फरीदाबाद: पहली ही बारिश में शहर बना तालाब, जलभराव से डूबे प्रशासन के दावे

फरीदाबाद में पहली बारिश से शहर की रफ्तार थमी। करोड़ों खर्च के दावों के बीच जलभराव से लोग बेहाल, टूटी सड़कें और ठप ट्रैफिक। जानें पूरी खबर और अपडेट।

 
मानसून की पहली बारिश

फरीदाबाद: फरीदाबाद में मानसून की पहली तेज बारिश ने नगर निगम और प्रशासन की तैयारियों की हकीकत सामने ला दी. नालों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था और जलभराव रोकने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावों के बावजूद शहर के अधिकांश हिस्से पानी में डूब गए. मुख्य सड़कें, सेक्टर और कॉलोनियां जलमग्न हो गईं, जिससे लोगों को घरों से निकलने तक में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. पहली ही बारिश में शहर की व्यवस्थाएं चरमराने से प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े हो गए.

जलभराव से थमी शहर की रफ्तार: लगातार दो दिनों से हो रही बारिश के कारण फरीदाबाद की रफ्तार पूरी तरह प्रभावित हो गई. कई प्रमुख मार्गों पर भारी जलभराव के कारण लंबा ट्रैफिक जाम लगा रहा, जबकि निचले इलाकों में कई फीट तक पानी भरने से लोगों का आवागमन बाधित हो गया. कई कॉलोनियों में लोग घरों में ही कैद होकर रह गए. सड़कों पर पानी भरने से वाहन चालकों और पैदल यात्रियों दोनों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा.

लोगों में बढ़ा प्रशासन के प्रति आक्रोश: बातचीत के दौरान स्थानीय निवासी राजपाल ने  प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि, "नेता और मंत्री चुनाव के समय वोट मांगने आते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही जनता को उसके हाल पर छोड़ देते हैं. अभी तो बारिश की शुरुआत हुई है और हालात इतने खराब हैं. अगर यही स्थिति रही तो आगे क्या होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है." वहीं, एक अन्य स्थानीय ने कहा कि, "हर साल मानसून में यही हालात बनते हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जाता."

हर साल ऐसे ही रहते हैं हालात: स्थानीय निवासी जगदेव ने कहा कि, "मैं कई वर्षों से यहां रह रहा हूं और हर साल बारिश में यही तस्वीर देखने को मिलती है. हर बार प्रशासन दावे करता है, लेकिन जमीन पर कोई सुधार नहीं दिखता. अभी से घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है. सड़कें पानी में डूबी हुई हैं और किसी अधिकारी का जनता की परेशानियों की ओर ध्यान नहीं है. अगर यही स्थिति बनी रही तो मजबूर होकर हमें अपना घर बेचकर यहां से जाना पड़ेगा. जल निकासी व्यवस्था में सुधार के दावे केवल कागजों तक सीमित दिखाई देते हैं."

सड़कें टूटीं, हादसों का बढ़ा खतरा: बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं. खेड़ी पुल स्थित पुल का एक हिस्सा भरभराकर गिर गया. यह पुल करीब तीन वर्ष पहले ही बनाया गया था, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं. वहीं, सड़कों पर बने गड्ढे पानी में छिप जाने से कई बाइक सवार और पैदल यात्री हादसों का शिकार हुए. कई वाहन भी जलभराव में फंस गए, जिससे लोगों को घंटों तक परेशान होना पड़ा.

करोड़ों खर्च के बाद भी उठ रहे बड़े सवाल: हर वर्ष मानसून से पहले जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने और नालों की सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली ही तेज बारिश में पूरा शहर जलमग्न हो गया. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह धनराशि कहां खर्च हुई. शहरवासियों का कहना है कि अस्थायी उपायों के बजाय स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि हर मानसून में लोगों को जलभराव और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं का सामना न करना पड़े.