकायत दी गई है। हाल ही में भिवानी-जींद मार्ग पर गांव तिगड़ाना के पास तेज हवा में टूटे पेड़ों को जलाने का प्रयास किया गया। पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को आगे आना होगा तभी शुद्ध वातावरण और स्वच्छ हवा सुनिश्चित हो सकेगी। -ईश्वर मान, पूर्व जिला पार्षद।

जुलाई में मानसून सीजन के दौरान वन विभाग की ओर से पौधरोपण अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत पिछले वर्ष की तुलना में कम पौधे लगाए जाएंगे। विभाग का मानना है कि कम संख्या में लगाए गए पौधों के संरक्षण और देखभाल पर अधिक ध्यान दिया जा सकेगा। अधिक लक्ष्य होने पर हर वर्ष बड़ी संख्या में पौधे नष्ट हो जाते हैं जबकि इस बार लगाए जाने वाले पौधों के पेड़ बनने की संभावना अधिक रहेगी। इस बार किसानों को खेतों में लगाने के लिए विभाग की ओर से मुफ्त पौधे नहीं दिए जाएंगे। केवल स्कूली बच्चों और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से ही मुफ्त पौधों का वितरण किया जाएगा।