Cancer Genetic Risk Study: उत्तर भारत के अध्ययन में सामने आए अहम आंकड़े, क्या परिवार में कैंसर होने पर सबको है जांच की जरूरत?
कैंसर के वंशानुगत जोखिम और जेनेटिक जांच पर उत्तर भारत का नया अध्ययन। अमृता अस्पताल के विशेषज्ञों से जानिए परिवार में कैंसर होने पर क्या करें।
फरीदाबाद। कैंसर का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर पैदा होना स्वाभाविक है, खासकर तब जब परिवार में पहले किसी सदस्य को यह बीमारी रह चुकी हो। ऐसे में कैंसर के संभावित वंशानुगत जोखिम को समझना और समय रहते विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। उत्तर भारत में कैंसर से प्रभावित परिवारों पर किए गए एक हालिया अध्ययन में सामने आया है कि करीब 30 प्रतिशत मामलों में कैंसर के बढ़े हुए वंशानुगत जोखिम से जुड़े आनुवंशिक बदलाव पाए गए हैं। हालांकि, इसका यह कतई अर्थ नहीं है कि संबंधित परिवार के हर सदस्य को कैंसर होगा, बल्कि यह शोध संभावित जोखिम को समय पर पहचानने में मदद करता है।
🩺 अमृता अस्पताल के विशेषज्ञों की राय: परिवार में कैंसर होने पर हर किसी को महंगी जेनेटिक जांच की जरूरत नहीं
अमृता अस्पताल की गाइनेकोलॉजिकल ऑन्कोलॉजी की प्रोग्राम हेड डॉ. नेहा कुमार और स्तन कैंसर विशेषज्ञ डॉ. शिवेता राजदान ने इस विषय पर विस्तृत जानकारी साझा की है। विशेषज्ञों का कहना है कि परिवार में किसी सदस्य को कैंसर होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि सभी रिश्तेदारों को तुरंत महंगी जेनेटिक जांच करवानी चाहिए। सबसे पहले परिवार के मेडिकल इतिहास, मरीज की उम्र और बीमारी के प्रकार को समझना जरूरी होता है। स्तन कैंसर के मामलों में BRCA1 और BRCA2 जीन में होने वाले बदलाव जोखिम को बढ़ा सकते हैं, लेकिन इसकी पुष्टि और आगे की स्क्रीनिंग हमेशा डॉक्टर की सलाह के बाद ही तय की जानी चाहिए।
⚠️ घबराने के बजाय सही जानकारी और समय पर स्क्रीनिंग है बचाव की कुंजी: लक्षणों को न करें नजरअंदाज
डॉक्टरों का मानना है कि केवल डर या महंगे खर्च के डर से विशेषज्ञ की सलाह टालना सही नहीं है। यदि परिवार में कम उम्र में कैंसर के मामले आए हों, तो जेनेटिक काउंसलिंग के जरिए सही दिशा तय की जा सकती है। शरीर में कोई भी असामान्य बदलाव या गांठ दिखाई देने पर उसे बिल्कुल नजरअंदाज न करें और तुरंत चिकित्सीय परामर्श लें। समय पर पहचान, उचित जानकारी और नियमित निगरानी से कैंसर के संभावित जोखिम को बेहतर तरीके से प्रबंधित किया जा सकता है।