Chandigarh Heritage Conservation Committee: मास्टर प्लान 2031 ड्राफ्ट को मंजूरी के बाद विवाद, आरटीआई एक्टिविस्ट ने उठाए गंभीर सवाल

मास्टर प्लान संशोधन पर RTI से बड़ा खुलासा। पब्लिक हियरिंग में शामिल 80% लोगों ने बदलावों पर जताई आपत्ति।
 
RK Garg RTI

पंचकूला: चंडीगढ़ प्रशासन की हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी ने बीते शुक्रवार को मीटिंग कर "मास्टर प्लान 2031" में प्रस्तावित पहले संशोधन का हरी झंडी दे दी. लेकिन चीफ सेक्रेट्री एच. राजेश प्रसाद की अध्यक्षता में जन-सुनवाई (पब्लिक हेयरिंग) के आधार पर जो ड्राफ्ट तैयार किया गया, अब उस पर सवाल खड़े होने लगे हैं. क्योंकि कमेटी द्वारा पब्लिक हेयरिंग कर शहरवासियों से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई थी.

आरटीआई से खुलासा हुआ है कि पब्लिक हेयरिंग में काफी कम लोग शामिल हुए. लेकिन जितने लोग शामिल हुए भी, उनमें से करीब 80 प्रतिशत लोगों ने किए जाने वाले बदलावों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं. बावजूद इसके कमेटी द्वारा ड्राफ्ट तैयार कर उसे मंजूरी दे दी गई है.

आरटीआई में हुआ खुलासा: चंडीगढ़ निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट, राम कुमार (आरके) गर्ग ने आरटीआई के माध्यम से "मास्टर प्लान 2031" के अनुसार पब्लिक हेयरिंग के दौरान शहरवासियों द्वारा दर्ज कराई गई आपत्तियों और सुझावों की जानकारी हासिल की. ईटीवी भारत से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि, "प्राप्त जवाबों के अनुसार केवल 181 लोगों/शहरवासियों ने ही आपत्तियां दर्ज करवाई तो कुछ ने सुझाव भी दिए. इसके बाद अर्बन प्लानिंग विभाग द्वारा इन लोगों को स्क्रीनिंग कमेटी से मिलने को बुलाया गया. लेकिन केवल 68 लोग ही पहुंचे और दस लोग बिना बुलाए भी पहुंच गए थे. आगे जानिए- किस बदलाव के लिए कितनी आपत्तियां आईं और कितने लोगों का समर्थन मिला."

  • रेजिडेंशियल खंड: इसमें बदलाव के लिए अधिकांश लोगों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई. विरोध दर्ज कराने वाले लोगों की कुल संख्या 57 है, जबकि केवल 8 लोगों ने ही समर्थन किया.
  • कमर्शियल एवं मिक्स लैंड यूज: इसके पक्ष में केवल पांच लोग आए, जबकि 16 लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई, यानी कि उन्होंने संभावित बदलाव को सही नहीं ठहराया.
  • इंडस्ट्रियल खंड: इसमें संभावित बदलाव के लिए केवल 15 लोग पक्ष में खड़े हुए. जबकि इसके कई गुणा अधिक, करीब 162 लोगों ने दर्शाए गए संभावित बदलाव को सही नहीं माना, यानी कि इसका विरोध किया.
  • मनीमाजरा (सेक्टर-13) के ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी के संभावित बदलाव का भी एक व्यक्ति ने ही समर्थन किया और नौ लोगों ने असहमति प्रकट की.
  • संस्थागत (इंस्टीट्यूशनल) एरिया के दर्शाए गए संभावित बदलाव के समर्थन में केवल दो लोग रहे. जबकि 17 लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई.

137 लोगों के अभ्यावेदन बाहर: आरटीआई एक्टिविस्ट आरके गर्ग ने आगे बताया कि, " "मास्टर प्लान 2031" से संबंधित प्रक्रिया के दौरान स्क्रीनिंग कमेटी ने अपनी समीक्षा के दौरान 137 लोगों के अभ्यावेदन ही बाहर कर दिए. इसका मतलब यह है कि करीब 182 लोगों में से 137 लोगों के अभ्यावेदनों (रिप्रेजेंटेशन) को स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा उचित ही नहीं माना गया. जब शहरवासी चंडीगढ़ प्रशासन के "मास्टर प्लान 2031" के अनुसार संभावित बदलाव से सहमत ही नहीं हैं तो फिर निराधार ड्राफ्ट तैयार करने का कोई मतलब नहीं बनता. चंडीगढ़ प्रशासन को जन-सुनवाई का ध्यान रखते हुए इस मामले पर पुन: विचार करना चाहिए. जरूरत पड़ने पर वह पंजाब के गवर्नर एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से मामले पर संज्ञान लेने की प्रार्थना भी करेंगे."

समय पर सूचना देने से बचा विभाग: आरके गर्ग ने बताया कि, "मामले के संबंध में उन्होंने आरटीआई फाइल की लेकिन विभाग द्वारा उन्हें समय से जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई. एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट उन्हें समय से नहीं दी गई और कमेटी की मिनट्स की रिपोर्ट तो अब तक भी प्राप्त नहीं हुई है. एक रिपोर्ट की जानकारी उन्होंने अगस्त में ही मांग ली थी. लेकिन हेरिटेज कमेटी द्वारा उन्हें समय पर जानकारी देने के बजाय मीटिंग में मसौदा पास करने के बाद 18 सितंबर को जानकारी दी गई. इससे स्पष्ट है कि चंडीगढ़ हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी, स्क्रीनिंग कमेटी को यह आभास था कि यदि रिपोर्ट पहले सार्वजनिक हो गई तो लोगों द्वारा बड़ी संख्या में आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है."

फेज के अनुसार क्या बदलाव होगा:

  • फेज-1: (सेक्टर 1 से 30) तक पूरी तरह सुरक्षित रहेगा. यहां शहर की असल सूरत, हेरिटेज को सुरक्षित रखा जाएगा, यानी कि इन सेक्टरों में कोई बदलाव नहीं होगा.
  • फेज-2: (सेक्टर-31 से 47) तक में हेरिटेज कैरेक्टर और प्लानिंग को संतुलित बनाए रखने के लिए इन सेक्टरों में स्टिल्ट पार्किंग की अनुमति केवल नए बनने वाले सरकारी फ्लैट्स को ही होगी.
  • फेज-3: (सेक्टर-48 और उससे आगे) के सेक्टरों में अधिक ऊंचाई और अधिक एफएआर के साथ बहुमंजिला बिल्डिंग्स के पहलू पर पब्लिक हियरिंग में अधिक आपत्तियां आई. इस कारण इस प्रावधान को लागू करने से पहले मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर की स्टडी कराई जाएगी.