Manimajra and Sector 22 Hospital News: रेडियोलॉजिस्ट की कमी के चलते सरकारी अस्पतालों में नहीं हो रहे अल्ट्रासाउंड, जानें वजह
पंचकूला: सरकारी अस्पतालों में मरीजों को इलाज के लिए अकसर कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. लेकिन आज आप जानेंगे कि जिला पंचकूला से लेकर चंडीगढ़ तक के किन सरकारी अस्पतालों में मरीजों को अल्ट्रासांउड सुविधा नहीं मिल पा रही और इसके कारण क्या हैं. यह परेशानी कुछ समय से ही नहीं, बल्कि किसी अस्पताल में एक वर्ष तो किसी अस्पताल में तीन वर्षों से अधिक समय से बनी हुई है. नतीजतन सरकारी अस्पतालों के ओपीडी मरीजों को अधिक पैसे खर्च कर प्राइवेट लैब से अल्ट्रासाउंड कराने पड़ रहे हैं या फिर चैरिटेबल ट्रस्ट से जाते हैं. लेकिन चंडीगढ़ प्रशासन का स्वास्थ्य विभाग और जिला पंचकूला का स्वास्थ्य विभाग इस समस्या को दूर नहीं कर पा रहा है.
मनीमाजरा अस्पताल की स्थिति: चंडीगढ़ स्थित मनीमाजरा (सेक्टर-13) स्थित अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा न तो ओपीडी के मरीजों को मिल रही है और न ही गर्भवती महिलाओं को. हैरत की बात यह है कि अस्पताल के पास अपनी अल्ट्रासाउंड मशीन होने के बावजूद मरीजों को प्राइवेट लैब में जाना पड़ रहा है. क्योंकि अस्पताल में बीते करीब एक वर्ष से कोई रेडियोलॉजिस्ट ही नहीं है. एक वर्ष पूर्व एक ट्रस्ट के माध्यम से मरीजों को अल्ट्रासाउंड की सुविधा कुछ समय के लिए मिल सकी थी. तय अनुबंध के अनुसार ट्रस्ट को फरवरी 2026 तक अस्पताल में यह सुविधा जारी रखनी थी. लेकिन एक वर्ष पहले ही तय अनुबंध खत्म कर लिया गया. नतीजतन एक साल से अधिक समय से मनीमाजरा अस्पताल में आने वाले मरीजों को यह सुविधा नहीं मिल पा रही है.
सेक्टर-22 अस्पताल को संजीवनी का सहारा: चंडीगढ़ के सेक्टर-16 स्थित गवर्नमेंट मेडिकल स्पेशिएलिटी अस्पताल (जीएमएसएच) के अधीन संचालित सेक्टर-22 स्थित सिविल अस्पताल में भी अल्ट्रासाउंड की स्थिति चिंताजनक है. यहां भी ओपीडी के मरीजों को अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिल पा रही है. ओपीडी के मरीजों के अलावा गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड भी अस्पताल में नहीं किए जाते. इसके लिए अस्पताल ने सेक्टर-11 स्थित निजी संजीवनी लैब से एमओयू किया हुआ है, नतीजतन गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए सिविल अस्पताल-22 से टोकन लेकर संजीवनी लैब जाकर यह सुविधा लेनी पड़ती है. स्वास्थ्य विभाग, चंडीगढ़ द्वारा लैब संचालक को प्रत्येक अल्ट्रासाउंड के लिए 250 रूपये दिए जाते हैं. लेकिन कई महिला मरीज और उनके तीमारदार प्राइवेट संजीवनी लैब की दूरी अधिक होने के कारण सेक्टर 22 की ही किसी नजदीकी प्राइवेट लैब या चैरिटेबल ट्रस्ट से अपना अल्ट्रासाउंड करवा रहे हैं.
स्वास्थ्य सेवा निदेशक से बातचीत: चंडीगढ़ के दोनों बड़े अस्पतालों में ओपीडी के मरीजों का अल्ट्रासाउंड नहीं होने के संबंध में चंडीगढ़ स्वास्थ्य सेवा निदेशक, डॉ. सुमन सिंह से बातचीत की गई. उन्हाेंने इस परेशानी का कारण रेडियोलॉजिस्ट की कमी होना बताया. उन्होंने कहा कि सेक्टर-22 सिविल अस्पताल के लिए एक निजी सेंटर के साथ टाई-अप किया है. उन्होंने कह कि "अस्पताल की गाड़ी से गर्भवती महिलाओं को सेंटर ले जाकर उनके निशुल्क अल्ट्रासाउंड करवाए जाते हैं. लेकिन यह सुविधा केवल गर्भवती महिलाओं के लिए है, ओपीडी के मरीजों के लिए नहीं." उन्होंने मनीमाजरा अस्पताल और सेक्टर-45 स्थित अस्पताल में किसी रेगुलर या अनुबंधित रेडियोलॉजिस्ट के ज्वाइन करने पर अल्ट्रासाउंड की सुविधा शुरू होने की बात कही. उन्होंने कहा कि "कुछ कॉन्ट्रेक्चुअल रेडियोलॉजिस्ट रखे हैं, जिनके ज्वाइन करने का इंतजार है."
पंचकूला सिविल अस्पताल-6 की स्थिति: पंचकूला सेक्टर-6 स्थित सिविल अस्पताल के अल्ट्रासाउंड पंजीकरण काउंटर पर मरीजों को परेशान होते देखा गया. रजिस्ट्रेशन काउंटर पर अस्पताल के कर्मचारियों से ओपीडी मरीजों के अल्ट्रासांड बारे पूछा गया तो उन्होंने केवल गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड होने की बात कही. बताया गया कि गायनी वार्ड से जिन गर्भवती महिलाओं की फाइल पहुंचती है, केवल उन्हीं के अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं. वहीं, अस्पताल में तीन रेडियोलॉजिस्ट हैं, जिन्होंने बताया कि अस्पताल में रोजाना मरीजों की संख्या कहीं अधिक रहती है. लेकिन गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड प्राथमिकता पर किया जाता है. अल्ट्रासाउंड यूनिट की इंचार्ज ने ओपीडी के मरीजों की संख्या कहीं अधिक होने की बात कही.
अल्ट्रासाउंड अधिक लेकिन स्टाफ कम: गौर करने वाली बात यह है कि ओपीडी में सर्जरी, मेडिसन, चेस्ट एवं टीबी, ईएनटी, गायनी विभाग समेत अन्य विभागों के डॉक्टर मरीजों को अल्ट्रासाउंड का परामर्श देते हैं. जबकि अस्पताल में तीन अल्ट्रासाउंड मशीनों पर इंचार्ज समेत तीन रेडियोलॉजिस्ट हैं. लेकिन अल्ट्रासाउंड कराने वालों की संख्या 200-300 रहती है. वर्कलोड अधिक होने और स्टाफ कम होने से भी परेशानी बनी हुई है.