Sanjay Kumar Father Fight For Justice: 'बेटी को न्याय दिलाकर रहूंगा'—सीबीआई की आत्महत्या थ्योरी खारिज होने पर बोले पिता संजय कुमार

भिवानी की शिक्षिका मनीषा मौत मामले में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट खारिज हो गई है। पिता संजय कुमार की विरोध याचिका में पोस्टमार्टम, साक्ष्यों और घटनास्थल को लेकर कई सवाल उठाए गए थे।
 
Sanjay Kumar Bhiwani Manisha

भिवानी के गांव ढाणी लक्ष्मण निवासी 19 वर्षीय प्ले-स्कूल शिक्षिका मनीषा की संदिग्ध मौत के मामले में शनिवार को पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत द्वारा क्लोजर रिपोर्ट खारिज किए जाने के बाद कई अहम सवाल फिर से जिंदा हो गए हैं। मनीषा के पिता संजय कुमार शुरुआत से ही चीख-चीखकर इसे हत्या बताते रहे, जबकि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) इसे आत्महत्या साबित करने पर अड़ी हुई थी।

अदालत के इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि पिता संजय कुमार द्वारा विरोध याचिका में जांच प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवाल निराधार नहीं थे। जांच में कमियां कहां और किस स्तर पर रहीं, इसका पता लगाने के लिए अब सीबीआई को इस बहुचर्चित मामले की नए सिरे से गहन जांच करनी होगी।

🗓️ 11 अगस्त 2025 से लापता थी मनीषा, 13 अगस्त को मिला था संदिग्ध शव

इस बहुचर्चित घटनाक्रम का पूरा ब्योरा इस प्रकार है:

  • लापता और शव की बरामदगी: 11 अगस्त 2025 से लापता मनीषा का शव 13 अगस्त 2025 को सिंघानी गांव के समीप नहर के पास एक खेत में मिला था।

  • लंबी जांच और क्लोजर रिपोर्ट: स्थानीय पुलिस जांच के बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया। सीबीआई ने लंबी जांच के बाद 12 अगस्त 2026 को पंचकूला की विशेष अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दावा किया कि मनीषा ने आत्महत्या की थी।

  • पिता की याचिका: सीबीआई के इस दावों के खिलाफ पिता संजय कुमार ने 7 सितंबर को विरोध याचिका दायर की, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सीबीआई की रिपोर्ट को खारिज कर दिया। पिता का कहना है, "भले ही कितना समय लग जाए, मैं अपनी बेटी को न्याय दिलाकर ही रहूंगा।"

🌾 शव बरामदगी के समय थे अत्यंत संदिग्ध हालात

जब सिंघानी गांव के पास खेत से मनीषा का शव बरामद हुआ था, तब परिस्थितियां काफी विचलित करने वाली थीं:

  • शारीरिक चोटें: शव का चेहरा, नाक की संरचनाएं, दोनों आंखों के सॉकेट और गर्दन का हिस्सा पूरी तरह गायब था। परिजनों ने दुष्कर्म, हत्या और अंग निकालने के गंभीर आरोप लगाए थे।

  • सुसाइड नोट व कीटनाशक: मौके से एक हस्तलिखित सुसाइड नोट मिला था, जिसमें बीएससी नर्सिंग करने की इच्छा जताई गई थी। रोहतक FSL ने लिखावट की पुष्टि की थी। साथ ही 11 अगस्त को दोपहर करीब 2 बजे का एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था, जिसमें मनीषा कीटनाशक खरीदती दिखी थी।

🏥 रोहतक पीजीआई और दिल्ली एम्स की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बड़ा विरोधाभास

मामले में कराए गए अलग-अलग पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने जांच की दिशा पर बड़े सवाल खड़े किए:

  1. भिवानी अस्पताल व रोहतक पीजीआई रिपोर्ट: दोनों शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गर्दन पर चोटें तथा चेहरे/गर्दन की संरचनाएं गायब होने की बात कही गई थी। विसरा जांच में 'ऑर्गेनोफॉस्फोरस' (जहर) की पुष्टि हुई और मौत का कारण जहर माना गया।

  2. दिल्ली एम्स बोर्ड की रिपोर्ट: परिजनों के कड़े विरोध के बाद दिल्ली एम्स में तीसरा पोस्टमार्टम कराया गया। एम्स बोर्ड ने गर्दन के विच्छेद को अत्यधिक संदिग्ध माना और मौत का मुख्य कारण धारदार हथियार से लगी गंभीर चोटों को बताया।

  3. सीबीआई की थ्योरी: इसके बाद सीबीआई ने स्वास्थ्य मंत्रालय के 5 डॉक्टरों के सुपर-स्पेशियलिटी मेडिकल बोर्ड (SSMB) की राय को आधार बनाया, जिसने एम्स के निष्कर्षों को दरकिनार करते हुए चेहरे के गायब हिस्सों के लिए 'जानवरों की गतिविधि' को जिम्मेदार ठहराया और मौत का कारण जहर मानकर आत्महत्या की रिपोर्ट तैयार की।

🚨 विरोध याचिका में एडवोकेट हर्ष मोहन सिंह द्वारा उठाए गए 5 प्रमुख सवाल

पीड़ित पिता की ओर से पैरवी कर रहे सीबीआई के पूर्व उप कानूनी सलाहकार एडवोकेट हर्ष मोहन सिंह ने कोर्ट के समक्ष कई गंभीर तथ्य रखे:

  • शव की अनुपस्थिति: जिस खेत में शव मिला, वहां से परिजन शव मिलने से 24 घंटे पहले गुजरे थे, तब वहां कोई शव मौजूद नहीं था।

  • घसीटने के निशान: घटनास्थल पर शव को करीब 10 फीट तक घसीटे जाने के स्पष्ट निशान मिले थे, लेकिन मृतका के शरीर पर मौत से पहले किसी संघर्ष के निशान नहीं थे। इससे आशंका जताई गई कि हत्या कहीं और कर शव वहां फेंका गया।

  • दुपट्टा व चप्पलें दूर मिलना: मनीषा का दुपट्टा और चप्पलें शव से करीब 120 फीट दूर मिली थीं। सवाल उठाया गया कि खुदकुशी की स्थिति में दुपट्टा इतनी दूर कैसे जा सकता है?

  • टूटा हुआ मोबाइल: मनीषा का मोबाइल फोन पूरी तरह टूटी हुई हालत में मिला था, जिसका डेटा पुलिस या सीबीआई रिकवर नहीं कर पाई।

👨‍👧 'अदालत के फैसले से परिवार संतुष्ट, सच आएगा सामने'—संजय कुमार

अदालत के इस कड़े रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए मृतका के पिता संजय कुमार ने कहा कि वे और उनका पूरा परिवार विशेष अदालत के इस फैसले से पूरी तरह संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि अदालत ने उनके द्वारा उठाए गए सभी वाजिब सवालों पर गहराई से विचार किया है और सीबीआई को निष्पक्ष व पारदर्शी तरीके से आगे की जांच करने के सख्त निर्देश दिए हैं, जिससे अब सच सबके सामने आ सकेगा।