Bhiwani Naporised Decision: अब वारिसान की तस्दीक से अलग हुए पार्षद, एसडीएम महेश कुमार का बड़ा फैसला

भिवानी नगर परिषद पार्षदों और प्रशासन का विवाद खत्म। अब वारिसान की तस्दीक नंबरदार करेंगे, पार्षद केवल रिहायशी दस्तावेजों की रिपोर्ट देंगे।
 
भिवानी तहसील वारिसान रिपोर्ट

भिवानी। वारिसान की तस्दीक से पार्षदों को अलग करने की मांग को लेकर बुधवार को नगर परिषद के पार्षदों और प्रशासन के बीच चल रहा गतिरोध समाप्त हो गया। अब वारिसान की तस्दीक नगर परिषद के पार्षदों के बजाय नंबरदार करेंगे जबकि पार्षद अपने-अपने क्षेत्र के लोगों की रिहायश से संबंधित दस्तावेजों की ही रिपोर्ट करेंगे।

नगर परिषद चेयरपर्सन प्रतिनिधि भवानी प्रताप सिंह की अगुवाई में पार्षदों ने इस मांग को लेकर एसडीएम महेश कुमार को ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन मिलने के बाद एसडीएम ने तहसीलदार को अपने कार्यालय में बुलाया। उन्होंने दोनों पक्षों की बात सुनी। इसके बाद तय किया गया कि वारिसान की तस्दीक नंबरदारों से ही करवाई जाएगी। एसडीएम ने बताया कि वारिसान की तस्दीक राजस्व विभाग से संबंधित कार्य है इसलिए इसमें नगर परिषद के पार्षदों की भूमिका नहीं होगी। पार्षद अब अपने-अपने क्षेत्र के लोगों की रिहायश से संबंधित दस्तावेजों की ही रिपोर्ट कर सकेंगे।

मौके पर नगर परिषद चेयरपर्सन प्रतिनिधि भवानी प्रताप सिंह, उपाध्यक्ष प्रतिनिधि संदीप सिंह, नगर पार्षद सुभाष तंवर, संदीप यादव, बिल्लू बादशाह, पार्षद प्रतिनिधि मोनू, मनोज खनगवाल, पवन सैनी, अभिषेक दुग्गल, सूर्यकांत तंवर, अशोक कामरा, महाबीर देवसरिया और हर्षदीप मौजूद रहे।


ये था मामला
राजस्व विभाग में किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी जमीन-जायदाद उसके वारिसों के नाम दर्ज की जाती है। इसके लिए संबंधित वार्ड के नगर परिषद पार्षद से वारिसान की तस्दीक करवाई जाती थी। इसमें दिवंगत के कितने बेटे और कितनी बेटियां हैं, उनका विवरण दर्ज किया जाता था और पार्षद रिपोर्ट की तस्दीक करता था। इसके बाद नंबरदार पार्षद की तस्दीक के आधार पर हस्ताक्षर कर रिपोर्ट संबंधित अधिकारी को भेज देता था। कई बार जाने-अनजाने वारिसान में किसी व्यक्ति का नाम छूट जाने पर पार्षद को इसकी भागदौड़ करनी पड़ती थी।

अब पार्षद केवल रिहायश की ही करेंगे रिपोर्ट
नगर परिषद के पार्षदों ने ज्ञापन सौंपकर वारिसान की तस्दीक की जिम्मेदारी से उन्हें अलग करने की मांग की थी। इसके बाद एसडीएम महेश कुमार ने तहसीलदार भिवानी को अपने कार्यालय में बुलाया। दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद तय किया गया कि वारिसान की तस्दीक अब नंबरदार करेंगे। एसडीएम ने स्पष्ट किया कि यह राजस्व विभाग से संबंधित कार्य है, इसलिए इसमें पार्षदों की भूमिका नहीं होगी। अब पार्षद अपने-अपने क्षेत्र के लोगों की रिहायश से संबंधित दस्तावेजों की ही रिपोर्ट कर सकेंगे।