चंडीगढ़ मंडी का कायाकल्प: 40 साल बाद बदली तस्वीर, हाई कोर्ट का 3 महीने का अल्टीमेटम

चंडीगढ़ सेक्टर-26 मंडी में गंदगी और जाम से राहत। पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने बुनियादी सुधारों के लिए प्रशासन को दिए 3 महीने और ₹13.59 करोड़। जानें पूरी रिपोर्ट।

 
सेक्टर 26 मंडी पार्किंग समस्या

चंडीगढ़: चंडीगढ़ स्थित ट्राईसिटी की सबसे बड़ी फल एवं सब्जी मंडी की तस्वीर अब पूरी तरह बदली हुई है. करीब चार दशकों से भी अधिक समय से इस सब्जी एवं फल मंडी में गंदगी, भारी जाम, कूड़ा-करकट, गंदगी समेत अनेकों परेशानियां बनी हुई थी. लेकिन बीते समय पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया के इस मंडी में दौरे के बाद प्रशासन ने हरकत में आया और कार्रवाई की गई.

नतीजतन अब मंडी की तस्वीर ऐसी बदली है, जैसी चालीस साल से कभी नहीं देखी गई. वहीं, अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की नजर भी इस मंडी पर है. ऐसे में मार्केट कमेटी, नगर निगम और प्रशासन भी कोई कोताही करने से गुरेज कर रहा है. हालांकि, मंडी की बदली व्यवस्था से सब्जी और फल के छोटे दुकानदार प्रभावित भी हुए हैं.

सुबह 7 से रात 8 बजे तक परेशानी नहीं: मंडी में रेहड़ी-फड़ी और ठेले लगाने समेत जमीन पर यहां-वहां बैठकर सब्जी और फल बेचने वालों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है. यह सभी छोटे दुकानदार अब मंडी में टीन और पक्के शैड के नीचे बैठ रहे हैं, जबकि बड़े थोक विक्रेता और आढ़ती अपने शोरूम में बैठे हैं. इस व्यवस्था परिवर्तन का कारण दुकानदारों का दशकों से बेतरतीब मुख्य सड़क पर बैठकर सब्जी-फल बेचना, भीड़-भाड़ करना, गंदगी फैलाना और जाम लगाना है. इससे सब्जी-फल और अन्य सामान की खरीदारी करने के लिए मंडी आने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था. नतीजतन नए व्यवस्था परिवर्तन से मंडी में सुबह 7 बजे से लेकर रात 8 बजे तक कोई भी दुकानदार मुख्य सड़कों पर यहां-वहां बैठकर सब्जी नहीं बेच पा रहा और न ही अवैध तरीके से रेहड़ी-फड़ी लगा पा रहा है. यदि कोई दुकानदार ऐसा करता है तो प्रशासन और मार्केट कमेटी के कर्मचारी उनका सामान जब्त करने के अलावा चालान की कार्रवाई भी करते हैं. सीसीटीवी कैमरों की मदद से भी पूरी मंडी पर निगरानी रखी जा रही है.

बूथ और शोरूम मालिकों ने बाहर रखा सामान:यूटी प्रशासन द्वारा मंडी में रेहड़ी-फड़ी, नीचे बैठकर सब्जी-फल बेचने वालों और छोटे दुकानदारों को तो हटा दिया गया है. लेकिन बड़े दुकानदारों, थोक कारोबारियों और आढ़तियों ने अभी भी सामान व फलों को अपने-अपने बूथों और शोरूम के बाहर सड़कों तक बने खाली सरकारी जगह (थड़ों) पर रखा हुआ है. पूरा दिन इन जगहों पर फलों और अन्य सामान को रखकर बेचा जा रहा है. अचरज यह है कि यह हाल मंडी में मौजूद मार्केट कमेटी के कार्यालय के सामने बने बूथों से लेकर आढ़तियों/बड़े दुकानदारों के सभी शोरूम के बाहर का है.

