Ambulance Scam 5 Days Investigation Report: मोर्चरी और वर्कशॉप में खड़ी गाड़ियों के नाम पर डीजल खरीद का मामला, मचा हड़कंप

फरीदाबाद के बीके सिविल अस्पताल में 50 लाख के डीजल घोटाले की जांच के लिए एनएचएम डायरेक्टर ने 5 दिन में रिपोर्ट मांगी है। विपक्षी नेताओं ने भी सरकार पर साधा निशाना।
 
Ambulance Fuel Card Scam Faridabad

हरियाणा के फरीदाबाद स्थित बीके सिविल अस्पताल में मोर्चरी और वर्कशॉप में महीनों से खड़ी चार एंबुलेंसों के नाम पर करीब 50 लाख रुपये का डीजल खरीदे जाने के सनसनीखेज मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर वित्तीय फर्जीवाड़े के उजागर होने के बाद नेशनल रूरल हेल्थ मिशन (NHM) के डायरेक्टर जनरल डॉ. वीरेंदर यादव ने खुद फरीदाबाद पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी को 5 दिन के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। सिविल सर्जन और स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट सामने आते ही इस भ्रष्टाचार में संलिप्त पाए जाने वाले सभी दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

📱 विपक्षी नेताओं का सरकार पर तीखा हमला: दुष्यंत चौटाला और पवन खेड़ा ने उठाए बड़े सवाल

घोटाले के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में मचा हड़कंप:

  • सोशल मीडिया पर वार: इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद हरियाणा के पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला और कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है।

  • तंज और सवाल: नेताओं ने अपनी पोस्ट में लिखा कि नायब सरकार में किस तरह का 'अजब खेल' चल रहा है, जहाँ अस्पताल में खड़ी एंबुलेंस भी कागजों पर 50 लाख रुपये का डीजल फूंक रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रदेश के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में रोजाना ऐसे कितने घोटाले होते होंगे, जहाँ छोटे-मोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाकर बड़े अधिकारियों और जिम्मेदारों को बचाने की कोशिश की जा रही है।

🔍 पंचकूला मुख्यालय की जांच में हुआ खुलासा; बिना चले खर्च होता रहा सरकारी ईंधन

विभाग की अंदरूनी पड़ताल और गड़बड़ी का पैटर्न:

  • मुख्यालय स्तर पर समीक्षा: स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुछ महीने पहले पंचकूला स्थित एनएचएम मुख्यालय द्वारा एंबुलेंसों के फ्यूल कार्ड (Fuel Card) के माध्यम से होने वाले वित्तीय लेनदेन की ऑनलाइन समीक्षा की गई थी।

  • नियमित फर्जीवाड़ा: इस दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि कुछ एंबुलेंस बिना सड़क पर चले ही लगातार पेट्रोल पंपों से डीजल खरीद रही थीं। यह सिलसिला एक-दो बार का नहीं, बल्कि लंबे समय से बेखौफ जारी था।

  • 50 लाख का अंदेशा: शुरुआती वित्तीय जांच में लगभग 50 लाख रुपये का ईंधन फर्जी तरीके से खरीदे जाने का पुख्ता अंदेशा जताया गया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस समयावधि के दौरान इन गाड़ियों के नाम पर डीजल की पर्चियां कटती रहीं, उस दौरान वे एंबुलेंस अपनी निर्धारित जगह से टस से मस नहीं हुई थीं।

🚗 किन चार एंबुलेंसों के फ्यूल कार्ड से दर्ज हुई डीजल की फर्जी एंट्रियां?

विभाग द्वारा चिन्हित की गई गाड़ियां और उनकी वास्तविक स्थिति:

  • HR38GV3491 और HR38GV9863: नंबर की दो एंबुलेंस पिछले तीन से चार महीनों से बीके अस्पताल की मोर्चरी के पास लावारिस हालत में खड़ी थीं। इसके बावजूद 11 अक्टूबर तक इनके फ्यूल कार्ड से नियमित रूप से डीजल भरवाने की फर्जी एंट्रियां दर्ज पाई गईं।

  • HR38Z0951 और HR38GV1670: नंबर की अन्य दो एंबुलेंस क्रमशः जनवरी और अगस्त माह से अधिकृत एजेंसी की वर्कशॉप में मरम्मत के लिए खड़ी थीं। इसके बावजूद इनके फ्यूल कार्ड से भी 16 सितंबर और 11 अक्टूबर तक डीजल का रिकॉर्ड धड़ल्ले से चलता रहा।