हांसी के उद्यमी कमलेश गर्ग की प्रेरणादायक कहानी, Atlas Cycles बंद होने के बाद खड़ी की LCI Cycles

एटलस साइकिल बंद होने के बाद हांसी के कमलेश गर्ग ने हार नहीं मानी और LCI Cycles की शुरुआत की। आज 5 राज्यों में साइकिलें सप्लाई हो रही हैं, अफ्रीका में निर्यात की तैयारी है।

 
हांसी न्यूज हिंदी

हांसी: अक्सर लोग विपरीत परिस्थितियों में हिम्मत हार बैठते हैं लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो उन मुश्किल हालातों में भी नई राह तलाश लेते हैं और कुछ ऐसा कर जाते हैं जो दूसरे लोगों के लिए मिसाल बन जाती है..कुछ ऐसा ही कर दिखाया है हांसी के उद्योगपति कमलेश गर्ग ने . दरअसल कमलेश ने एटलस साइकिल में बतौर वेंडर के रूप में करियर की शुरूआत की थी. एटलस कंपनी के बंद होने के बाद उन्होंने हार मानने के बजाय अपना साइकिल उद्योग शुरू किया. आलम यह है कि आज उनकी साइकिलें हरियाणा ही नहीं बल्कि राजस्थान, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गोवा तक पहुंच रही हैं.

"एटलस बंद हुई, लेकिन हमने हिम्मत नहीं हारी":  LCI Cycles Pvt. Ltd. के मालिक कमलेश गर्ग ने कहा कि, "मैंने अपने करियर की शुरुआत एटलस साइकिल में वेंडर के रूप में की थी. जब एटलस का संचालन बंद हुआ तो हमने हार नहीं मानी और अपना उद्योग शुरू किया. पिछले करीब 40 वर्षों से साइकिल निर्माण के क्षेत्र में लगातार काम कर रहे हैं. कठिन समय में आत्मविश्वास मेरी सबसे बड़ी ताकत बनी. एक समय था जब बच्चे स्कूल और बड़े अपने रोजमर्रा के कामों के लिए साइकिल का इस्तेमाल करते थे. अब साइकिल जरूरत से ज्यादा फिटनेस और शौक का साधन बन गई है. बच्चों और युवाओं में रेंजर साइकिलों की मांग लगातार बढ़ रही है. गियर, डिस्क ब्रेक और सस्पेंशन जैसे आधुनिक फीचर्स के कारण इनकी लोकप्रियता बढ़ी है, हालांकि कीमतें भी पहले के मुकाबले अधिक हो गई हैं."

हर साल होता है पांच करोड़ साइकिलों का निर्माण : कमलेश गर्ग ने बताया कि, "भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा साइकिल उत्पादक देश है और हर साल करीब पांच करोड़ साइकिलों का निर्माण करता है. इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार, विशेषकर यूरोप में चीन का दबदबा लगातार बढ़ा है. कम लागत, बड़े पैमाने पर उत्पादन और मजबूत सप्लाई चेन के कारण चीनी कंपनियां आगे निकल गई हैं. ऐसे में भारतीय उद्योग के लिए नई तकनीक अपनाने, गुणवत्ता सुधारने और निर्यात बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है."

कोरोना के बाद आधी रह गई साइकिलों की मांग: कमलेश गर्ग ने कहा कि, "भारतीय साइकिल उद्योग में कोरोना महामारी के दौरान मांग तेजी से बढ़ी थी. उस समय हर महीने करीब दो लाख साइकिलों की बिक्री हो रही थी, लेकिन अब मांग लगभग आधी रह गई है. उत्पादन बढ़ने और बिक्री घटने से कंपनियों के सामने इन्वेंट्री बढ़ने की समस्या खड़ी हो गई है. घरेलू मांग में गिरावट और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा ने साइकिल उद्योग पर अतिरिक्त दबाव बना दिया है."

"साइकिल ट्रैक बनेंगे तो लौटेगा लोगों का भरोसा": कमलेश गर्ग का मानना है कि साइकिल चलाने का चलन कम होने की बड़ी वजह सुरक्षित साइकिल ट्रैक का अभाव है. उन्होंने कहा कि, "अधिकांश शहरों में अलग साइकिल लेन नहीं है. भारी ट्रैफिक के कारण अभिभावक बच्चों को साइकिल लेकर बाहर भेजने से डरते हैं. अगर शहरों और कस्बों में सुरक्षित साइकिल ट्रैक बनाए जाएं तो लोगों का उत्साह बढ़ेगा, सड़क दुर्घटनाएं कम होंगी और पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा."

कई राज्यों तक पहुंचा कारोबार: कमलेश गर्ग ने कहा कि, "हमारा उद्योग हरियाणा के प्रमुख साइकिल निर्माताओं में शामिल है. हमारी साइकिलें हरियाणा, राजस्थान, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गोवा तक सप्लाई की जा रही हैं. अब हमारी योजना अंतरराष्ट्रीय बाजार में कदम रखने की है और जल्द ही ईस्ट अफ्रीका में कारोबार शुरू करने की तैयारी है."

स्थानीय स्तर पर बन रहे मजबूत पार्ट्स: कमलेश की कंपनी में लोहे के पार्ट बनाने वाले कुर्बान अली ने बताया कि, "हम कई वर्षों से साइकिल उद्योग से जुड़े हैं और साइकिल में इस्तेमाल होने वाले लोहे के लगभग सभी पार्ट तैयार करते हैं. गुणवत्ता और मजबूती पर विशेष ध्यान दिया जाता है ताकि उत्पाद टिकाऊ रहें. स्थानीय स्तर पर पार्ट्स बनने से पूरे साइकिल उद्योग को मजबूती मिलती है."

2,000 से 10,000 रुपये तक कीमत: कुर्बान अली ने कहा कि, "हम 2,000 से 10,000 रुपये तक की साइकिलें तैयार करते हैं. वर्तमान में करीब 5,000 रुपये तक की रेंजर साइकिलों की सबसे ज्यादा मांग है. यदि लोगों को सुरक्षित माहौल और बेहतर सुविधाएं मिलें तो हर बच्चा और हर नागरिक फिर से साइकिल चलाने की आदत अपना सकता है."

हांसी के कमलेश की कहानी केवल एक उद्योग की नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और नए अवसर तलाशने की मिसाल है. एटलस साइकिल बंद होने के बाद जहां कई लोग उद्योग छोड़ गए. हालांकि कमलेश गर्ग ने उसी अनुभव को अपनी ताकत बनाया. आज उनकी कंपनी न केवल देश के कई राज्यों में अपनी पहचान बना चुकी है, बल्कि वैश्विक बाजार में कदम रखने की तैयारी भी कर रही है.