पूर्व आईजीपी किरण बेदी की कार्रवाई:पुडुचेरी की पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर (एलजी) एवं देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी, डॉ. किरण बेदी ने वर्ष 1999 में चंडीगढ़ के आईजीपी के पद पर रहते हुए इन बूथों और शोरूमों के बाहर की सरकारी जगहों को भी खाली कराया था. उन्होंने न केवल सेक्टर-26 की मंडी, बल्कि चंडीगढ़ की सभी मार्केटों में शोरूमों और दुकानों के बाहर रखे सामान को भी अंदर करवाया था. लेकिन चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा डॉ. किरण बेदी को महज एक महीने के सेवा काल के बाद ही चंडीगढ़ के गृह सचिव के साथ उपजे विवाद के कारण चंडीगढ़ पुलिस विभाग से रिलीव/स्थानांतरित कर दिया गया था. वर्ष 2007 में आईपीएस किरण बेदी ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी.

हाईकोर्ट से तीन महीने का समय मिला:मंडी की अंदरूनी सड़कों, पार्किंग और बुनियादी ढांचे की बदहाल स्थिति पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने भी संज्ञान लिया है. हाईकोर्ट ने कहा है कि अब सड़कों की मरम्मत व उन्नयन योजना की अदालत निगरानी करेगी. मूलभूत सुविधाओं के लिए हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को टाइम बाउंड करते हुए तीन महीने का समय दिया है. वहीं, चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा हाईकोर्ट में उक्त कार्यों के लिए 13.59 करोड़ रुपये मंजूर किए जाने की जानकारी दी. यूटी प्रशासन की ओर से कोर्ट में शपथ पत्र दाखिल करते हुए बताया गया कि पूर्व आदेशों के अनुपालन में 24 अप्रैल 2026 को सचिव, स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड द्वारा सेक्टर-26 मंडी क्षेत्र की आंतरिक सड़कों, पार्किंग और संबंधित संरचनात्मक सुधार कार्यों के लिए उक्त धनराशि को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है. हाईकोर्ट ने मंडी में लंबे समय से लंबित मरम्मत, पुनर्स्थापन और उन्नयन कार्यों को गंभीर सार्वजनिक सुविधा का विषय माना और चंडीगढ़ प्रशासन को तीन महीने के भीतर सभी कार्यों को पूरा करने के निर्देश दिए हैं.

टूटी सड़कें, गंदगी और पार्किंग की समस्या:नए व्यवस्था परिवर्तन से सब्जी एवं फल मंडी के हालात बदते तो जरूर हैं. लेकिन अभी भी मंडी की आंतरिक और सेक्टर-26 पुलिस लाइन के गेट नंबर-1 के सामने की मुख्य सड़क लंबे समय से टूटी हुई हैं. मंडी के अंदर अभी भी कई जगहों पर कूड़ा-करकट और गंदगी पसरी है. इसके अलावा सभी लोग मंडी की अंदरूनी सड़कों पर आसानी से आना-जाना तो कर रहे हैं. लेकिन बड़े ट्रक और अन्य वाहन अभी भी सभी सड़कों पर यहां-वहां खड़े दिखाई दिए. वाहनों के लिए कोई स्थाई व्यवस्था नहीं की गई है. जबकि पुलिस लाइन के गेट नंबर-2 के सामने मंडी में वाहनों के लिए पार्किंग बनाई तो गई है. लेकिन यहां वाहन पार्क करने के बजाय ट्रक और अन्य वाहन पूरा दिन मंडी के अंदर की सड़कों और अन्य जगहों पर खड़े दिखाई दे रहे हैं. वहीं, मंडी में पार्किंग के व्यापक बंदोबस्त के लिए अतिरिक्त पार्किंग बनाए जाने की भी दरकार है. क्योंकि पहले से जो एक पार्किंग स्थल है, वह भी चंद बड़े ट्रक पार्क होने पर भर जाता है. नतीजतन ट्रक ड्राइवर और अन्य लोग अपने वाहनों के मंडी के अंदर ले जाते हैं.