Chandigarh Workers Protest: ओला, उबर और रैपिडोपै कार्रवाई से बाइक चालकों की बढ़ी मुश्किलें, किस्त चुकाना हुआ मुश्किल

चंडीगढ़ में ऐप आधारित बाइक टैक्सी पर रोक के बाद चालकों का प्रदर्शन। रोजी-रोटी और ईएमआई चुकाने को लेकर संकट।
 
app-based workers union Chandigarh

चंडीगढ़: शहर में ऐप आधारित बाइक टैक्सी सेवाओं पर रोक के बाद बाइक चालकों के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. काम बंद होने से परेशान ऐप बेस्ड वर्कर्स यूनियन से जुड़े चालकों ने अपनी बाइक की चाबियां एकत्रित कर प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपने का फैसला लिया है. उनका कहना है कि जब बाइक से कमाई का रास्ता ही बंद हो गया है तो हर महीने की किस्त और परिवार का खर्च कैसे चलाया जाए.

चंडीगढ़ में बाइक चालकों का प्रदर्शन: चालकों के मुताबिक ज्यादातर ने बाइक अपने काम के लिए खरीदी है और उसकी किस्त भी हर महीने भरनी पड़ती है. बाइक टैक्सी के जरिए होने वाली कमाई से ही घर का खर्च और EMI चलती थी. सेवाएं बंद होने के बाद आमदनी का यह जरिया अचानक खत्म हो गया है. ऐसे में उनके सामने यह चिंता बढ़ती जा रही है कि आने वाले महीनों में बाइक की किस्तें और रोजमर्रा का खर्च कैसे पूरा होगा.

बाइक चालकों के प्रशासन से सवाल: यूनियन प्रतिनिधियों का कहना है कि चालक प्रशासन के नियमों का पालन करते हुए काम करना चाहते हैं, लेकिन फिलहाल उन्हें काम करने का कोई रास्ता नहीं मिल रहा. उनका सवाल है कि अगर बाइक को व्यावसायिक काम में इस्तेमाल करने से रोक दिया गया है, तो उन वाहनों पर चल रही किस्तों की जिम्मेदारी कौन उठाएगा.

टैक्सी और बाइक सर्विस 6 महीने के लिए निलंबित: चंडीगढ़ प्रशासन ने इस साल अलग-अलग चरणों में Ola, inDrive, Uber और Rapido के एग्रीगेटर लाइसेंस छह महीने के लिए निलंबित किए हैं. Uber और Rapido पर कार्रवाई 8 सितंबर को हुई थी, जिसके बाद चारों प्रमुख ऐप आधारित प्लेटफॉर्म शहर में निलंबन के दायरे में आ गए. प्रशासन की कार्रवाई में निर्धारित किराया, चालक बीमा, प्रशिक्षण और अन्य नियमों के अनुपालन से जुड़े मुद्दे सामने आए थे.

प्रशासन से राहत की मांग: इस के बाद बाइक टैक्सी से जुड़े चालकों की परेशानी बढ़ गई है. यूनियन का कहना है कि चाबियां प्रशासन को सौंपने का फैसला किसी विरोध प्रदर्शन से ज्यादा अपनी आर्थिक स्थिति अधिकारियों तक पहुंचाने का तरीका है. चालक चाहते हैं कि प्रशासन उनके लिए ऐसा रास्ता निकाले, जिससे वे नियमों के दायरे में रहकर दोबारा काम शुरू कर सकें.चालकों ने प्रशासन से मामले में जल्द हस्तक्षेप करने और उनकी रोजी-रोटी से जुड़ी समस्या का समाधान निकालने की मांग की है.