Haryana Education News: 4 साल का कोर्स करने के बाद छात्रों को मिल रहा कोरा कागज, सड़कों पर उतरे 500 विद्यार्थियों का फूटा गुस्सा

गुड़गांव में SIASTE के छात्र डिग्री न मिलने के कारण सड़कों पर उतर आए और सोहना रोड पर जाम लगा दिया। छात्रों को NCTE की मान्यता न मिलने से भविष्य अधर में है।

 
NCTE recognition Haryana

गुड़गांव स्थित स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज इन टीचर एजुकेशन (SIASTE) के छात्र अपनी डिग्री की मांग को लेकर आखिरकार सड़कों पर उतर आए और रास्ता जाम कर दिया। छात्रों का आरोप है कि कोरोना काल में शुरू किए गए इस संस्थान को आज तक नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर एजुकेशन (NCTE) से मान्यता नहीं मिल पाई है, जिसके कारण करीब 500 विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। चार साल का कोर्स पूरा करने के बावजूद छात्रों को डिग्री के नाम पर केवल कोरा कागज मिल रहा है, जिससे नाराज होकर उन्होंने सरकार और शिक्षा विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

🛑 कोर्स पूरा होने के बाद भी नौकरी और आगे की पढ़ाई के रास्ते बंद: प्रिंसिपल के रवैये से नाराज छात्रों ने की खरी-खरी

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि सरकार द्वारा पहले झज्जर में खोले गए सेंटर को मान्यता मिल चुकी है, लेकिन गुरुग्राम और कुरुक्षेत्र के सेंटरों को आज तक यह राहत नहीं मिली है। इस वजह से इन डिग्रियों का कोई कानूनी या व्यावहारिक औचित्य नहीं रह गया है, और छात्र न तो आगे की पढ़ाई कर पा रहे हैं और न ही किसी सरकारी या निजी नौकरी के लिए आवेदन कर पा रहे हैं। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि जब वे अपनी समस्या लेकर प्रिंसिपल के पास जाते हैं, तो उनसे ठीक से बात भी नहीं की जाती। हालांकि, आज जाम लगने के बाद प्रिंसिपल मौके पर पहुंचे, लेकिन उनके पास भी छात्रों की समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं था।

🏛️ पुलिस और प्रशासन ने संभाला मोर्चा: 13 अक्टूबर को कोर्ट में होगी मामले की अगली सुनवाई

छात्रों द्वारा सोहना रोड पर अचानक जाम लगाए जाने से यातायात पूरी तरह बाधित हो गया, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर ट्रैफिक डायवर्ट किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसीपी अनिल कुमार मौके पर पहुंचे और छात्रों को समझा-बुझाकर डीसी कार्यालय बातचीत के लिए ले गए। वहीं, संस्थान के प्रिंसिपल ने बताया कि मंत्रालय से लगातार पत्राचार किया जा रहा है और यह मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है, जिसकी अगली सुनवाई आगामी 13 अक्टूबर को होनी है। प्रशासन को उम्मीद है कि अदालत के फैसले के बाद इस मामले का कोई सकारात्मक समाधान निकल सकेगा।