Bhiwani Dog and Monkey Menace: भिवानी में आवारा कुत्तों और बंदरों का आतंक, रोजाना अस्पताल पहुंच रहे 25 से 30 घायल लोग
भिवानी जिले के शहरी और रिहायशी इलाकों में आवारा कुत्तों और बंदरों का उत्पात लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे आम नागरिकों में भारी दहशत का माहौल है. शहर की गलियों, बाजारों और रिहायशी क्षेत्रों में लावारिस कुत्तों के झुंड हर तरफ घूमते नजर आते हैं, वहीं बंदर भी घरों की छतों पर जमकर उत्पाت मचा रहे हैं. इस वजह से सुबह-शाम बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का घरों से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है, और लोग लगातार प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं.
🏥 2. नगर परिषद की सुस्त कार्यशैली से लोगों में नाराजगी, नियमित अभियान न चलने से बढ़ रही है गंभीर समस्याएं
स्थानीय शहरवासियों राजेश, गिरधर, अशोक और रामअवतार ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए बताया कि आवारा कुत्तों और बंदरों की बढ़ती संख्या पर काबू पाने के लिए नगर परिषद की ओर से कोई प्रभावी और नियमित अभियान नहीं चलाया जा रहा है. प्रशासनिक उदासीनता के कारण शहर में समस्या दिन-प्रतिदिन विकराल रूप लेती जा रही है, जिससे नागरिकों में गहरा रोष व्याप्त है. लोगों का कहना है कि समय रहते यदि इन बेसहारा जानवरों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर नहीं भेजा गया, तो स्थिति और अधिक खतरनाक हो सकती है.
💉 3. सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने वालों की लंबी कतारें, बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक बन रहे हैं शिकार
बंदरों और कुत्तों के काटने या झपटने के हमलों के कारण सरकारी अस्पतालों में घायलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. वर्तमान स्थिति यह है कि जिला अस्पताल में रोजाना औसतन 25 से 30 लोग एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं. इनमें बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं, जिन्हें हमले के बाद अस्पताल में प्राथमिक उपचार कराने के साथ-साथ एंटी रैबीज के टीकों की पूरी खुराक लेनी पड़ रही है, जो स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है.