Bhiwani Mandi Bajra News: भिवानी मंडी में बाजरे की बंपर आवक, J-Form न बनने से अटका ₹600 प्रति क्विंटल भावांतर भुगतान

भिवानी की मंडियों में बाजरे की बंपर आवक जारी है। जे-फार्म (J-Form) जनरेट न होने के कारण हजारों किसानों का 600 रुपये प्रति क्विंटल भावांतर भरपाई भुगतान अटका पड़ा है।

 
Bhavantar Bharpai Yojana Haryana

भिवानी। नई अनाज मंडी समेत जिलेभर की अनाज मंडियों में बाजरे की आवक लगातार जोर पकड़ रही है। अब तक मंडियों में करीब पौने दो लाख क्विंटल बाजरे की आवक दर्ज की जा चुकी है। आवक में अचानक हुई बढ़ोतरी के कारण मंडियों में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी कतारें लग रही हैं। भिवानी मंडी में लगभग ढाई हजार किसानों द्वारा 55 हजार क्विंटल बाजरे की निजी व्यापारियों को बिक्री करने के बावजूद पोर्टल पर जे-फार्म (J-Form) जनरेट न होने से 600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मिलने वाला भावांतर भरपाई का भुगतान अटका हुआ है।

📉 2300 रुपये प्रति क्विंटल पर सिमटा निजी बोली का भाव: MSP और भावांतर के बाद भी किसानों को नहीं मिल रहा अपेक्षित मुनाफा

राज्य सरकार ने बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2900 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, लेकिन भिवानी मंडी में सरकारी खरीद शुरू न होने के कारण किसान निजी बोली पर बाजरा बेचने को मजबूर हैं। बाजार में बाजरा 2300 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है, जबकि बाकी 600 रुपये की भरपाई सरकार भावांतर योजना के तहत करती है। अब तक 25 हजार से ज्यादा किसान निजी तौर पर बाजरा बेच चुके हैं। आढ़तियों का कहना है कि हाल ही में भाव 2350 रुपये से गिरकर 2300 रुपये रह गए हैं, जिससे एमएसपी और भावांतर का गणित मिलाकर भी किसानों को खास मुनाफा नहीं हो पा रहा है।

🚜 सड़क तक लगीं बाजरे की ढेरियां: 'मेरी फसल मेरा ब्योरा' सत्यापन के बाद रोजाना पहुंच रहा 8 से 10 हजार क्विंटल बाजरा

हाल ही में राजस्व विभाग के पटवारियों और कृषि विभाग के कर्मचारियों द्वारा 'मेरी फसल मेरा ब्योरा' पोर्टल पर मिसमैच डाटा का भौतिक सत्यापन किया गया था। इसके बाद से सत्यापन पूरा करा चुके किसान अपनी फसल लेकर भारी संख्या में मंडियों में पहुंच रहे हैं। स्थिति यह है कि मंडी के खुले प्लेटफॉर्म छोटे पड़ गए हैं और सड़क से लेकर आढ़तियों के प्रतिष्ठानों के सामने बाजरे की ढेरियां लग गई हैं। हालांकि रोजाना 5 से 7 हजार क्विंटल फसल का उठान कराया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि पोर्टल की तकनीकी खामी दूर कर ली गई है, लेकिन पुराने मामलों में अटका भुगतान अभी भी किसानों के खातों में नहीं पहुंचा है।