हरियाणा कांग्रेस में बगावत: क्रॉस वोटिंग पर कार्रवाई की दुविधा और 2028 का सियासी गणित!

हरियाणा राज्यसभा चुनाव में 5 विधायकों की क्रॉस-वोटिंग से कांग्रेस में संकट। जानें क्यों 2028 के राज्यसभा चुनाव को लेकर डरी है पार्टी और क्या होगी बागियों पर कार्रवाई।

 
Bhupinder Hooda vs Cross Voters

चंडीगढ़ : राज्यसभा चुनाव के बाद हरियाणा कांग्रेस में सियासी भूचाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों पर कार्रवाई की चर्चा के बीच अब कई विधायक खुल कर बयानबाजी कर रहे हैं, जिससे पार्टी में बगावत के संकेत साफ दिखाई देने लगे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि कांग्रेस नेतृत्व के सामने संगठन को एकजुट रखना बड़ी चुनौती। बनता जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, 5 विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग करने के बाद पार्टी ने सख्त कार्रवाई के संकेत दिए थे, लेकिन अब जिन विधायकों के नाम सामने आए हैं, वे खुल कर अपनी बात रख रहे हैं और फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं। 

इससे साफ है कि अंदरखाने असंतोष गहराता जा रहा है और पार्टी अनुशासन कमजोर पड़ता दिख रहा है। हालांकि कांग्रेस उम्मीदवार चुनाव जीतने में कामयाब रहे, लेकिन इस जीत ने पार्टी के भीतर की दरारों को उजागर कर दिया। अब नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती भरोसे और विश्वसनीयता को दोबारा स्थापित करने की है। लिहाजा अब 2 साल बाद वर्ष 2028 में होने वाले राज्यसभा चुनाव की चर्चा शुरू हो गई है। दरअसल अगस्त 2028 में निर्दलीय राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा और भाजपा सांसद रेखा शर्मा का कार्यकाल पूरा हो जाएगा। भविष्य में भी मौजूदा स्थिति उक्त चुनावों में भी देखने को मिल सकती है क्योंकि भाजपा की ओर से तीसरा उम्मीदवार उतारना तय हैं। 

विधायकों पर कार्रवाई हुई तो 2028 में बिगड़ सकता है गणितः अगर कांग्रेस हाईकमान क्रॉस वोटिंग करने वाले 5 विधायकों पर सख्त कार्रवाई करता है, जैसे निलंबन या निष्कासन, तो पार्टी की संख्या विधानसभा में घट सकती है। ऐसी स्थिति में 2028 के राज्यसभा चुनाव में जीत दर्ज करना कांग्रेस के लिए मुश्किल हो सकता है। कम संख्या के कारण पार्टी में क्रॉस वोटिंग का खतरा ज्यादा बढ़ सकता है। जिन विधायकों के नाम सामने आए हैं, वे अब खुल कर बयान दे रहे हैं और कैंसिल वोट करने वालों के नाम सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं। अगर यह टकराव और बढ़ा तो पार्टी के भीतर गुटबाजी खुलकर सामने आ सकती है। बगावत की स्थिति में कांग्रेस को संगठनात्मक नुकसान के साथ-साथ राजनीतिक छवि का भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

दुविधा में कांग्रेस, कार्रवाई करे या नरम रुख अपनाए
कांग्रेस नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह हो गई है कि वह अनुशासन बनाए रखने के लिए कार्रवाई करे या फिर 2028 के चुनावी गणित को देखते हुए नरम रुख अपनाए। ज्यादा सख्ती करने से संख्या घट सकती है, जबकि नरमी दिखाने से पार्टी में अनुशासन कमजोर होने का संदेश जाएगा। यही दुविधा आने वाले फैसलों को प्रभावित कर सकती है। चर्चा यह भी है कि यदि कैंसिल वोट करने वाले विधायकों के नाम भी सामने आते हैं, तो विवाद और बड़ा हो सकता है। इससे कार्रवाई का दायरा बढ़ेगा और पार्टी के भीतर असंतोष और फैल सकता है। ऐसे हालात में कांग्रेस को एक साथ कई मोर्चों पर राजनीतिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।