ईशरवाल के अमरजीत का कमाल: चने के एक पौधे पर 1500 फलियां, CM करेंगे सम्मानित!

लाखों की दुकान छोड़ किसान बने अमरजीत ने जैविक खेती से बदली किस्मत। चने के एक पौधे पर 1500+ फलियां और ₹1 लाख महीना कमाई। जानें गोकृपा अमृत और ड्रिप सिस्टम का मॉडल।

 
Success Story of Haryana Farmer

तोशाम। लोगों के तानों को सकारात्मक रूप में लेकर जिले के गांव ईशरवाल निवासी किसान अमरजीत ने जैविक खेती से नई पहचान बनाई है। इलेक्ट्रॉनिक की लाखों रुपये की दुकान बंद कर खेती अपनाने वाले अमरजीत ने चने की ऐसी किस्म विकसित की है जिसमें एक पौधे पर 1500 से अधिक फलियां लग रही हैं और उनकी औसत आमदनी एक लाख रुपये प्रतिमाह से अधिक हो गई है।

किसान अमरजीत को उनकी उपलब्धियों के लिए आज चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सैनी सम्मानित करेंगे। अमरजीत की जैविक खेती को देखने के लिए किसान, कृषि अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता से लेकर सांसद तक पहुंच चुके हैं। सांसद धर्मबीर सिंह स्वयं उनके खेत में पहुंचे और खेती की सराहना की। उनके खेत में लगे चने के एक पौधे पर 1500 से अधिक फलियां लगी हैं जो सामान्य पौधों की तुलना में 10 से 15 गुना अधिक हैं।

अमरजीत ने अपने खेत में आधा एकड़ में जैविक चना और सरसों की खेती की है। इसके लिए उन्होंने तीन किलोग्राम चना और 100 ग्राम सरसों की बुवाई की थी। इस भूमि से उन्हें 12.35 क्विंटल सरसों की पैदावार हुई है। वहीं चने के लिए 200 रुपये प्रति किलो के ऑर्डर मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि आधा एकड़ से उन्हें करीब एक लाख रुपये चना और करीब दो लाख रुपये सरसों से आमदनी होगी। वे चना और सरसों के अलावा अन्य फसलों की भी जैविक खेती कर रहे हैं।

जैविक खाद और ड्रिप सिस्टम से कर रहे हैं खेती

किसान अमरजीत ने बताया कि वे अपने खेत में जैविक खेती का प्रयोग कर रहे हैं जिसमें जीवाणु खाद ‘गोकृपा अमृत’ मुख्य है। उन्होंने खेत में गोबर गैस प्लांट भी लगाया हुआ है जिससे निकलने वाली गैस का उपयोग रसोई में कर रहे हैं और घरेलू गैस सिलिंडर के खर्च में बचत हो रही है। साथ ही प्लांट से निकलने वाले तरल गोबर का उपयोग फसल में किया जा रहा है जिससे पैदावार बढ़ रही है। वे किसी भी प्रकार के कीटनाशक, उर्वरक या स्प्रे का प्रयोग नहीं करते। इसके अलावा उन्होंने एक लाख 10 हजार रुपये की लागत से सोलर सिस्टम लगाया है जिससे बिजली बिल का खर्च बच रहा है। खेत में सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम लगाया गया है, जिससे 90 प्रतिशत जल संरक्षण हो रहा है।

लोगों ने दी खुद करके दिखाने की चुनौती दी

अमरजीत के पास सात एकड़ पुश्तैनी जमीन है जिस पर उन्होंने अगस्त 2019 में जैविक खेती शुरू की। उन्होंने बताया कि पहले उनकी गांव में इलेक्ट्रॉनिक की दुकान थी और वे लोगों को जैविक खेती के प्रति जागरूक करते थे। इस दौरान लोगों ने ताने दिए कि जैविक खेती से अच्छी उपज नहीं ली जा सकती और खुद करके दिखाने की चुनौती दी। इन तानों से प्रेरित होकर उन्होंने अगस्त 2019 में जैविक खेती शुरू की। शुरुआत में अमरूद का बाग लगाया और पौधों के बीच गोभी की फसल उगाई। उनकी गोभी का एक फूल करीब सात किलोग्राम तक का निकला जिससे उन्हें पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार जैविक खेती में जुट गए। वर्तमान में उनके खेत में अमरूद, बेरी, मोरेंगा, मौसमी, किन्नू, आड़ू, जामुन सहित कई फलदार पेड़ लगे हैं। इसके अलावा वे बेल वाली सब्जियां जैसे घीया, तौरी, पेठा, तरबूज और तरकाकड़ी भी उगा रहे हैं।

सोशल मीडिया और कार्यशालाओं के माध्यम से दे रहे प्रशिक्षण

अमरजीत जैविक खेती में विशेष पहचान बना चुके हैं। दूरदराज के किसान उनके पास जैविक खेती और खाद बनाने की विधि सीखने के लिए पहुंच रहे हैं। वे अपने खेत और आसपास के क्षेत्र में प्रशिक्षण शिविर आयोजित कर किसानों को जानकारी दे रहे हैं। इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो साझा कर भी वे खेती के तरीके बता रहे हैं। उनके प्रशिक्षण से ईशरवाल और आसपास के गांवों में भी किसान जैविक खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

दूब घास से भी कमा रहे लाखों की आमदनी

अमरजीत ने बताया कि जो दूब घास किसानों के लिए समस्या मानी जाती है उससे भी वे आय अर्जित कर रहे हैं। पिछले वर्ष उन्होंने दूब घास से करीब तीन लाख रुपये की कमाई की। वे दूब घास को सुखाकर उसका पाउडर बनाकर बेचते हैं। इसके अलावा अमरूद के फल के बजाय पेड़ों के पत्तों को सुखाकर उनका पाउडर बनाकर बेच रहे हैं। उन्होंने एक एकड़ में मोरेंगा की खेती की हुई है जिसका पाउडर और टैबलेट बनाकर बेचते हैं। इससे उन्हें सालाना पांच से छह लाख रुपये तक की आमदनी हो रही है।