DC Nishant Yadav Statement: कलेक्टर रेट बढ़ने से बढ़ा सरकारी राजस्व, शेयर वाइज प्रॉपर्टी मामले पर प्रशासन की सफाई
चंडीगढ़: शहर में कलेक्टर रेट बढ़ने के बाद प्रॉपर्टी बाजार में गतिविधियां धीमी पड़ने का असर अब रजिस्ट्री कार्यालयों पर भी दिखाई देने लगा है. खरीदारों के लिए संपत्ति की सरकारी कीमत बढ़ने से स्टांप ड्यूटी और अन्य शुल्क का बोझ बढ़ा है. इसके चलते कई लोगों ने प्रॉपर्टी खरीदने का फैसला फिलहाल टाल दिया है. वहीं, प्रशासन के अनुसार रजिस्ट्रियों की संख्या में बहुत बड़ी गिरावट नहीं आई है और कलेक्टर रेट बढ़ने से स्टांप ड्यूटी से मिलने वाला राजस्व बढ़ा है.
राजस्व में करीब 2 करोड़ की गिरावट: प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन से होने वाली आय में करीब 2 करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई है. पहले छह महीनों में रजिस्ट्रियों के जरिये करीब 6 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता था. कुछ अवधियों में यह आंकड़ा 13 करोड़ रुपये तक भी पहुंचा है. मौजूदा स्थिति में रजिस्ट्रेशन से होने वाली आय में कमी ने प्रशासन के राजस्व पर असर डाला है.
सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में भीड़ हुई आधी: कलेक्टर रेट बढ़ने का असर सब-रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचने वाले लोगों की संख्या पर भी नजर आ रहा है. पहले रोजाना करीब 50 से 60 लोग प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री कराने पहुंचते थे. अब यह संख्या घटकर करीब 20 से 25 रह गई है. यानी रजिस्ट्री कराने के लिए पहुंचने वाले लोगों की संख्या लगभग आधी रह गई है. इससे बाजार में खरीद-फरोख्त की गतिविधियां सुस्त पड़ने के संकेत मिल रहे हैं.
महंगी हुई प्रॉपर्टी तो खरीदारों ने टाला फैसला: प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स के मुताबिक कलेक्टर रेट बढ़ने के बाद शहर में जमीन और मकान खरीदना पहले की तुलना में महंगा हो गया है. इसका असर खासकर उन खरीदारों पर पड़ा है, जो सीमित बजट में संपत्ति खरीदने की योजना बना रहे थे. कई लोगों ने खरीद का फैसला आगे के लिए टाल दिया है. वहीं, कुछ खरीदार चंडीगढ़ के बजाय मोहाली और आसपास के इलाकों में विकल्प तलाश रहे हैं.
स्टांप ड्यूटी बढ़ने से बढ़ा खर्च: कलेक्टर रेट बढ़ने के साथ रजिस्ट्री के समय संपत्ति की सरकारी कीमत भी बढ़ जाती है. इसी आधार पर स्टांप ड्यूटी और अन्य संबंधित शुल्क की राशि बढ़ सकती है. ऐसे में खरीदारों को संपत्ति की कीमत के अलावा रजिस्ट्रेशन पर भी अधिक रकम खर्च करनी पड़ रही है. यही वजह है कि खरीदार अब चंडीगढ़ में सौदा करने से पहले मोहाली और आसपास के क्षेत्रों में उपलब्ध संपत्तियों और उनकी कीमतों से तुलना कर रहे हैं.
रजिस्ट्रियों की संख्या लगभग पहले जैसी: शहरी संपत्तियों और एस्टेट के प्रबंधन का अतिरिक्त चार्ज संभाल रहे डिप्टी कमिश्नर निशांत यादव ने कहा कि, "कलेक्टर रेट और वास्तविक मार्केट रेट के बीच पहले काफी अंतर था. प्रॉपर्टी का वास्तविक लेन-देन अधिक कीमत पर होता था, जबकि रजिस्ट्री अपेक्षाकृत कम कलेक्टर रेट पर दर्ज होती थी. इसी अंतर को कम करने के उद्देश्य से कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी की गई. रजिस्ट्रेशन की संख्या देखें तो यह लगभग पहले जितनी ही है."
स्टांप ड्यूटी से राजस्व दोगुने से ज्यादा: निशांत यादव ने आगे कहा कि, "कलेक्टर रेट बढ़ने के बाद स्टांप ड्यूटी से मिलने वाला सरकारी राजस्व दोगुने से भी अधिक हो गया है. कलेक्टर रेट को मार्केट रेट के करीब लाने से सरकार को निर्धारित स्टांप ड्यूटी और अन्य शुल्क सही तरीके से मिल रहे हैं. इससे संपत्ति के लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ सकती है और नकद लेन-देन को कम करने में भी मदद मिलेगी. लोगों को प्रॉपर्टी खरीदने से घबराने की जरूरत नहीं है. पहले भी संपत्ति का वास्तविक लेन-देन मार्केट रेट पर ही होता था, लेकिन रजिस्ट्री कम राशि पर दर्ज होती थी. अब रजिस्ट्री की राशि को मार्केट रेट के करीब लाया गया है, जिसके कारण खरीदारों को स्टांप ड्यूटी के रूप में कुछ अधिक भुगतान करना पड़ सकता है. ये वास्तविक बाजार मूल्य और सरकारी रिकॉर्ड के बीच अंतर कम करने की प्रक्रिया है."
शेयर वाइज प्रॉपर्टी पर समाधान अभी दूर: शेयर वाइज प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त को लेकर लंबे समय से चली आ रही समस्या पर भी प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की. निशांत यादव ने बताया कि, "मामला कानूनी स्तर पर जटिल है. सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2023 में शेयर वाइज प्रॉपर्टी की बिक्री पर रोक लगाई थी और इसके लिए कई शर्तें निर्धारित की थीं. प्रशासन इस मुद्दे को अलग-अलग स्तरों और मंचों पर उठा रहा है, लेकिन अभी तक निर्णायक समाधान नहीं निकला है. शेयर वाइज प्रॉपर्टी के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करना जरूरी है. जैसे ही इस मामले में कोई कानूनी रास्ता निकलता है, ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश की जाएगी, जिससे अदालत के निर्देशों का पालन भी हो और प्रभावित लोगों की मांगों का समाधान भी किया जा सके. फिलहाल इस मुद्दे पर अंतिम समाधान का इंतजार है."
बता दें कि एक तरफ प्रॉपर्टी कारोबारियों और खरीदारों के बीच कलेक्टर रेट बढ़ने से बढ़े खर्च को लेकर चिंता है, वहीं प्रशासन इसे मार्केट रेट और सरकारी मूल्य के बीच अंतर कम करने की कवायद बता रहा है. खरीदारों की संख्या में कमी और कार्यालयों में घटती भीड़ बाजार की गतिविधियों में नरमी की ओर संकेत करती है, जबकि प्रशासन के अनुसार रजिस्ट्रियों की संख्या लगभग पहले जैसी बनी हुई है और स्टांप ड्यूटी से राजस्व में वृद्धि हुई है.